गत वर्ष अक्टूबर माह से जेल में बंद हैं फादर स्टेन स्वामी - Live Aaryaavart

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शनिवार, 12 जून 2021

गत वर्ष अक्टूबर माह से जेल में बंद हैं फादर स्टेन स्वामी

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मुंबई. जेसुइट पुरोहित फादर स्टेन स्वामी को 8 अक्टूबर 2020 को रांची में गिरफ्तार किया गया. एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में गिरफ्तार सोशल एक्टिविस्ट फादर स्टेन स्वामी को 9 अक्टूबर 2020 को नवी मुंबई में स्थित तलोजा जेल में रखा गया.तब से 247 दिनों से कैद हैं एक्टिविस्ट स्टेन. अभी स्टेन स्वामी 84 वर्ष के हो गये हैं.फादर स्टेन स्वामी पार्किंसन, पीठ के निचले हिस्से में दर्द,द्विपक्षीय श्रवण हानि सहित अन्य बीमारियों से पीड़ित हैं. इस गिरते स्वास्थ्य के आधार पर अंतरिम जमानत मांगते हुए एक याचिका दाखिल की थी, जिसके बाद उन्हें नवी मुंबई में स्थित तलोजा जेल से 28 मई को यहां होली फैमिली अस्पताल लाया गया था. निजी होली फैमिली अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद वह कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे. वह 9 अक्टूबर 2020 में अपनी गिरफ्तारी के बाद से तलोजा जेल में बंद हैं. यह कहा गया कि स्वामी जी को 18 जून तक निजी अस्पताल में भर्ती रहने दिया जाए. अदालत ने मामले की सुनवाई 17 जून तक स्थगित कर दी.अदालत ने अस्पताल को सुनवाई की अगली तारीख पर सीलबंद लिफाफे में स्वामी की स्वास्थ्य रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया. अब होली फैमिली अस्पताल के चिकित्सकों पर निर्भर है कि कई बीमारियों से घिरे स्टेन स्वामी की स्वास्थ्य रिपोर्ट पेश करें.स्वास्थ्य रिपोर्ट ही बंबई उच्च न्यायालय के महान न्यायधीशों को अंतरिम जमानत देने का आधार बनेगा.फिलवक्त कोविड-19 से जूझ रहे हैं, लिहाजा उन्हें 18 जून तक मुंबई में स्थित अस्पताल में भर्ती रखा जाए.पॉजिटिव से निगेटिव होने पर तीन माह तक पोस्ट कोविड का असर रहता है.इस अवधि में ब्लैक फंगस से भी सर्तक रहना पड़ेगा. एक 84 वर्षीय कैदी से संभव नहीं हैं.जबकि फादर स्वामी स्वामी पार्किंसंस रोग, दोनों कानों में सुनवाई हानि, पेट दर्द, साथ ही साथ उनकी बाहों में चोट सहित कई बीमारियों से पीड़ित हैं. याचिका में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि स्वामी पहले से ही पार्किंसंस के एक उन्नत चरण में थे - वह बिना मदद के बात करने, चलने या दैनिक काम करने में असमर्थ थे और हर दिन उनका स्वास्थ्य बिगड़ रहा था. बताते चले कि भीमा कोरेगांव मामले में एनआईए के अनुसार, 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में शनिवारवाड़ा में कबीर कला मंच द्वारा आयोजित एल्गर परिषद के एक कार्यक्रम के दौरान आरोपियों ने भड़काऊ भाषण दिए. गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं में जेल में बंद और जमानत से वंचित वकील सुधा भारद्वाज, कवि-कार्यकर्ता वरवारा राव, सुधीर धावले, रोना विल्सन, सुरेंद्र गडलिंग, शोमा सेन, महेश राउत, अरुण परेरा, वर्नोन गोंसाल्वेस, हनी बाबू, स्टेन स्वामी,  गौतम नवलखा और आनंद तेलतुंबड़े  शामिल हैं.


उल्लेखनीय है कि पुणे के पास भीमा कोरेगांव में एक युद्ध स्मारक के पास एक जनवरी 2018 को हिंसा भड़क गई थी.इसके एक दिन पहले ही पुणे शहर में एल्गार परिषद का सम्मेलन हुआ था. एनआईए का आरोप है कि इसी दौरान उकसाने वाले भाषण दिये गये थे, जिसके बाद हिंसा भड़की. एनआईए अधिकारियों का दावा है कि जांच में यह स्थापित हुआ है कि स्वामी भाकपा (माओवादी) की गतिविधियों में सक्रिय रूप से संलिप्त थे. जबकि भीमा कोरेगावं मामले में हाल ही में हुए खुलासे ने इसकी जाँच पर गंभीर सवाल उठा दिए हैं.  इस खुलासे से ऐसा प्रतीत होता है कि सामाजिक कार्यकर्ताओं को फ़साने की साज़िश हुई है. एक रिपोर्ट के मुताबिक़ अमेरिका स्थित  एक डिजिटल फोरेंसिक फर्म ने पाया है कि भीमा कोरेगांव मामले की जांच कर रही पुलिस द्वारा एक्टिविस्ट रोना विल्सन के एक लैपटॉप में मालवेयर का इस्तेमाल करते हुए "भड़काऊ" सुबूत डाले गए थे. अब इसी  मामले में  एल्गार परिषद के माओवादियों से संबंध के मामले में आरोपी और पिछले साल अक्टूबर से जेल में बंद मानवाधिकार कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी के सहकर्मी फादर सोलोमन ने मंगलवार को कहा कि स्वामी ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से पूछताछ के दौरान कम से कम चार बार कहा था कि उनके कम्प्यूटर में झूठे सबूत डाले गए हैं। स्टेन झारखंड के जाने–माने सामाजिक कार्यकर्ता हैं. वह बीते कई दशक से राज्य के आदिवासियों-वंचितों के लिए काम करते रहे हैं. मूल रूप से तमिलनाडु के रहने वाले स्टेन हैं. बाद में आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई में जुड़ गये.इस दौरान उन्होंने संविधान के पांचवी अनुसूची के सही से काम न करने, पेसा कानून, वनाधिकार कानून को सही से लागू करवाने को लेकर लंबी लड़ाई लड़ी.  इसके साथ ही झारखंड के जेलों में बंद दस हजार से अधिक विचाराधीन कैदियों को लेकर सर्वे तैयार किया. फिर इसे लेकर कोर्ट गए. राज्यभर में हुए विस्थापनों के खिलाफ लगातार आंदोलन करते रहे. इनके ऊपर पत्थलगड़ी आंदोलन के दौरान भी मुकदमा दर्ज किया गया था.

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