बक्सवाहा जंगल बचाने के लिए इंदौर में भी बरसते पानी में बनी प्रभावी मानव श्रंखला - Live Aaryaavart

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मंगलवार, 29 जून 2021

बक्सवाहा जंगल बचाने के लिए इंदौर में भी बरसते पानी में बनी प्रभावी मानव श्रंखला

  • पूर्व महाधिवक्ता आनंद मोहन माथुर के नेतृत्व  बनी मानव श्रृंखला में विभिन्न राजनीतिक दलों ट्रेड यूनियनों सामाजिक संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने की भागीदारी, संभाग आयुक्त कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन के बाद राज्यपाल के नाम दिया गया ज्ञापन 

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इंदौर।  मध्य प्रदेश की पर्यावरण विरोधी और पूंजीपतियों की रक्षक सरकार द्वारा प्रदेश के पर्यावरण और जंगल को नष्ट करने के फैसले के खिलाफ पूरे मध्यप्रदेश में राजनीतिक दलों ट्रेड यूनियनों और जन संगठनों द्वारा आज जोरदार आंदोलन हुआ। उसी के तहत इंदौर में भी विभिन्न जन संगठनों द्वारा पूर्व महाधिवक्ता *आनंद मोहन माथुर*  के नेतृत्व मे   बक्सवाहा जंगल बचाओ पर्यावरण बचाओ की मांग के समर्थन में इंदौर के संभाग आयुक्त कार्यालय  के समक्ष प्रभावी मानव श्रृंखला  बनाई गई। मानव श्रृंखला मेंभारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ,सोशलिस्ट पार्टी इंडिया, आम आदमी पार्टी ,एस यू सी आई, लोकतांत्रिक जनता दल समाजवादी पार्टी,  इंटक ,एटक, सीटू, एच एम एस,  संयुक्त ट्रेड यूनियन काउंसिल , सिटी ट्रेड यूनियन काउंसिल, जयस, नर्मदा बचाओ आंदोलन  जनता श्रमिक संघ कामकाजी महिला संगठन, भारतीय जन नाट्य संघ(इप्टा),  प्रगतिशील लेखक संघ, जनवादी लेखक संघ, भारतीय महिला फेडरेशन, फूलन आर्मी साक्षी सेवा समिति गतसिंह दिवाने ब्रिगेड, लोहिया विचार मंच, अम्बेडकर विचार मंच सहित विभिन्न जन संगठनों और सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने भागीदारी कर बिरला घर आने को हीरा खनन के लिए 50 साल की लीज पर दी जा रही जंगल की साडे 300 हेक्टेयर भूमि का अनुबंध नहीं करने की मांग की।


बक्सवाहा बचाओ समर्थक समूह इंदौर की ओर से रामस्वरूप मंत्री ने उक्त जानकारी देते हुए बताया किऑक्सीजन को तरस रहे देश में छतरपुर स्थित बक्सवाहा के जंगलों में सवा दो लाख हरे भरे पेड़ों को काटने की तैयारी प्रदेश सरकार ने कर ली है। सरकार के इस फैसले के बाद देश भर के पर्यावरण प्रेमियों में रोष है। मानव श्रृंखला और प्रदर्शन में का मुख्य रूप से सर्वश्री पूर्व विधायक अश्विन जोशी, अरविंद पोरवाल, अजय लागू ,,सारिका श्रीवास्तव,  रामस्वरूप मंत्री,  कैलाश लिंबोदिया, अरुण चौहान ,  हरिओम सूर्यवंशी, रूद्रपाल यादव,  किर्ति राणा,   अशोक दुबे, अजय यादव,    ,दुर्गेश  खवासे,  सत्येंद्र भाई ,नवीन मिश्रा, सीमा सेन , न्यामतल्ला खान चिन्मय मिश्रा शकील शेख ओमप्रकाश खटके रजनीश जैन,   भागीरथ कछवाय,  कामरेड दलाल,मनोज यादव, प्रमीला चौकसी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शरीक थे।  मानव श्रृंखला की समाप्ति पर कार्यकर्ताओं ने संभागायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन कर राज्यपाल के नाम ज्ञापन दिया जिसमें बक्सवाहा जंगल को आदित्य बिरला समूह की कंपनी एचएल को 50 साल की लीज पर दिए जाने और सवा दो लाख से ज्यादा पेड़ों के काटे जाने से होने वाले नुकसान की विस्तार से जानकारी देते हुए कहा किबकस्वाहा के जंगलों को कटने की सरकारी योजना को वापस लेकर देश की प्राकृतिक आक्सीजन की आपूर्ति, पर्यावरण, लाखों पेड़, करोङों जीव जंतु, बुंदेलखंड के पेय जल, वहाँ के नागरिकों, मूल निवासी आदिवासियों का जीवन बचाने का कष्ट करें। हम  की राजनीतिक सामाजिक संगठनों और जन संगठनों तथा ट्रेड यूनियनोंों से जुड़े कार्यकर्ता सरकार से मांग करते हैं कि सरकार इस प्रोजेक्ट को तुरंत रद्द करे।मानव श्रृंखला के समापन पर प्रदर्शन में शामिल विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने  हुई सभा को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया के आदिवासियों और  जंगलों के किनारे बसने वालों का दुर्भाग्य ही है कि उन्हें बार-बार उजाड़ना पड़ता है वह भी उनके अपने देशों के छद्म विकास के नाम पर । छद्म विकास इसलिए क्योंकि यह दुखद विस्थापन चंद पूंजीपतियों की तिजोरी भरने के लिए ही होता है ।आप किसी भी स्थान के विस्थापन को देख सकते हैं। यह हत्यारा विकास एक तरफ पूंजीपतियों को जमीन से आसमान पर पहुंचा देता है, तो ,दूसरी तरफ उस इलाके के निवासियों का घर छीनकर बेघर करता है और जीविका छीन कर बेरोजगार । वक्ताओं का कहना था कि बक्सवाहा जंगल क्षेत्र का लगभग 383 हेक्टेयर क्षेत्र हीरा खनन के लिए आदित्य बिड़ला की कंपनी एसेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड को 50 वर्षों की लीज पर दिया गया है। इसके खनन क्षेत्र का क्षेत्रफल मात्र 62.64 हेक्टेयर है शेष लगभग 320 हेक्टेयर में खनन का मालवा रखा जाएगा । विभिन्न राजनीतिक दलों और श्रम संगठनों के नेताओं ने कहा कि  देश के संसाधनों का स्वामित्व समुदाय का है इसलिए सरकार के इस लुटेरी निर्णय को बदलने के लिए इस देश की सभी नागरिकों को इस लीज के खिलाफ अपनी अपनी योग्यता अनुसार बक्सवाहा के इस संघर्ष में साथ देना चाहिए । वायुमंडल पर प्रभाव इस वर्तमान विकास की लौ में वन संपदा को मात्र घन फीट में लकड़ी का टुकड़ा माना जाता है इसी कारण इसके कटने का दर्द इन विकास के एजेंटों को नहीं होता है।  सरकार के विकास के दावों पर नेताओं का कहना था कि  प्रशासनिक पदाधिकारी, राजनेता और कंपनी इस परियोजना के लाभ के रूप में 400 स्थानीय युवकों के रोजगार को सामने रखकर विकास की बात कर रहे हैं उनसे पूछा जाना चाहिए कि क्या 400 लोगों के रोजगार के लिए 3,20,000 लोगों का दैनिक उपयोग का पानी और 27000 लोगों की सांसें रोक दी जाए।

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