3.61 लाख गांवों में ब्रॉडबैंड पहुंचाने के लिए 29 हजार करोड़ मंजूर - Live Aaryaavart

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा I ह्रदय राखि कौसलपुर राजा II, हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी॥, मंगल भवन अमंगल हारी I द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी II, हरि अनंत हरि कथा अनंता I कहहि सुनहि बहुबिधि सब संता II, दीन दयाल बिरिदु संभारी । हरहु नाथ मम संकट भारी।I, माता पिता की सेवा करें....बुजुर्गों का ख्याल रखें...अपनी प्रतिभा और आचरण से देश का नाम रौशन करें...

गुरुवार, 1 जुलाई 2021

3.61 लाख गांवों में ब्रॉडबैंड पहुंचाने के लिए 29 हजार करोड़ मंजूर

fund-for-broadband-in-village
नयी दिल्ली 30 जून, केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने भारतनेट परियोजना के अंतर्गत 16 राज्यों के 3.61 लाख गांवों में ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से ब्रॉडबैंड इंटरनेट सुविधा मुहैया कराने के लिए 29 हजार 430 करोड़ रुपए के कार्यक्रम को सरकारी निजी साझीदारी (पीपीपी) मॉडल पर क्रियान्वित करने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की यहां हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक के बाद संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इस 29 हजार 430 करोड़ रुपए की परियोजना में 19 हजार 41 करोड़ रुपए केन्द्र सरकार व्यवहार्यता अंतर भुगतान (वीजीएफ) के रूप में करेगी। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में शामिल होने वाली निजी कंपनियों के साथ 30 साल का करार किया जाएगा। श्री प्रसाद ने कहा कि वर्ष 2011 में शुरू हुई भारत नेट परियोजना के अंतर्गत अब तक देश की कुल करीब ढाई लाख ग्राम पंचायतों में से 1.56 लाख ग्राम पंचायताें तक ब्रॉडबैंड इंटरनेट सुविधा पहुंच चुकी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गत वर्ष 15 अगस्त को लालकिले से घोषणा की थी कि 1000 दिनों में देश के सभी छह लाख गांवों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी उपलब्ध करा दी जाएगी। सरकार उस दिशा में तेजी से काम कर रही है। केरल, कर्नाटक, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में करीब तीन लाख 61 हजार गांव इस नेटवर्क में आएंगे। श्री प्रसाद ने कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी क्रांति होगी। बच्चों को उत्तम गुणवत्ता वाली कोचिंग सुलभ होगी वहीं टेलीमेडिसिन से दूर शहरों में मौजूद विशेषज्ञों से उपचार का परामर्श हासिल हो सकेगा। गांवों में डार्क फाइबर, ई-लर्निंग, ई-कॉमर्स, ओटीटी आदि सुविधाएं होने से ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल जाएगी।

कोई टिप्पणी नहीं: