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शुक्रवार, 13 अगस्त 2021

दुनिया के इंजीनियरिंग स्टूडेंटस में चर्चित नाम है बिहार का ऑटो रिक्शा वाला

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एक ऑटो रिक्शा वाले आरके श्रीवास्तव ने मैथेमैटिक्स गुरू बन सैकड़ों निर्धन परिवार के स्टूडेंट्स के सपने को पंख लगा दिए हैं। आरके श्रीवास्तव का नाम वर्ल्ड बुक ऑफ ऑफ़ रिकॉर्डस लंदन , इंडिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स, गोल्डेन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हो चुका है। बिहार के रोहतास जिले में रहने वाले शिक्षक आरके श्रीवास्तव न सिर्फ भारत में बल्कि पूरी दुनिया के इंजीनियरिंग स्टुडेंट्स के बीच एक चर्चित नाम हैं। इनका ‘1 रूपया गुरु दक्षिणा ’ प्रोग्राम विश्व प्रसिद्ध है। इसके तहत वे आर्थिक रूप से गरीब स्टूडेंट्स को 1 रूपया गुरु दक्षिणा लेकर इंजीनियर बना रहे। आरके श्रीवास्तव की लोकप्रियता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद उनके शैक्षणिक कार्यशैली के तहत आर्थिक रूप से गरीब स्टूडेंट्स को 1 रूपया में इंजीनियर बनाकर राष्ट्र निर्माण मे योगदान के लिये प्रशंसा कर चुके है। गरीब स्टूडेंट्स को सिर्फ 1 रूपया में शिक्षा देकर इंजीनियर बना रहे बिहार के आरके श्रीवास्तव। आपको बताते चले की बिहार के आरके श्रीवास्तव सैकडों गरीबों को आईआईटी, एनआईटी, बीसीईसीई सहित देश के प्रतिष्ठित संस्थानो मे दाखिला दिलाकर उनके सपने को पंख लगा चुके है। 540 स्टूडेंट्स को बना चुके है इंजीनियर। रोहतास के जमोढी गांव निवासी आरके श्रीवास्तव बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही गणित में बहुत अधिक रुचि थी जो नौंवी और दसवी तक आते-आते परवान चढ़ी। आर के श्रीवास्तवा की बचपन भी काफी गरीबी से गुजरा है। परन्तु अपने कड़ी मेहनत, उच्ची सोच, पक्का इरादा के बल पर आज देश मे मैथमेटिक्स गुरु के नाम से मशहूर है, वे कहते हैं कि मेरे जैसे देश के कई बच्चे होंगे जो पैसों के अभाव में पढ़ नहीं पाते।आर के श्रीवास्तवा अपने छात्रों में एक सवाल को अलग-अलग मेथड से हल करना भी सिखाते हैं।


आरके श्रीवास्तव के शैक्षणिक कार्यशैली के तहत बढती लोकप्रियता ने बढ़ाया बिहार का मान सम्मान। अपने कड़ी मेहनत, उच्ची सोच, पक्का इरादा के बल पर बन चुके है लाखो युवायो के रॉल मॉडल। देश के महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी कर चुके है आर के श्रीवास्तव के शैक्षणिक कार्यशैली की प्रशंसा। शैक्षणिक मीटिंग के दौरान मैथेमैटिक्स गुरू के नाम से महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी कर चुके है सम्बोधित। आरके श्रीवास्तव ने युवाओ को हमेशा बताया की “जीतने वाले छोङते नही, छोड़ने वाले जीतते नही ” के मार्ग पर हमेशा आगे बढ़े। आपको सफलता पाना है तो कई असफलता के बाद भी अपने लक्ष्य को छोडे नही उसे पाने के लिये निरंतर परिश्रम करते रहे आपको एक दिन सफलता जरुर मिलेगी। देश के अलग-अलग राज्यो के शैक्षणिक एवं समाजिक कार्यक्रमो मे अपने सम्बोधन से बिहार के मान सम्मान को हमेशा आगे बढ़ाते रहा है यह बिहारी गुरू। शिक्षा के तहत रास्ट्र निर्माण मे नि:स्वार्थ योगदान वाले ऐसे सारे गुरुओ को सलाम है । आपको बताते चले की बिहार आदिकाल से ही महापुरुषो की भूमि रही है । जिन्होने हिंदुस्तान सहित पूरे विश्व को मार्ग दिखाया। तब आसमा भी आयेगी जमी पे, बस इरादों में जीत का जुनून चाहिए। आज इन्ही पंक्ति को जीवंत कर रहे मैथमेटिक्स गुरु आरके श्रीवास्तवा। निर्धन छात्रों के इरादों को सम्बल प्रदान कर उनके सपनो को साकार किया है। बिक्रमगंज जैसे छोटे शहर में आरके श्रीवास्तवा ने कई निर्धन छात्रों को निःशुल्क पढ़ा आईआईटी ,एनडीए और अन्य इंजिनयरिंग कॉलेजों में दाखिला के लिये कामयाब किया।


एक रुपया में पढ़ाते हैं आरके श्रीवास्तव, 540 गरीब स्टूडेंट्स को बना चुके हैं इंजीनियर

बिहार के रोहतास जिले के रहने वाले आरके श्रीवास्तव देश में मैथेमैटिक्स गुरु के नाम से मशहूर हैं। खेल-खेल में जादुई तरीके से गणित पढ़ाने का उनका तरीका लाजवाब है। कबाड़ की जुगाड़ से प्रैक्टिकल कर गणित सिखाते हैं। सिर्फ 1 रुपया गुरु दक्षिणा लेकर स्टूडेंट्स को पढ़ाते हैं। आर्थिक रूप से सैकड़ों गरीब स्टूडेंट्स को आईआईटी, एनआईटी, बीसीईसीई सहित देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में पहुँचाकर उनके सपने को पंख लगा चुके हैं। वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्डस और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी आरके श्रीवास्तव का नाम दर्ज है। इनके द्वारा चलाया जा रहा नाइट क्लासेज अभियान अद्भुत, अकल्पनीय है। स्टूडेंट्स को सेल्फ स्टडी के प्रति जागरूक करने लिये 450 क्लास से अधिक बार पूरी रात लगातार 12 घंटे गणित पढ़ा चुके हैं। इनकी शैक्षणिक कार्यशैली की खबरें देश के प्रतिष्ठित अखबारों में छप चुकी हैं, विश्व प्रसिद्ध गूगल ब्वाय कौटिल्य के गुरु के रूप में भी देश इन्हें जानता है।

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