देश भर में पूर्णिया एयरपोर्ट की गूंज, सीमांचल-मिथिलांचल के युवाओं ने रचा इतिहास - Live Aaryaavart

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मंगलवार, 10 अगस्त 2021

देश भर में पूर्णिया एयरपोर्ट की गूंज, सीमांचल-मिथिलांचल के युवाओं ने रचा इतिहास

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पूर्णिया में बहुप्रतिक्षित एयरपोर्ट की मांग को लेकर रविवार को सीमांचल और मिथिलांचल के हजारों युवाओं और बुद्धिजीवियों ने इतिहास रच दिया. एकता की ऐसी मिसाल पेश की कि #PurneaAirportLA सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर कई घंटों तक राष्ट्रीय स्तर पर टॉप ट्रेंड करता रहा.  पूर्णिया एयरपोर्ट की भौगोलिक और व्यवसायिक जरूरत पर कुंभकरण की तरह सोई हुई बिहार सरकार के कान में क्रांति का ऐसा बिगुल बजाया कि अच्छे-अच्छे मंत्री और नेता ट्विटर पर पूर्णिया एयरपोर्ट की मांग को लेकर किए गए ट्वीट को देखकर पसीना पसीना हो गए. पूर्णिया एयरपोर्ट की वर्षों पुरानी मांग को लेकर पूर्णिया, कोसी और मिथिला के लोगों ने दिखा दिया की जब बिहार के युवा एक हो जाते हैं तो देश और समाज में बदलाव आना तय हो जाता है. यही वजह है कि अब तक पूर्णिया एयरपोर्ट पर मुंह में दही जमा कर बैठे सीमांचल और पूर्णिया के नेता भी युवाओं के रौद्र रूप और एकता को देखकर जवाब देने पर बाध्य हो गए और लिखना पड़ा की वो इसके लिए प्रयास कर रहे हैं.


बता दें कि बीते 25 जुलाई 2021 को पूर्णिया के इंदिरा गांधी स्टेडियम में शहर के कुछ सामाजिक रूप से बेहद सक्रिय युवाओं और बुद्धिजीवियों ने पूर्णिया अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को बनवाने और सेवा शुरू करवाने के लिए सोशल मीडिया से लेकर धरातल तर पर महाअभियान शुरू करने की प्रतिक्षा ली थी जिसका आज प्रचंड रूप ट्विटर पर देखने को मिला जब लगभग 80 हजार ट्वीट के साथ कई घंटों तक #PurneaAirportLA ट्विटर पर ट्रेंड करता रहा. रविवार को जब इस हेस्टेग के जरिए ट्विटर पर कैंपेन चला तो यह सिर्फ पूर्णिया या बिहार ही नहीं बल्कि पूरे हिंदुस्तान या यूं कहे कि हिंदुस्तान के अलावे विदेशों में भी ट्विटर पर ट्रेंड करता रहा. साथ ही साथ उस 4 घंटे की अवधि के दौरान लगभग डेढ़ घंटे तक पूरे भारत में यह नंबर वन पर ट्रेंड करता रहा जो अपने आप में एक अविश्वसनीय बात है. इस ट्विटर ट्रेंडिन कैंपेन में बिहार के अलावे कई सारे राज्यों और जिलों से लगभग 8 से 10 सांसद, 18 से 20 विधायक,  तमाम विपक्षी दल के नेता, समाज के हर तबके के लोग और राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ ने भी मुहिम को सफल बनाने के लिए ट्वीट किया और अपना समर्थन दिया. सभी ने एकसुर में सरकार से पूर्णिया में एयरपोर्ट जल्द से जल्द शुरू करने की मांग की. ट्विटर कैंपेन को सफल बनाने के लिए तस्वीर और स्पेशल ग्राफिक्स तैयार किए गए थे जिससे लोगों ने जाना कि पूर्णिया के लिए एयरपोर्ट बनना क्यों जरूरी है.


आखिर पूर्णिया में एयरपोर्ट बनना क्यों जरूरी

1. पूर्णिया एयरपोर्ट अपनी भौगौलिक स्थिति के कारण शानदार इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनने की क्षमता रखता है. दुनिया भर से नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, म्यांमार, चीन आने वाले फ्लाइट्स और यूरोप एंड साउथ-ईस्ट एशिया से नार्थ-वेस्ट एशिया (इंडोनेशिया, हिंदेशिया, वियतनाम, कम्बोडिया, थाईलैंड आदि) जाने वाली अधिकांश फ्लाइट्स के लिए ये एक स्टे पॉइंट बन सकता है. (वर्ल्ड मैप देखिए, बेहतर समझ आएगा)

2. देश की सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से भी पूर्णिया एयरपोर्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. आसपास इतने पड़ोसी देशों के होने के कारण पूर्णिया एयरपोर्ट के बनने से आपात-काल में देश की सेनाओं के आसान आवागमन का मार्ग प्रशस्त हो सकता है. यहां से देश के चिकेन नेक यानी की सिक्किम और चीन सीमा तक जाने का भी रास्ता है.

3. पूर्णिया में एयरपोर्ट शुरू होने से पूर्वी बिहार और सीमांचल के 10 जिलों के हजारों लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा.

4. एकबार बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित होने के बाद क्षेत्र में निवेशकों के आने की संभावना बढ़ेगी, नए इंडस्ट्री लग सकते हैं जिससे लोगों की गरीबी दूर करने में मदद मिलेगी.

5. पूर्णिया में एयरपोर्ट होगा तो सर्विस इंडस्ट्री, सॉफ्टवेयर एंड टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री, एजुकेशन इंडस्ट्री के लोगों की यहां तक पहुंच आसान हो जाएगी जिससे पूर्वी बिहार समृद्ध होगा.  यदि निवेशकों को आने-जाने की हवाी सुविधा होगी तो क्षेत्र में चीनी मिल, डेयरी-मत्स्य और खाद्य प्रसंस्करण आदि जैसे उद्योग आसानी से लगाए जा सकते हैं और निवेश बढ़ेगा.

6. यदि पूर्णिया एयरपोर्ट बनेगा तो पर्यटक भी आएंगे, और कला-संस्कृति सिनेमा को भी इंडस्ट्री के रूप में विकसित किया जा सकता है इससे क्षेत्र के आम-लोगों को रोजगार मिलेगा. 


करीब 80 हजार ट्वीट के साथ पूर्णिया से लेकर दिल्ली तक एयरपोर्ट की आवाज को बुलंद करने में पूर्णिया के कुछ उत्साही युवाओं रविरंजन, पुष्कर मिश्रा भारती, आनंद मिश्रा, रितेश, तुषार, अविनाश मिश्रा, विकाश आदित्य, ज्योति झा, उत्कर्ष, शिवम मंगलम, नरेश झा, सुप्रिया सांडिल्य, रविनेश पोद्दार, अमन केशरी, अमृत, एडवोकेट रमा, गौरव झा, अनमोल आनंद, प्रिंस सिंह, श्वेता चौहान और कुणाल कौशल की अहम भागीदारी  उभरकर सामने आई है. इस ट्विटर कैंपेन और पूर्णिया में एयरपोर्ट की जरूरत को लेकर समाजसेवी पुष्कर मिश्रा भारती (@PushkarMB)ने कहा, 'पूर्णियां अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट का जीर्णोद्धार और नवीनीकरण के उपरांत शुरू होने वाले हवाई सफर को सिर्फ हवाई सफर से ही जोड़कर ना देखा जाए, बल्की इसके शुरू हो जाने से भविष्य में इससे अनेकों प्रकार के भिन्न—भिन्न क्षेत्रों में नव श्रृजन और विकाश के संभावनाओं का चौमुखी द्वार खुलना शुरू हो जाएगी' वहीं सीमांचल और कोसी प्रमंडल के मुख्यालय पूर्णिया में एयरपोर्ट के महत्व को बताते हुए पेशे से इंजीनियर आनंद मिश्रा (@iteranand) ने कहा, 'एयरपोर्ट बनने पर पूर्णिया बड़े मेडिकल हब के रूप में विकसित हो सकता है बड़े बड़े डॉक्टरों का आना जाना होगा जिसे चिकित्सा सुविधाएं बेहतर होगी, पटना, दिल्ली, वेल्लोर, सिलीगुड़ी नहीं जाना पड़ेगा'


पूर्णिया एयरपोर्ट की मांग का पुरजोर समर्थन करते हुए समाजसेवी रवि रंजन (@MrRaviRanjan05) ने कहा, हमें एयरपोर्ट हवाईजहाज में बैठने के लिए नहीं चाहिए बल्कि सीमांचलवासियो को इंफ्रास्ट्रक्चर मज़बूत करने के लिए चाहिए. एयरपोर्ट की मांग को लेकर इस अभियान में बढ़चढ़कर हिस्सा लेने वाली ज्योति झा (@jyotiku94697666) ने कहा,. पूर्णिया एयरपोर्ट से सिर्फ कोसी सीमांचल का भला नहीं होगा बल्कि यह देश की सुरक्षा में भी अपना योगदान देगा क्यूंकि बांग्लादेश,नेपाल, चीन हमें आंखे दिखाने से पीछे नहीं हटते है और जहां से इनका आना आसान हो वहां एयरपोर्ट होने से देश के सिपाहियों को पहुचने में आसानी होगी.  वही लंबे समय से इस अभियान से जुड़े रहे पत्रकार कुणाल कौशल (@Kuna1Journalist) ने कहा, पूर्णिया से हवाई सेवा शुरू होने से ना सिर्फ समय और पैसे की बचत होगी बल्कि इससे पूर्वी बिहार की बदहाली भी दूर होगी. पूर्णिया सामरिक रूप से भी भारत के लिए अहम है इसलिए यहां यहां एयरपोर्ट होने से भारत को चिकेन नेक वाले इस क्षेत्र में मजबूती मिलेगी और देश की सुरक्षा भी पुख्ता होगी.' बहरहाल इतना तो कहा ही जा सकता है की अब लोग अपने अधिकारों और आवश्यकताओं को लेकर सीधे तौर पर अपने जनप्रतिनिधि और सरकार से सवाल पूछने से पीछे नहीं हटने वाले हैं.  पूर्णियां अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के इस मुद्दे को लेकर अब लगातार ये सवाल और दबाव स्थानीय जनप्रतिनिधि, संबंधित विभागों, मंत्रालयों और भारत सरकार से पूछे जाते रहेंगे क्योंकि इस बार सीमांचल के युवाओं ने ठाना है कि किसी भी कीमत पर सरकार के इस वादे को जुमला नहीं बनने देंगे और एयरपोर्ट लेकर ही मानेंगे.

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