अफगानिस्तान की जमीन का दूसरे देशों पर हमले के लिए इस्तेमाल न हो : ब्रिक्स - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 10 सितंबर 2021

अफगानिस्तान की जमीन का दूसरे देशों पर हमले के लिए इस्तेमाल न हो : ब्रिक्स

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नयी दिल्ली, 09 सितम्बर, ब्रिक्स देशों ने गुरूवार को कहा कि अफगानिस्तान की जमीन का आतंकवादियों द्वारा अन्य देशों के खिलाफ हमले के लिए इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। सीमा पार आतंकवाद से लड़ना और अफगानिस्तान में मादक पदार्थो के व्यापार को रोकना उनकी प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में वर्चुअल शिखर सम्मेलन हुआ। 13वें शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी चिनपिंग, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोल्सनारो ने भाग लिया। शिखर सम्मेलन के बाद जारी एक बयान में ब्रिक्स नेताओं ने हिंसा से दूर रहने और अफगानिस्तान में स्थिति के शांतिपूर्ण समाधान का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “ हम हिंसा से बचने और शांतिपूर्ण तरीकों से स्थिति के समाधान का आह्वान करते हैं। हम देश में स्थिरता, नागरिक शांति, कानून और व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए एक समावेशी अंतर-अफगान वार्ता को बढ़ावा देने में योगदान देने की आवश्यकता पर बल देते हैं।” सभी देशों ने पिछले महीने हामिद करजई काबुल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास आतंकवादी हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। इस हमले में कई लोग मारे गए और कई लोग घायल हो गये थे। उन्होंने कहा, “हम आतंकवाद से लड़ने की प्राथमिकता को रेखांकित करते हैं, जिसमें आतंकवादी संगठनों द्वारा अफगान क्षेत्र को आतंकवादी पनाहगाह के रूप में इस्तेमाल करने और अन्य देशों के खिलाफ हमले करने के साथ-साथ अफगानिस्तान के भीतर नशीली दवाओं के व्यापार को रोकने के प्रयास शामिल हैं।” उन्हाेंने कहा, “हम मानवीय स्थिति के समाधान और महिलाओं, बच्चों तथा अल्पसंख्यकों सहित मानवाधिकारों को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देते हैं।’’ विदेश मंत्रालय के सचिव संजय भट्टाचार्य ने बाद में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने विचार-विमर्श के दौरान ध्यान दिलाया कि अफगानिस्तान क्षेत्र का इस्तेमाल मादक पदार्थों की तस्करी और आतंकवाद के लिए नहीं किया जाना चाहिए और न ही पड़ोसियों के लिए समस्या पैदा करना चाहिए। बिक्स ने कहा अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा अफगानिस्तान से वापसी से एक नया संकट पैदा हो गया है और यही कारण है कि हमारे देशों ने इस मुद्दे पर विशेष ध्यान दिया गया है।

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