परिवार नियोजन के लिए चुलबुल देवी की हिम्मत और साहस को सलाम - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 25 सितंबर 2021

परिवार नियोजन के लिए चुलबुल देवी की हिम्मत और साहस को सलाम

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लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती। इस कहानी के मुख्य पात्र की ज़िंदगी पर यह कथन बिल्कुल सही बैठता है। यहां हम बात कर रहे हैं ज़िला समस्तीपुर के पटोरी प्रखंड की पंचायत हसनपुर सूरत की वार्ड सदस्य चुलबुल देवी की, जिन्होंने अपनी ज़िंदगी में तमाम मुश्किलों का सामना किया पर उन्होंने कभी हार नहीं मानी। कम उम्र में ही चुलबुल देवी की माँ का देहांत हो गया था। बेटी होने के नाते बचपन से ही उनके सर पर घर की तमाम ज़िम्मेदारियाँ आ गईं नतीजतन उन्हें बचपन में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी। करीब 14 साल की कम उम्र में विवाह भी हो गया और विवाह के उपरांत उनकी ज़िंदगी में एक और दुखद घटना घटी, पिता चल बसे। चुलबुल देवी को हमेशा से ही पढ़ने की चाह थी और उन्होंने सोचा था कि शादी के बाद वह अपनी पढ़ाई जारी रखेंगी। लेकिन सास-ससुर की मर्ज़ी के आगे चुलबुल देवी की एक न चली और उन्हें इसमें अपने पति का भी साथ नहीं मिला। लिहाज़ा चुलबुल देवी अपने आगे की पढ़ाई के सपने को पूरा नहीं कर सकीं।

       

कम उम्र में शादी के चलते चुलबुल देवी को परिवार नियोजन का बिल्कुल ज्ञान नहीं था। मात्र 16 साल की उम्र में वह गर्भवती हो गईं और उन्होंने बेटी को जन्म दिया। चुलबुल देवी पर ससुराल वालों की ओर से बेटे को जन्म देने का दबाब था मगर देखते ही देखते चुलबल देवी 4 बेटियों की मां बन गयीं। बच्चों के जन्म के बीच सही अंतर न रख पाने की वजह से न तो चुलबुल देवी का स्वास्थ्य ठीक रहा बल्कि इसका असर उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ा। इसके बावजूद भी चुलबुल देवी पर बेटे को पैदा करने का दबाब बना हुआ था और चुलबुल देवी ने दो और लड़कों को जन्म दिया। चुलबुल देवी अब 6 बच्चों की मां बन चुकी थीं और इसका असर अब उनके परिवार पर अब अलग-अलग तरह से पड़ना बिल्कुल तय था। 6 बच्चों के लालन-पालन, पढ़ाई-लिखाई, खान-पान, कपड़ा, बीमारी आवश्यकताओं के कारण अब पति-पत्नी के बीच आपसी मतभेद बना रहता था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमज़ोर होती चली जा रही थी नतीजतन आर्थिक तंगी के कारण दो बेटियों की शादी उनकी मर्ज़ी के खि़लाफ हुई। चुलबुल देवी अपनी ज़िदगी के बारे में कहती हैं कि ‘‘हर किसी की ज़िंदगी में ऐसी मजबूरियाँ नहीं आतीं। हर शख्स इतना विवश नहीं होता। मैंने जो अपनी ज़िंदगी में देखा, मैं नहीं चाहती कि कोई भी महिला अपनी ज़िंदगी में वह सब कुछ सहन करे जो मैंने किया। चुलबुल देवी ने ठान लिया था कि अब वह समाज की बेहतरी के लिए काम करेंगी और तब ही उन्हें सी 3 संस्था का साथ मिला। चुलबुल देवी बताती हैं, ‘‘सी 3 संस्था ने मेरी बहुत मदद की। मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला। मैंने परिवार नियोजन के बारे में बहुत कुछ सीखा और अब मैं यह ज्ञान हर परिवार तक पहुंचाने की पूरी कोशिश कर रही हूँ।’’


चुलबुल देवी ने अपने वार्ड में सभाएं करना शुरू कर दिया है और वह सभाओं के माध्यम से लोगों के परिवार नियोजन के बारे में जानकारी दे रही हैं। वह अपनी सभाओं में लोगों को बता रही हैं कि आप परिवार नियोजन के साधनों को अपनाकर अपनी जिंदगी को किस तरह बेहतर बना सकते हैं। इस सब में उन्हें पुरूषों का साथ नहीं मिल रहा है। वह अक्सर उनकी बातों को नकारते हुए परिवार नियोजन को न अपनाने की बातें करते थे। मगर चुलबुल देवी अपने इस प्रयास में लगातार डटी हुईं है और लगातर सभाओं के माध्यम से समाज के हर तबके तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं। चुलबुल देवी चाहती हैं कि सरकार ऐसी योजनाएं और कार्यक्रम चलाए जिससे खासतौर से पुरूष वर्ग के लोगों को जागरूक किया जा सके और वह भी परिवार नियोजन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। वैसे अपने प्रयासों से चुलबुल देवी ने बहुत सारे परिवारों पर छाप छोड़ी हैं। ऐसी कई महिलाएं हैं जिन्होंने परिवार नियोजन को अपनाया है और उन्हीं में से एक हैं कंचन देवी। 35 वर्षीय कंचन देवी के चार बच्चे थे और जब उनकी मुलाक़ात चुलबुल देवी से हुई तो वह तुरंत ही परिवार नियोजन के अस्थायी साधनों को अपनाने के लिए तैयार हो गईं। उस दिन चुलबुल देवी ने कहा था, ‘‘मेरी पहली कोशिश, मेरी पहली सफलता’’ है। तब तक लेकर आज तक चुलबुल देवी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा है और वह अपने प्रयासों से कई महिलाओं की जिंदगी में बदलाव लाने में सफल रही हैं। चुलबुल देवी के अथक प्रयास से लोग परिवार नियोजन के लिए उनकी बातों को ध्यान से सुनने लगे है। चुलबल कहती है कि जिन परिस्थितियों से मैं गुज़री हुई मैं नहीं चाहती कि कोई महिला को इस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़े।

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