बदलते वैश्विक स्तर पर भारत की सुरक्षा पर भी खतरा : राजनाथ - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 10 सितंबर 2021

बदलते वैश्विक स्तर पर भारत की सुरक्षा पर भी खतरा : राजनाथ

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जैसलमेर 09 सितम्बर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि अफगानिस्तान में तालीबान तथा अन्य देशों की गतिविधियों के कारण बदलते वैश्विक स्तर पर भारत की सुरक्षा पर भी खतरा पैदा हो गया है। श्री सिंह आज यहां अपने जैसलमेर प्रवास के दौरान एम.आर.एस.ए.एम मिसाईल के इंडक्शन के लोकार्पण अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इसका सीधा प्रभाव हमारे देश की सुरक्षा परिदृश्य पर देखा जा सकता है। ऐसे स्थिति में हमारी देश की सुरक्षा की मजबूती एवं आत्मनिर्भरता एक उपलब्धि न होकर जरूरत बन गई है। श्री सिंह ने कहा कि आज एम.आर.एस.ए.एम की फर्स्ट फायरिंग यूनिट को हमारी वायुसेना को सौंपा जा जा रहा है। यह हमारी वायुसेना के साथ साथ, मैं समझता हूँ पूरे रक्षा क्षेत्र के लिए बड़ा खास दिन है। उन्होंने बताया कि यह मिसाईल सिस्टम आज दुनिया भर में उपलब्ध अब तक के स्टेट ऑफ द आर्ट मिसाईल सिस्टम में से एक है और रक्षा क्षेत्र में हो रहा यह विकास वास्तव में भारत और इजरायल की घनिष्ठ साझेदारी में नई उंचाई का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज से पहले भी भारत एवं इजरायल देशों के बीच गहरे संबंध रहे हैं। वह चाहे रक्षा के क्षेत्र में स्पाईस बम हो या बराक मिसाइल का सहयोग हो, या फिर कोविड के खिलाफ़ लड़ाई में वैक्सीन के लिये दोनों देशों की कंपनियों का जोईन्ट वेन्चर हो, भारत और इजरायल के बीच एक अहम साझेदारी हमेशा कायम रही है। श्री सिंह ने कहा कि मुझे बताया गया, कि यह प्रणाली खराब मौसम में भी 70 किलोमीटर की रेंज तक, कई लक्ष्यों को एक साथ भेदने में सक्षम है। अनेक कड़े परीक्षणों में इसकी सफलता, इसकी विश्वसनीयता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यह मिसाइल सिस्टम, हमारी एयर डिफेन्स सिस्टम में एक गेम चेंजर साबित होगा, ऐसा मेरा विश्वास है। एयरफोर्स ने इस मिसाइल का इंडक्शन, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदमों का भी एक बड़ा उदाहरण है।


श्री सिंह ने कहा कि आज विश्व परिदृश्य काफ़ी तेजी, और अप्रत्याशित तरीके से बदल रहा है। इसमें, देशों के आपसी समीकरण भी अपने हितों के अनुसार तेजी से बदल रहे हैं। चाहे साउथ चाईना समुन्द्र हो, या आई.ओ.आर हो या इंडो-पेसेफिक हो या फिर सेन्ट्रल ऐशिया हो, हर जगह अनिश्चितता की स्थिति देखी जा सकती है। बदलते जियो पॉलिटिक्स का प्रभाव ट्रेड, इकोनॉमी, पावर पॉलिटिक्स और उसी एवज़ में सिक्युरिटी सिनेरियो पर भी देखा जा सकता है। ऐसी स्थिति में, हमारी सुरक्षा की मजबूती और आत्मनिर्भरता एक उपलब्धि न होकर एक जरूरत बन जाती है। श्री सिंह कहा कि आज से लगभग 30 साल पहले, ए.पी.जे अब्दुल कलाम ने देश में इंटीग्रेटेड मिसाईल डेवलपमेन्ट प्रोग्राम की शुरुआत की थी। इसकी कल्पना ऐसे समय में की गई थी, जब हमारे वैज्ञानिकों को टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में तमाम तरह के प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा था। बावजूद इन सबके, इस प्रोग्राम की सफलता ने न केवल मिसाइल डिफेंस में हमारी आत्मनिर्भरता सुनिश्चित की बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि सीमा पार से आने वाले किसी भी प्रकार के खतरे को, समय से पहले ही नष्ट कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनका विश्वास है, कि हमारा रक्षा क्षेत्र आने वाले समय में न केवल सशक्त और आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि पूरी दुनिया के लिए रक्षा प्रणालियों का मैन्युफैक्चरिंग हब बनेगा। इसका रास्ता, इसी तरह के कार्यक्रम से होकर जाता है।

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