खेती से लेकर सरकारी उपक्रमों को बेचने पर आमादा है मोदी सरकार - राजाराम सिंह - Live Aaryaavart

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शनिवार, 11 सितंबर 2021

खेती से लेकर सरकारी उपक्रमों को बेचने पर आमादा है मोदी सरकार - राजाराम सिंह

  • किसान संगठनों के 27 सितंबर के भारत बंद के आह्वान के साथ संयुक्त किसान कन्वेंशन सम्पन्न

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पटना,11सितंबर, तीनों कृषि कानून एवं बिजली विधेयक 2021 को निरस्त करने, MSP गारंटी का कानून बनाने और हर किस्म के कृषि कर्ज को माफ करने की मांग पर किसान संगठनों द्वारा संयुक्त  किसान कन्वेंशन, आइ एम ए हॉल, पटनामें आयोजित किया गया। कन्वेंशन में पूरे  बिहार के अलग-अलग जिलों के सैंकड़ों  किसान नेताओं  ने भाग लिया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता अखिल भारतीय किसान  महासभा के राष्ट्रीय महासचिव ,पूर्व माले विधायक और अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के  बिहार झारखंड के प्रभारी राजाराम सिंह ने कहा की आज देश में खेती और किसानी के साथ साथ बेशकीमती राष्ट्रीय उपक्रमो को मोदी-शाह की सरकार बेचने पर आमादा है। यह सिर्फ कॄषि ही नहीं, बल्कि देश के संविधान, लोकतंत्र और सम्पतियों को बचाने का सवाल है। मोदी सरकार देश बेचू है। यह सरकार हर चीज को बेच देगी। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन का साढ़े नौ माह पूरा हो गया है,  लेकिन मोदी सरकार   किसानों के मांगें मानने से भाग रही है और वह पूरी तरह संवेदनहीन बनी हुई है ।  अभी तक 600 किसानों ने शहादत दे दी । इसके वाबजूद किसानों ने हर परस्थिति ,दमन व सरकार की हर साजिश का मुकाबला करते हुए आन्दोलन को विभिन्न राज्यों तक फैलाया है । अब यह आंदोलन आम जनता का हो गया है. ये तीनों किसान विरोधी कानून गरीबों के साथ साथ हर तबका को प्रभावित करनेवाले हैं । मुजफ्फरनगर के ऐतिहासिक किसान महापंचायत ने समाज में एक भाईचारा का संदेश दिया है. उन्होंने 27 सितम्बर को भारत बंद में जनता के हर तबका से मजबूती से समर्थन देने का आह्वान किया.


उन्होंने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा ने 26-27 अगस्त के राष्ट्रीय कन्वेंशन के अपने पारित प्रस्ताव में मंहगाई, डीजल-पेट्रोल-रसोई गैस-खाद की बढ़ी कीमतों; सरकारी संस्थानों-संसाधनों की बिक्री; श्रम कानूनों में बदलाव; नौजवानों व मजदूरों के रोजगार के खात्मे आदि के खिलाफ जनता के विभिन्न तबकों के जारी संघर्षों का समर्थन किया और 27 सितंबर के भारत बंद में सहयोग की अपील की है । अखिल भारतीय किसान सभा, (केदार भवन) बिहारके  महा  सचिव अशोक सिंह ने कहा कि 3 कृषि कानूनों के खिलाफ  बिहार में भी मजबूत अंदोलन छेड़ा जाएगा व 27 सितंबर का भारत बंद ऐतिहासिक होगा । अखिल भारतीय किसान सभा, (जमाल रोड), बिहार के सचिव विनोद कुमार ने कहा कि किसान आन्दोलन  अब देश का भविष्य तय करेगा कि देश जनता के हाथों में होगा या  तानाशाह मोदी के नेतृत्व में कारपोरेट राज  होगा. रोज ब रोज किसान आन्दोलन आगे बढ़ता जा रहा है. डी.एम. दिवाकर, पूर्व निदेशक, ए. एन. सिन्हा इन्शटीचूट, पटना ने कहा कि किसान आम जनता की लड़ाई का भी नेत्तृत्व कर रहे हैं. कंवेन्शन को किसान महासभा के नेता व विधायक सुदामा प्रसाद ने सम्बोधित करते हुए कहा कि बिहार विधानसभा में भी किसानों के सवालों को मजबूती से उठा रहे हैं. बिहार राज्य गन्ना उत्पादक किसान महासभा के अध्यक्ष व विधायक वीरेंद्र गुप्ता ने कहा कि गन्ना की कीमतों को बढ़ाया जाय. कंवेन्शन को किसान महासभा के नेता विधायक महानंद, जल्ला किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष   शम्भू नाथ मेहता, सब्जी उत्पादक संघ के नेता मनोहर लाल, बागमती नदी तटबंध विरोधी चास वास संघर्ष समिति के जितेन्द्र यादव, कदवन  डैम निर्माण समिति के विनोद कुमार कशवाहा, रामवृक्ष राम, राम जीवन सिंह, उमेश सिंह, राजेन्द्र पटेल, अमेरिका महतो, शिवसागर शर्मा, कृष्ण देव यादव, नंदकिशोर सिंह, महेंद्र यादव, मणिलाल, अशोक प्रियदर्शी, सहीत दर्जनों किसान नेताओं ने सम्बोधित किया. मंच पर तमाम किसान संगठनों के नेता विराजमान थे. कन्वेंशन के अंत में  प्रस्ताव पारित किया गया जिनमे 3 कृषि काले कानून को वापस लेने, प्रस्तावित बिजली बिल 2020 को रद्द करने, MSP को कानूनी दर्जा देने, किसानों की कर्जामाफी, बिहार में एपीएमसी एक्ट की पुनर्बहाली,राज्य भर में खाद की किल्लत को दूर कर कालाबाजारी को खत्म करने, बाढ़ और जलजमाव से प्रभावित जिलों में 6 महीनों तक मुफ्त राशन देने और फसल क्षति का मुआवजा देने, मंहगाई के अनुसार गन्ना मूल्य तै करने आदि मांगें की गईं. कार्यक्रम का संचालन 7 सदस्यीय अध्यक्ष मंडल क्रमशःरामाघार सिंह किसान महासभा, ललन चौधरी,  मणिकान्त पाठक  , रामाधार सिंह,  अनिल सिंह,  रामचन्द्र प्रसाद, वी. वी. सिंह ने किया। किसान आंदोलन में अबतक शहीद हुए किसानों की याद में 1 मिनट के मौन के साथ कार्यक्रम  की शुरुआत  किया गया .

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