राजकमल प्रकाशन मना रहा है 'किताबतेरस' - Live Aaryaavart

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रविवार, 31 अक्तूबर 2021

राजकमल प्रकाशन मना रहा है 'किताबतेरस'

  • ·         राजकमल प्रकाशन समूह का आह्वान
  • ·         'शब्दों से समृद्धि, शब्दों का उजियारा' का दिया संदेश
  • ·         हम किताबें पढ़ने और पढ़ाने की संस्कृति का विकास चाहते हैं. ताकि हमारा समाज संपूर्णता में समृद्ध हो. धन बिना ज्ञान के अधूरा है। -- अशोक महेश्वरी,प्रबंध निदेशक, राजकमल प्रकाशन समूह

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नई दिल्ली : राजकमल प्रकाशन समूह ने 'किताबतेरस' का आह्वान किया है. किताबतेरस एक अवसर है, धनतेरस, दीवाली, भाईदूज के बहाने किताबों को घर लाने का, अपनों को उपहार में किताबें देने का. 'शब्दों से समृद्धि, शब्दों का उजियारा' के संदेश के साथ  प्रकाशन समूह ने लोगों से अपील की है कि वे त्योहारों के इस मौसम में अपनी पसंद की पुस्तकें घर में लाएँ और स्वजनों, मित्रों को उपहार में पुस्तकें दें. इससे एक स्वस्थ समाज के निर्माण का रास्ता खुलेगा। किताबें हमें जीवन के विविध अनुभवों से जोड़ती हैं। ज्ञान की रौशनी में ले जाती हैं। हमारे मानस का विकास करती हैं। बड़ा सोच देती हैं और बड़े सपनों को पूरा करने की सूझबूझ देती हैं। किताबें हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए पौष्टिक आहार की तरह हैं। इस डिजिटल दौर में किताबें पढ़ना मानसिक शांति के लिए एक थेरेपी की तरह है। राजकमल प्रकाशन समूह के प्रबंध निदेशक अशोक महेश्वरी ने कहा, दिवाली और धनतेरस जैसे त्योहार हमारी खुशी और समृद्धि की अभिव्यक्ति और आकांक्षा से जुड़े हैं. परंपरागत तौर पर समृद्धि को धन-संपत्ति से जोड़ कर देखा जाता है. यह स्वभाविक है. इसके साथ ही ज्ञान को भी जोड़ लें तो हमारी समृद्धि सर्वांगीण हो जाएगी, जो हम अच्छी पुस्तकों के जरिए पा सकते हैं। उन्होंने कहा, ज्ञान की संपदा ऐसी संपदा है जो बांटने से कम नहीं होती. इस बात को महसूस करते हुए हमने लोगों को किताबतेरस मनाने का संदेश दिया है ताकि लोगों के बीच त्योहारों के इस मौसम में किताबें उपहार में देने व किताबें पढ़ने की संस्कृति का विकास हो सके। यह हमें और हमारे समाज को संपूर्णता में समृद्ध करेगा. गौरतलब है कि राजकमल प्रकाशन समूह कई बरसों से त्योहारों के मौसम में  ‘किताबतेरस’ अभियान चला रहा है। इस बार यह अभियान 6 नवम्बर तक चलेगा. इसके लिए प्रकाशन समूह ने सभी लोगों की रुचियों को ध्यान में रखते हुए किताबों के अलग-अलग सेट घोषित किए हैं, जिन पर 30% की छूट दी जा रही है। किताबतेरस अभियान को सोशल मीडिया पर चौतरफा समर्थन मिल रहा है. यह उत्सवधर्मी समाज में एक नई चलन के आरंभ का संकेत है जो कि पुस्तक-संस्कृति को बढ़ाने के लिए बहुत आवश्यक थी।

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