योगी आदित्यनाथ एक निडर,निर्भीक व्यक्तित्व - Live Aaryaavart

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मंगलवार, 30 नवंबर 2021

योगी आदित्यनाथ एक निडर,निर्भीक व्यक्तित्व

·         योगी अदित्यानाथ जब अपने कॉलेज के छात्राओं के लिए तेज रफ़्तार बस के आगे खड़े हो गये

·         योगी आदित्यनाथन का महंत से मुख्यमंत्री तक का सफ़र  

·         स्टोरीटेल ऑडियो पर सुने उत्तर प्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री की जीवनी  

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योगी आदित्यनाथ  शुरु से ही तेज तरार ,निर्भीक और निडर स्वभाव के थे उनकी निडरता का पता इस घटना से चलता है कि जब वे कोटद्वार कॉलेज से बीएससी कर रहे थे तब उनकी एक क्लासमेट स्टूडेंट यूनियन का चुनाव लड़ रही थी,और तैयारी करते-करते रात हो गई तो योगी को साथी छात्राओं की चिंता सताने लगी, छात्राएं रोने लगी. उस दौर में सड़क पर गाड़ियाँ बहुत कम चलती थी, कोई गाड़ी रोक भी नहीं रहा था, तभी सामने से एक बस आ रही थी उसे रोकने के लिए योगी तुरंत सड़क के बीच में खड़े हो गए, उन्हें डराने के लिए बस ड्राईवर ने रफ्तार और बढ़ा दी लेकिन योगी सड़क पर डटे रहे इस निडरता को देख ड्राईवर ने ब्रेक लगा दिया और  योगी ने लड़कियों को बस में बैठा कर उन्हें उनके घर सुरक्षित भेजा. अगर आप उत्तर प्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ज़िंदगी के कुछ ऐसे ही  रोमांचक घटनाओं के बारे में जानने के इच्छुक हैं तो   स्टोरीटेल ऑडियोबुक प्लेटफोर्म पर नंदकिशोर पांडेय के आवाज में सुन सकते हैं. हिन्दुस्तान की पॉलिटिक्स में योगी आदित्यनाथ की छवि एक फायरब्रांड नेता की है और यूपी में ये महाराज जी के नाम से मशहूर हैं. उत्तराखंड के एक फारेस्ट रेंजर का युवा बेटे ने जब घर छोड़ कर  संन्यास का इरादा किया था तब उसने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वह देश के सबसे बड़े राज्य का मुख्यमंत्री बन जाएगा. मुख्यमंत्री  भी ऐसा जो बड़े-बड़े गुंडे माफिया को पानी पिला दिया.मुस्लिम कंट्टरपंथ के विरोधी योगी का सिर्फ एक और एक एजेंडा है-हिन्दुत्व. इस छवि से समझौता किए बगैर योगी बीते करीब साढ़े चार साल से यूपी के मुख्यमंत्री हैं. आने वाले चुनाव में भी वह भाजपा के मुख्यमंत्री का चेहरा रहेंगे. एक हिंदुत्व मुख्यमंत्री बनने से पहले योगी कहते थे कि मैं तब तक नहीं  रुकूँगा  जब तक मैं यूपी और भारत को हिंदू राष्ट्र नहीं बना देता. पौड़ी गढ़वाल के एक छोटे से गावं  में 5 जून 1972 को अजय मोहन बिष्ट के रूप में  जन्मे योगी आदित्यनाथ के  महाराज से मुख्यमंत्री बनने की कहानी कम दिलचस्प नहीं है. माता-पिता के सात बच्चों में तीन बड़ी बहनों व एक बड़े भाई के बाद ये पांचवें थे एवं इनसे और दो छोटे भाई हैं।  गढ़वाल विश्वविद्यालय से  बीएससी की डिग्री हासिल की वह थोड़ा बहुत कॉलेज यूनियन पॉलिटिक्स में भी  जुड़े रहे

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