बिहार : हर दिन मनाएं संविधान का जश्न - Live Aaryaavart

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बुधवार, 24 नवंबर 2021

बिहार : हर दिन मनाएं संविधान का जश्न

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पटना. पटना उच्च न्यायालय की अधिवक्ता, सुश्री अलका वर्मा, ने मंगलवार को कहा कि भारतीय संविधान मूल्यों और सिद्धांतों का एक चार्टर है जो प्रत्येक नागरिक के अधिकारों की रक्षा करता है और उन्हें समान अवसर प्रदान करता है. सुश्री वर्मा संविधान दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित एक समारोह में सेंट जेवियर्स कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी (एसएक्ससीएमटी), पटना के छात्रों को संबोधित कर रही थीं. भारत के संविधान को अपनाने के उपलक्ष्य में हर साल 26 नवंबर को हमारे देश में संविधान दिवस मनाया जाता है.भारत की संविधान सभा ने 26 नवंबर, 1949 को भारत के संविधान को अपनाया था, जो 26 जनवरी, 1950 से लागू हुआ. सुश्री वर्मा, जो मुख्य अतिथि थीं, ने कहा, “हमें हर दिन अपने संविधान का जश्न मनाना चाहिए.यह हमारे राष्ट्र के लिए बाइबल की तरह है”. उन्होंने कमजोर वर्गों को आरक्षण पर विभिन्न मिथकों को तोड़ने की भी कोशिश की.उन्होंने कहा कि कोटा के प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 46 में निहित राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों में निहित हैं और भेदभावपूर्ण नहीं हैं.“वास्तव में, वे समानता सुनिश्चित करते हैं. हमें एक ऐसी स्थिति बनाने की जरूरत है जहां वंचित लोगों को भी दूसरों के साथ समान रूप से लेवल प्लेइंग फिल्ड मिले, ” उन्होंने कहा. इस अवसर पर एक भाषण प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया जिसमें छह छात्र-छात्राओं ने 'भारतीय लोकतंत्र में संविधान की प्रासंगिकता' पर अपने भाषण दिए.इन छह छात्र-छात्राओं का चयन पूर्व में आयोजित एक ऑनलाइन प्रतियोगिता के बाद किया गया था.स्वाति मिश्रा को सर्वश्रेष्ठ वक्ता और रितिका सिंह को उपविजेता चुना गया.अन्य प्रतिभागियों में प्रिया, हर्षिता प्रताप सिंह, प्रीति कुमारी और अविनाश कुमार थे. एसएक्ससीएमटी के कार्यवाहक रेक्टर, फादर मार्टिन पोरस एसजे ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए. फादर राज कुमार एसजे, फादर शेरी जॉर्ज एसजे और फादर ए सेबेस्टियन एसजे ने भाषण प्रतियोगिता को जज किया. जनसंचार के छात्र विकास कुमार सिंह ने 'मैं भारत का संविधान हूं, लाल किला से बोल रहा हूं' कविता सुनाई.कार्यक्रम का आयोजन कॉलेज की सामाजिक जागरूकता समिति द्वारा किया गया.रीति आर्य ने शो की एंकरिंग की, जबकि शालू ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा. इस अवसर पर प्राचार्य फादर टी निशांत एसजे और संकाय के सदस्य उपस्थित थे. भारत का संविधान, भारत का सर्वोच्च विधान है जो संविधान सभा द्वारा 26 नवम्बर 1949 को पारित हुआ तथा 26 जनवरी 1950 से प्रभावी हुआ.यह दिन (26 नवम्बर) भारत के संविधान दिवस के रूप में घोषित किया गया है.जबकि 26 जनवरी का दिन भारत में गणतन्त्र दिवस के रूप में मनाया जाता है. भीमराव आम्बेडकर को भारतीय संविधान का प्रधान वास्तुकार या निर्माता कहा जाता है. भारत के संविधान का मूल आधार भारत सरकार अधिनियम १९३५ को माना जाता है.भारत का संविधान विश्व के किसी भी गणतान्त्रिक देश का सबसे लम्बा लिखित संविधान है. अनुच्छेद 46 राज्य से यह अपेक्षा करता है कि वह कर्मचारियों के काम निर्वाह मजदूरी शिष्ट जीवन और उसका संपूर्ण उपभोग सुनिश्चित करने वाली काम की दशाओं तथा सामाजिक और सांस्कृतिक अवसर प्राप्त करने का अवसर प्राप्त करेगा विशेष रूप से ग्रामों में कुटीर उद्योग को बढ़ावा देने का प्रयास करेगा. समाज के दुर्बल वर्गों के शिक्षा और अर्थ संबंधी हितों की अभिवृद्धि अनुच्छेद 46 इस बात का आह्वान करता है कि राज्य जनता के दुर्बल वर्गों के विशेष रूप से अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों की शिक्षा और अर्थ संबंधी हितों की विशेष सावधानी से अभिवृद्धि करेगा तथा सामाजिक न्याय तथा सब प्रकार के शोषण से उनकी समीक्षा करेगा.

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