बिहार : पाठक जी महादलितों को घर वापसी कराएं - Live Aaryaavart

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शनिवार, 4 दिसंबर 2021

बिहार : पाठक जी महादलितों को घर वापसी कराएं

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पटना. बिहार में शराबबंदी लागू होने के समय 2016 में केके पाठक को यह जिम्मेदारी दी गई थी. बिहार में शराबबंदी को सफल को सफल बनाएं.लेकिन बाद में उन्हें इस पद से हटा दिया गया था. अब एक बार फिर केके पाठक के कंधे पर बिहार में शराबबंदी को सफल बनाने का जिम्मा है. उनसे आग्रह है कि पुलिसिया खौफ से दीघा मुसहरी छोड़ने वाले महादलितों को घर वापसी कराएं.  मालूम हो कि कई बार शराबबंदी को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समीक्षा बैठक की गई है.इस बार करीब सात घंटे तक मैराथन बैठक चली.सीएम नीतीश ने एक-एक बिंदू पर समीक्षा की.इस महत्वपूर्ण बैठक में सभी मंत्री से लेकर अधिकारी और जिलों के डीएम-एसपी जुड़े थे.आखिरकार थानेदार पर ही पूरी जिम्मेदारी थोप दी गई. जिनके क्षेत्र में शराब बरामद हुई तो उनकी थानेदारी तो जाएगी ही, सीधी भूमिका होने पर 10 सालों तक थानेदारी से वंचित होना पड़ेगा.हालांकि डीजीपी ने कहा कि सिर्फ थानेदार ही नहीं बल्कि ऊपर के अधिकारियों पर भी शो-कॉज होगा.फिर क्या था महादलितों में मुसहर समुदाय और उनके ठौर को निशाना बनाया गया. राजधानी पटना में है कभी मालदह आम से विख्यात दीघा.इस क्षेत्र में है दीघा थाना.इन दिनों इस थाने के थानाध्यक्ष हैं राजेश कुमार सिन्हा.थानेदारी पर गाज न गिरे तो थानाध्यक्ष प्रत्यन्नशील हो गये.बलवानों से टकराने के बदले गिरिजनों को ही टार्गेट बना लिये.लगातार दीघा मुसहरी पर धावा बोलने लगे.शराब न बनाओं, शराब न बेचो और शराब न पीयो के तहत 50 महादलितों में मुसहर समुदाय को गिरफ्तार कर जेल भेज चुके हैं.अभी भी 16 पुरुष और 02 महिला जेल में बंद हैं.तब न एनडीए में शामिल हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी कहते हैं, कि राज्य में शराबबंदी ना के बराबर है.शराबबंदी के कारण जेल में बंद एक तिहाई हिस्सा गरीब का है.इसमें अधिक इजाफा न हो और दीघा थाने के थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिन्हा का कोपभाजन न बने.अपने दीघा मुसहरी वाला घर को छोड़कर अपने परिजनों के घर चले गए हैं.


जानकारी के अनुसार गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले 145 महादलित परिवार झोपड़ी में रहते थे.इन लोगों की समस्याओं को दूर करने करने के लिए समाजसेवियों ने मीडिया का सहारा लिया.इसका परिणाम सामने आया.पटना नगर निगम के अधिकारियों ने इनलोगों की सुधि लेकर राजीव आवास योजना के तहत परिवेश सुधारने व घर निर्माण करवाने का संकल्प लिया.वर्ष 2015 से घर निर्माण होना शुरू हुआ.आज महादलितों के पास पक्का मकान है.घर में शौचालय,शुद्ध पेयजल,बिजली आदि की सुविधा है.झोपड़ी में रहते समय दुख-दर्द को भूल गये.वर्षाकाल के समय झोपड़ी से टपकता पानी और उसी टपकता पानी से बचकर करवट बदलकर सोना सपना बन गया.करवटे बदलते रहना और रतजंगी करने से बच गये. इस बीच सूबे में 2016 से पूर्ण शराबबंदी ने महादलितों को समस्याओं के दलदल में डाल दिया.महुआ और गुड़ से बनाने वाले रोजगार पर वज्रपात हो गया.रोजगार की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गयी.शराब का धंधा बंद है.शराब छोड़ मुसहर समुदाय ने रद्दी कागज आदि चुनकर और बेचकर जीविकोपार्जन करने लगे.कूड़ाें के ढेर से किस्मत चमकाने वाले रद्दी चुनने वाले को केस में फंसा देने का सिलसिला जारी है. इसमें पढ़ने वाले स्टूडेंट्स भी शामिल हैं इन महादलितों ने कहा कि बिहार में सरकार डबल इंजन की है.अब वह सरकार ट्रबल देने लगी है.सूबे में जदयू,बीजेपी,हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और विकासशील इंसान पार्टी सरकार में है.इसके मुखिया नीतीश कुमार हैं.उनके जिद के कारण शराबबंदी जारी है.मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शराबबंदी की समीक्षा उपरांत पुलिसकर्मियों को खुली छूट दे रखी है.पुलिसकर्मियों ने मिले खुली हाथ की छूट से मुसहर समुदाय पर कहर बरपा रहे है.इसका ज्वलंत उदाहरण हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के सुप्रीमो सह पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के समधियाना दीघा मुसहरी है.आबकारी विभाग और दीघा पुलिस की युगलबंदी से रोजाना गरीबों पर कहर बरपाया जा रहा है.पुलिसिया जुल्म से बचने के पटना नगर निगम के द्वारा राजीव आवास योजना के तहत निर्मित मकान को छोड़कर राेड पर रहने को बाध्य हो रहे हैं.


दीघा थानान्तर्गत दीघा मुसहरी का हाल तो बेहाल हो गया है.पुलिस के भय व गिरफ्तारी से बचने के लिए मुसहर समुदाय के लोग पहले की तरह ही सड़क के किनारे रहने लगे हैं.मुसहरी श्मशान घाट की तरह सुनसान हो चला है.इसके कारण पुलिसकर्मियों का राज हो गया है.दीघा थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिन्हा के नेतृत्व में 25 से 30 तो कभी 70 से 90 तक पुलिसकर्मी आ धमकते हैं.इनके आगमन से आसपास के लोगों में दहशत पैदा हो जाती है.सामने दिखायी देने वालों को पकड़ लेते हैं.लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनते देख बर्तन को उलट देते हैं.अनाज में मिट्टी डाल देते हैं. इतना करने से भी रूकते नहीं है पुलिसकर्मी.घर का द्वार बंद होने पर दरवाजा या ग्रिल को तोड़ कर घर के अंदर प्रवेश कर जाते हैं.शराब सर्च के नाम पर जेवरात व पैसा तलाशने लगते हैं.पटना नगर निगम के बांकीपुर अंचल में कार्यरत दैनिक सफाई कर्मी बुधनी देवी, पति सुखु मांझी का दस हजार रू.चील झपट्टामार की तरह उड़ा ले गये.दर्जनों लोगों का एलपीजी सिलेंडर उठाकर ले गये.नल का पाइप तोड़ दिये.समरसेबल की ऊपरी हिस्सा ले गये. गोदरेज अलमारी को तोड़ दिये.मुसहरों के कपड़ों को समेटकर पुलिसकर्मी ने अगजा जला दिये. यहां की महिलाएं और नवयुवतियों का कहना है कि रात में मुसहरी में कोई भी परिवार नही सोते हैं.डर से कोई भी मुसहर समाज के मर्द नहीं रहते हैं.मुसहरी में निर्मित शौचालय में कोई लोग शौचक्रिया करने नहीं जाते हैं.खुले मैदान में शौचक्रिया कर रहे हैं. इसी तरह लोग स्नान नहीं कर पाते हैं.और तो और पुलिसकर्मी खुलेआम गाली देते हैं और नवयुवतियों को उठाकर ले जाने की धमकी देते हैं.दीघा मुसहरी के लोगों का पुलिसकर्मियों के हवाले से कहना है कि जबतक सरकार के द्वारा कड़ापन रहेगा,तबतक हमलोग यहां पर पुलिसिया कार्रवाई करते रहेगे.भले ही लोग शराब पीने का धंधा बंद कर दें.हमलोग लोगों को हड़काते रहेंगे.इसकी खबर ऊपर देते रहे हैं. यहां की महिलाओं का कहना है कि हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के समधियाना दीघा मुसहरी है.यहां की बेटी छठिया देवी है.जो पटना नगर निगम के वार्ड नम्बर 1 के वार्ड पार्षद हैं.इन दोनों सहजातीय नेताओं के रहते शबरी माता के वंशज पर पुलिसिया अत्यचार हो रहा है.थानाध्यक्ष के निशाने पर मुसहर समाज ही है.उनको पकड़कर सीधे जेल के अंदर डाल दिया जाता है.दीघा मुसहरी में और भी दूसरी जाति के लोग हैं.उनके साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जाता है. 

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