बिहार : भाकपा-माले ने जताया शोक, राज्य कार्यालय में दी गई श्रद्धांजलि - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 13 जनवरी 2022

बिहार : भाकपा-माले ने जताया शोक, राज्य कार्यालय में दी गई श्रद्धांजलि

  • नागभूषण पटनायक के अनन्य सहयोगी व भाकपा-माले उड़ीसा के पूर्व राज्य सचिव काॅ. क्षितिज विश्वास का निधन

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पटना 13 जनवरी, काॅ. नागभूषण पटनायक के अनन्य सहयोगी, भाकपा-माले की उड़ीसा राज्य कमिटी के पूर्व सचिव तथा पार्टी की केंद्रीय कमिटी के पूर्व सदस्य काॅ. क्षितिज विश्वास का 12 जनवरी की रात निधन हो गया. 92 वर्षीय काॅ. विश्वास के निधन पर भाकपा-माले की बिहार राज्य कमिटी ने गहरा दुख जताया है और उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि दी है. राज्य कार्यालय में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिसमें पार्टी के राज्य सचिव कुणाल, पोलित ब्यूरो के सदस्य अमर व धीरेन्द्र झा, वरिष्ठ पार्टी नेता केडी यादव, मीना तिवारी, आरएन ठाकुर, संतोष सहर, राजाराम, शशि यादव, विधायक सत्यदेव राम , गोपाल रविदास व संदीप सौरभ, कमलेश शर्मा, संतोष झा, नवीन कुमार, रणविजय कुमार, उमेश सिंह, प्रदीप झा, जितेन्द्र यादव,  प्रकाश कुमार, संजय यादव, सुधीर कुमार, विनय कुमार, विश्वमोहन कुमार आदि नेताओं ने भाग लिया. इस मौके पर काॅ. केडी यादव ने काॅ. क्षितिज विश्वास के संघर्षों को याद करते हुए कहा कि उड़ीसा में न केवल भाकपा-माले के बल्कि वामपंथी आंदोलन के वे एक बड़े स्तम्भ थे. काॅ. नागभूषण पटनायक के प्रभाव में वे सीपीआई से सीपीएम होते हुए 1987 में आईपीएफ से जुड़े और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य तथा उड़ीसा के राज्य अध्यक्ष बनाए गए. आईपीएफ के भंग होने पर वे भाकपा-माले की उड़ीसा राज्य कमिटी के सचिव बने. 1997 के बनारस पार्टी कांग्रेस में उन्हें पार्टी की केेंद्रीय कमिटी में चुना गया और 2013 तक वे केंद्रीय कमिटी के सदस्य बने रहे. उनके नेतृत्व में उड़ीसा में भाकपा-माले का चैतरफा विकास हुआ. भुवनेश्वर में काॅ. नागभूषण पटनायक भवन बनाने में उन्होंने अथक मिहनत की. गांव-कस्बों से चंदा इकट्ठा करके उन्होंने भवन बनवाया. उनके निधन से उड़ीसा और पूरे देश ने एक मजबूत वामपंथी स्तम्भ को खो दिया है. कम्युनिस्ट आंदोलन के निर्माण में उनकी महत्ती भूमिका को कभी भुलाया नहीं जा सकता है. वे लगातार वामपंथी आंदोलन को सुदृढ़ करने में लगे रहे. विगत दो सालों से बेड रिडेन होने के बावजूद राजनीतिक-सामाजिक कार्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता लगातार बनी रही. आज फासीवाद के हमले के दौर में वामपंथ के विस्तार का समय है. हम काॅ. विश्वास के बताए कदमों पर चलते हुए फासीवादी ताकतों को शिकस्त देने का आज संकल्प लेते हैं.

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