लौंगी मांझी हैं गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि ने अपने गांव कोठिल - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 26 जनवरी 2022

लौंगी मांझी हैं गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि ने अपने गांव कोठिल

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पटना.सेंट जेवियर्स कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, पटना में बुधवार को गणतंत्र दिवस के अवसर पर समारोह होगा. एसएक्ससीएमटी के जनसंपर्क समिति के अभिषेक आनंद ने बताया कि इस महत्वपूर्ण अवसर का मुख्य अतिथि श्री लौंगी मांझी हैं.मुख्य अतिथि ने अपने गांव कोठिलवा के पास के पहाड़ियों से वर्षा जल को अपने गांव के खेतों तक पहुंचाने के लिए पांच किलोमीटर लंबी नहर खोदने की अविश्वसनीय उपलब्धि हासिल की है.वे आधुनिक समय के दशरथ मांझी के रूप में प्रसिद्ध हैं. एसएक्ससीएमटी के जनसंपर्क समिति के अभिषेक आनंद ने बताया कि अब तक आपने इंसानों की कई ऐसी कहानियां सुनी होंगी, जिसमें रेगिस्तानी इलाके में खेती करना, पहाड़ काटकर रास्ता बना लेना और इस तरह के असंभव से दिखने वाले काम करके इन लोगों ने अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज करा लिया है. पहाड़ का सीना फाड़कर रास्ता बनाने वाले बिहार के गया के रहने वाले दरशरथ मांझी पर तो बाकायदा एक फिल्म बन चुकी है. बिहार के गया जिले के लुंगी मांझी ने भी ऐसी ही कामयाबी की इबारत लिखी है. गया शहर से 90 किलोमीटर दूर बांकेबाजार प्रखण्ड के लुटुआ पंचायत के कोठिलवा गांव के लुंगी मांझी  ने 30 सालों में अकेले पहाड़ से जमीन तक पांच किलोमीटर लंबी नहर बना दी है.इलाके में पानी के अभाव की वजह से लोग केवल मक्का और चने की खेती करते थे.खेती का साधन नहीं होने की वजह से गांव के सभी नौजवान अच्छी नौकरी की तलाश में गांव से पलायन कर चुके थे.


बिहार के गया के रहने वाले लुंगी मांझी  की कड़ी मेहनत से बनाई इस नहर से लोगों को खेती करने में ज्यादा समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा, उनके खेतों को भरपूर पानी मिल सकेगा. उनके परिवार के लोगों ने बताया कि लुंगी मांझी  रोज घर से निकलकर जंगल पहुंच जाया करते थे और अकेले नहर बनाया करते थे.बिना मजदूरी के काम करते थे, जिसके लिए परिवार के लोग उन्हें यह सब करने से मना भी करते थे. मांझी  ने कहा, "एक दिन में बकरी चरा रहा था, तभी सोचा कि अगर गांव में पानी आ जाए तो पलायन रुक सकता है.लोग खेतों में फसल उगा सकेंगे.आज नहर के साथ गांव में एक तालाब बनकर तैयार है. इससे इलाके के 3 गांव के 3,000 लोग फायदा ले रहे हैं. बंगेठा पहाड़ पर वर्षा का जल रुक जाता था. मांझी  ने पूरा जंगल घूम कर पहाड़ पर ठहरे पानी को अपने गांव तक लाने के लिए एक नक्शा तैयार किया.नक्शे के अनुसार वह 30 साल तक नहर बनाते रहे.इसके बाद 5 फीट चौड़ी और तीन फीट गहरी नहर बनकर तैयार हो गई.उन्होंने कहा कि सरकार अगर मुझे ट्रैक्टर दे देती मैं वन विभाग के बंजर पड़े जमीन को खेती लायक उपजाऊ बनाकर लोगों का भरण पोषण कर सकता हूं. जी हां,वही बिहार के गया के रहने वाले लुंगी मांझी आ रहे हैं सेंट जेवियर्स कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, पटना में बुधवार को गणतंत्र दिवस के अवसर पर.गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि हैं.एसएक्ससीएमटी के जनसंपर्क समिति के अभिषेक आनंद ने बताया कि झंडा फहराना- सुबह 9:00 बजे से होगा और धन्यवाद ज्ञापन - प्रातः 10:00 बजे से होगा.हाइब्रिड कार्यक्रम का कार्यक्रम इसके साथ संलग्न है.इसके आलोक में मास्क का उपयोग और सामाजिक दूरी के मानदंडों को बनाए रखना सभी आमंत्रितों के लिए बाध्यकारी होगा. लगातार तीस वर्षों तक अकेले अथक परिश्रम किया है, जिसमें उन्होंने अपने गांव कोथिलावा के पास के पहाड़ियों से वर्षा जल को अपने गांव के खेतों तक पहुंचाने के लिए पांच किलोमीटर लंबी नहर खोदने की अविश्वसनीय उपलब्धि हासिल की है।

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