मिस्त्री को हटाने के फैसले पर नौ मार्च को पुनर्विचार - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 21 फ़रवरी 2022

मिस्त्री को हटाने के फैसले पर नौ मार्च को पुनर्विचार

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नयी दिल्ली, 21 फरवरी, उच्चतम न्यायालय ने टाटा संस के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में साइरस मिस्त्री को हटाने के फैसले पर नौ मार्च को पुनर्विचार करने का फैसला किया है। शीर्ष अदालत की ओर से सोमवार को जारी आदेश में मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी राम सुब्रमण्यम की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने 2:1 के बहुमत से मिस्त्री के समूह द्वारा दायर याचिका पर नौ मार्च को खुली अदालत में सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की। न्यायमूर्ति राम सुब्रमण्यम ने अपनी अलग राय रखते हुए पुनर्विचार याचिका पर विचार करने के 15 फरवरी के इस आदेश से असहमति व्यक्त की है। न्यायमूर्ति रामसुब्रमण्यम ने कहा,"मुझे आदेश से सहमत होने में असमर्थता पर खेद है। मैंने समीक्षा याचिकाओं को ध्यान से देखा है और मुझे निर्णय की समीक्षा करने के लिए कोई वैध आधार नहीं मिला है। समीक्षा याचिकाओं में उठाए गए आधार इसके अंतर्गत नहीं आते हैं। समीक्षा के मानदंड और इसलिए मौखिक सुनवाई की मांग करने वाले आवेदन खारिज किए जाने योग्य हैं।" दूसरी ओर बहुमत के फैसले में कहा गया,"पुनर्विचार याचिकाओं की खुली अदालत में सुनवाई की मांग करने वाले आवेदनों की अनुमति है।" यह मांग मिस्त्री समूह की ओर से की गयी थी। शीर्ष अदालत के नियमों के अनुसार न्यायाधीशों के कक्ष में समीक्षा याचिका पर विचार किया गया। अदालत द्वारा पुनर्विचार का यह फैसला साइरस मिस्त्री के समूह के लिए राहत भरा है। उल्लेखनीय है कि 26 मार्च 2021 को शीर्ष अदालत ने टाटा संस के 2016 में कार्यकारी अध्यक्ष और कंपनी के बोर्ड में निदेशक के पद से हटाने के टाटा संस के फैसले को मंजूरी दी थी। शीर्ष अदालत अब नौ मार्च 2022 को अपने ही फैसले पर पुनर्विचार करेगा। उच्चतम न्यायालय के तत्कालीन न्यायाधीश एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति राम सुब्रमण्यम की पीठ ने 18 दिसंबर 2019 के नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) द्वारा मिस्त्री को टाटा संस के अध्यक्ष के रूप में बहाल करने के आदेश को रद्द कर दिया था। मिस्त्री को 2012 में चेयरमैन एमेरिटस रतन टाटा द्वारा चुना गया था और 2016 में साल्ट-टू-सॉफ्टवेयर समूह के अध्यक्ष के पद पर रहते बर्खास्त कर दिया गया था।

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