मधुबनी : शहादत दिवस पर माँ अन्नपूर्णा कम्युनिटी किचन की श्रद्धांजलि - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा I ह्रदय राखि कौसलपुर राजा II, हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी॥, मंगल भवन अमंगल हारी I द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी II, हरि अनंत हरि कथा अनंता I कहहि सुनहि बहुबिधि सब संता II, दीन दयाल बिरिदु संभारी । हरहु नाथ मम संकट भारी।I, माता पिता की सेवा करें....बुजुर्गों का ख्याल रखें...अपनी प्रतिभा और आचरण से देश का नाम रौशन करें...

गुरुवार, 24 मार्च 2022

मधुबनी : शहादत दिवस पर माँ अन्नपूर्णा कम्युनिटी किचन की श्रद्धांजलि

tribute-bhagat-singh-sukhdev-rajguru
जयनगर/मधुबनी,  जिले एक जयनगर में देश के महान क्रांतिकारी भगत सिंह, राजगुरु, सुकदेव के 91वां शहादत दिवस पर माँ अन्नपूर्णा कम्युनिटी किचन के द्वारा जयनगर रेलवे स्टेशन परिसर में श्रद्धांजलि सभा आयोजित किया गया। आयोजित सभा की अध्यक्षता संस्था के संरक्षक सुरेन्द्र महतो ने की किया। सभा को संबोधित करते हुए संस्था के संयोजक अमित कुमार राउत ने कहा कि शहीद-ए-आजम ये तीनो क्रांतिकारीयों ने अंग्रेजों से लड़कर हिंदुस्तान को आजाद करवाया। उनका क्रांतिकारीयों का सपना था की समतामूलक समाज के स्थापना और शोषण मुक्त व्यवस्था कायम करना सामंतवाद पूंजीवाद साम्राज्यवाद और संप्रदायवाद के सफाया करना ही उनका मुख्य उद्देश था। इस मौके पर संस्था के संरक्षक सुरेन्द्र महतो ने कहा कि भगत सिंह का सपना था अंग्रेजो से आज़ादी के बाद हमारे देश के अंदर समानता का अधिकार सबको मिले। भगत सिंह ने कहा था बम और पिस्तौल से इंकलाब नहीं होता, बल्की इंकलाब की धारा विचारों के शान पर तेज होता हैं।  इस मौके लक्ष्मण यादव ने कहा कि आज के ही तारीख यानी 23 मार्च को तीन स्वतंत्रता सेनानियों भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर को अंग्रेजों ने फांसी पर चढ़ा दिया था। बेहद कम उम्र में इन वीरों ने लोगों के कल्याण के लिए लड़ाई लड़ी और इसी उद्देश्य के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। कई युवा भारतीयों के लिए भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव प्रेरणा के स्रोत बने हैं। ब्रिटिश शासन के दौरान भी, उनके बलिदान ने कई लोगों को आगे आने और अपनी स्वतंत्रता के लिए लड़ने के लिए प्रेरित किया। यही कारण है कि इन तीनों क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि देने के लिए भारत 23 मार्च को शहीद दिवस के रूप में मनाता है। वहीं संस्था के राजेश गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी आज शहीद दिवस के मौके पर भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि देश के लिए मर मिटने का उनका जज्बा देशवासियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा। पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कि शहीद दिवस पर भारत माता के अमर सपूत वीर भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को कोटि-कोटि नमन। मातृभूमि के लिए मर मिटने का उनका जज्बा देशवासियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा। आज उनके रास्ते पर चलने का संकल्प लेते हुए उपस्थित लोगों ने शहीदे आजम भगत सिंह की तस्वीरों पर माल्यार्पण कर सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित किए।


बता दें कि भगत सिंह का जन्म 27 सितंबर, 1970 में पंजाब के बंगा गांव में हुआ था। वे स्वतंत्रता सेनानी के परिवार में पले बढ़े और 19 वर्ष की छोटी आयु में उन्हें फांसी दे दी गई। राजगुरु का जन्म 1908 में पुणे में हुआ था। वे हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी में भी शामिल हुए थे। सुखदेव 15 मई 1907 में हुआ था। उन्होंने पंजाब और उत्तर भारत में क्रांतिकारी सभाएं की और लोगों के दिलों में जोश पैदा किया। लाला लाजपत राय की हत्या के बाद कारण भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, आजाद और कुछ अन्य लोगों ने आजादी के लिए संग्राम का मोर्चा संभाल लिया था। अंग्रेजी शासन के हुकूमत के खिलाफ आवाज उठाते हुए उन्होंने पब्लिक सेफ्टी और ट्रेड डिस्ट्रीब्यूटर बिल के विरोध में 8 अप्रैल, 1929 को सेंट्रल असेंबली में बम फेंके थे। 'इंकलाब जिंदाबाद' का नारा लगाते लगाते भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को गिरफ्तार कर लिया गया और उन पर हत्या का आरोप लगाया गया। हत्या के आरोप में 1931 में उन्हें 23 मार्च को लाहौर जेल में फांसी दे दी गई। उनका अंतिम संस्कार सतलुज नदी के तट पर किया गया। अब तक उनके जन्म स्थान में हुसैनीवाला या भारत-पाक सीमा पर शहीदी मेला या शहादत मेला आयोजित किया जाता है। भारतीय विशेष रूप से शहीद दिवस पर भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु को याद करने और श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए परेड आयोजित करते हैं और स्वतंत्रता की लड़ाई में जान गंवाने वालों को याद करते हैं। इस दिन स्कूल कॉलेजों और कार्यालयों में वाद-विवाद, भाषण, कविता पाठ और निबंध प्रतियोगिता जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। 200 सालों की गुलामी के बाद भारत ने 1947 में अंग्रेजों से अपनी स्वतंत्रता प्राप्त की थी। लेकिन यह आजादी इतनी आसान थी? बिल्कुल नहीं। आजादी की कीमत के रूप में भारत को एक नहीं दो नहीं बल्कि लाखों कुर्बानियां देनी पड़ी थी। इन कुर्बानियों और वीरों को श्रद्धांजलि देने के लिए भारत शहीद दिवस मनाता है। हर साल 23 मार्च के दिन लोग वीरता के साथ लड़ने वाले ऐसे युवा सेनानियों की वीर गाथाओं के बारे में बात करते हैं, और उनकी वीरता के किस्से सुनाते हैं। आयोजित इस सभा को प्रवीर महासेठ, सुरेन्द्र महतो, गणेश कांस्यकार, गोविंद जोशी, राजेश गुप्ता, हीरा मांझी, लक्षमण यादव, अमित कुमार राउत, रामचंद्र साह, गोपाल सिंह, मनोज सिन्हा, रामजी गुप्ता, हर्ष महतो, गौरव जोशी, राहुल महतो, विक्की कुमार, मिथिलेश महतो, श्रवण शर्मा सहित अन्य कई लोगों के संबोधित किए।

कोई टिप्पणी नहीं: