बाबा विश्वनाथ धाम के गर्भगृह में मोदी की मां के वजन का लगा सोना - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 3 मार्च 2022

बाबा विश्वनाथ धाम के गर्भगृह में मोदी की मां के वजन का लगा सोना

  • मंदिर में यह दान पीएम नरेन्‍द्र मोदी को चाहने वाले एक आस्‍थावान ने दी 

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वाराणसी (सुरेश गांधी) नए कलेवर में सजे-धजे बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के गर्भगृह की दीवारों में सोना मढ़े जाने के बाद दरबार अब और चमकने-दमकने लगा है। या यूं कहे काशी के विश्वनाथ धाम में राग-विराग दोनों ही अपनी दिव्य आभा के साथ एकाकार हो उठे हैैं। खास यह है कि गर्भगृह की दीवारों पर सोने की पत्‍तलों से उकेरी गयी कृतियां एक अलग ही भव्यता को प्रदान कर रही है। दरअसल यह पूरा सोने का कार्य पीएम नरेन्‍द्र मोदी की मां के वजन के बराबर ही हुआ है और मोदी के चाहने वाले किसी भक्त ने ही दान दिया है। भक्त की शर्त है उसका नाम गोपनीय रखा जाए। 


बता दें, कारीगरों के बारीक काम से बाबा दरबार का गुंबद ही नहीं गर्भगृह भी अब सोने से पूरी तरह से मढ़ दिए गए हैं। बाबा दरबार परिक्षेत्र स्थित गर्भगृह को दक्ष कारीगरों के द्वारा माप और सांचा बनाने के बाद स्‍वर्ण कारखाने में यह बारीक काम को अंजाम दिया गया है। फिरहाल, श्रीकाशी विश्वनाथ धाम का नव्य-भव्य स्वरूप महाशिवरात्रि पर और निखर उठा है। गर्भगृह की भीतरी दीवारें सोने से मढ़ी गई हैं। पर्व के बाद चौखट-दरवाजे और बाहरी दीवारों पर भी सोना मढ़ा जाएगा। वास्तव में दक्षिण भारत के एक काराबोरी ने सोना दान किया है। कहा जा रहा है कि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मां हीराबेन के वजन के बराबर है जो उनके सौ वर्ष का होने पर श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर गर्भगृह को स्वर्णिम बनाने के भेंट किया गया है। दानदाता के आग्रह पर उनका नाम गोपनीय रखा गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रविवार को जब बनारस आए तब उन्होंने मंदिर गर्भगृह में बाबा का दर्शन और रुद्राभिषेक किया। उसी समय गर्भगृह की सुनहरी तस्वीर लोगों के सामने आई। पीएम 13 दिसंबर को श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के नव्य भव्य स्वरूप का लोकार्पण करने के बाद पहली बार बनारस आए थे। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर कार्यपालक समिति के अध्यक्ष मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने बताया कि 60 किलोग्राम सोना प्राप्त हुआ है। गर्भगृह की भीतरी दीवारों पर सोने के पत्तर लगाने में 37 किलोग्राम सोना लगा है। शेष 23 किलोग्राम सोना बाहरी दीवारों के साथ ही चौखट व दरवाजे पर मढ़ा जाएगा। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के वर्तमान स्वरूप का 1777 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होलकर ने निर्माण कराया था। उसके बाद वर्ष 1835 में पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह की ओर से दान किए गए साढ़े 22 मन सोने से दो शिखरों को स्वर्ण मंडित किया गया था। उसके बाद पहली बार मंदिर में सोना मढ़ा जा रहा है।


दो माह में कार्य पूरा 

गर्भगृह की दीवारों पर सोना मढऩे की प्रक्रिया जनवरी में शुरू की गई। पहले चरण में प्लास्टिक के सांचे बनाए गए। इसके आधार पर दूसरे चरण में तांबे के सांचे तैयार किए गए। अब तीसरे चरण में पिछले शुक्रवार को सोना मढऩे का कार्य शुरू किया गया जो रविवार को पूरा कर लिया गया। सोने के पत्तर मढऩे के लिए नई दिल्ली की फर्म महालक्ष्मी अंबा ज्वेलर्स की ओर से दस कारीगर लगाए गए हैैं। फर्म के प्रतिनिधि मुकुंद लाल के अनुसार महाशिवरात्रि के बाद गर्भगृह का चौखट और फिर बाहरी दीवारों पर सोना मढ़ा जाएगा। इसमें लगभग 120 किलोग्राम तक सोना लग जाएगा।


पूरा मंदिर होगा स्वर्णजड़ित 

पूरे मंदिर को नहीं सिर्फ गर्भगृह को भीतर से लेकर बाहर तक स्वर्ण मंडित करने की योजना है। इसमें 120 किलोग्राम सोना लगने का आकलन किया गया है। इसकी कीमत लगभग 60 करोड़ आएगी। गर्भगृह की भीतरी दीवारों को सोने से मढ़ा जा चुका है। महाशिवरात्रि के बाद चौखट-दरवाजे और फिर बाहरी दीवारों पर सोना मढ़ा जाएगा। इसे एक माह में पूरा कर लिया जाएगा। सोना मढ़ने के लिए आकलन जनवरी में शुरू किया गया था। इसके लिए सांचा आदि बनाने के बाद शुक्रवार को भीतरी दीवारों पर पत्तर लगाने का कार्य शुरू हुआ जो रविवार को पूरा कर लिया गया।


पूर्व में मंदिर में हो चुकी है सोना चोरी 

दरअसल बाबा दरबार की भव्‍यता ऐसी थी कि यहां के शिखर काफी कीमती हो चले थे। बाबा दरबार में वर्ष 1983 में दुस्साहसिक सोना चोरी के बाद ही महंती की परंपरा को खत्म कर दिया गया। इसके बाद काशी विश्वनाथ मंदिर अधिनियम 1983 के तहत इसका अधिग्रहण कर निगरानी करने के लिए एक न्यास का गठन कर व्यवस्थापन को सुचारु रूप से पूरा करने के लिए कार्यपालक समिति बना दी गई। मार्च 2005 में काशी विश्वनाथ मंदिर के ही एक पूर्व पुजारी ने मंदिर की सभी प्रकार की संपत्तियों में हेरफेर करने को लेकर आवाज उठाई थी। इस मामले की उन्‍होंने सीबीआइ सेजांच कराने की मांग करते हुए प्रबंधन पर लगभग 99 किलोग्राम सोना के साथ मंदिर की अन्य सम्पत्तियों को छिपाने का आरोप लगाकर सनसनी फैला दी थी।


244 साल बाद अब आया बाबा का भव्य स्वरुप 

शिवभक्त महारानी अहिल्याबाई ने 244 वर्ष पहले श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण कराया लेकिन 352 साल बाद बाबा दरबार विस्तार व साज संवार पाकर अपने मूल स्वरूप में आया और अब भव्‍य नजर आने लगा है। गंगा निहाल हैं, एक बार फिर उसी दृश्य को जीने का अवसर आया जब सशर्त ही सही बाबा ने काशी में प्रवेश की अनुमति दी और अपने चरणों को पखारने का सौभाग्य-आशीष बरसाया। आक्रमण-अतिक्रमण से करीब 15 हजार वर्ग फीट में सिमटे-संकुचाए श्रीकाशी विश्वनाथ धाम का 5,27,730 वर्गफीट में विस्तारित, सजा-संवरा सर्वतोभद्र स्वरूप सामने आया है।

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