दिल्ली की अव्यवस्था पर केन्द्र मूक दर्शक नहीं रह सकता : शाह - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 31 मार्च 2022

दिल्ली की अव्यवस्था पर केन्द्र मूक दर्शक नहीं रह सकता : शाह

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नयी दिल्ली 30 मार्च, गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली नगर निगम के एकीकरण के फैसले का समय की मांग बताते हुए कहा कि देश की राजधानी होने के नाते दिल्ली के शासन से दुनिया में देश की छवि बनती है, इसलिए यहां की अव्यवस्था की अनदेखी नहीं की जा सकती है। श्री शाह ने यहां लोकसभा में बुधवार को दिल्ली नगर निगम संशोधन विधेयक 2022 के लिए चर्चा का जवाब देते हुए दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार पर राजधानी के निवासियों के साथ धोखाधड़ी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पांचवे वित्त आयोग ने दिल्ली के तीनों नगर निगमों को 40 हजार 561 करोड़ रुपए देने की सिफारिश की थी लेकिन दिल्ली की सरकार ने सात हजार करोड़ रुपए से भी कम राशि दी। इसके बावजूद दिल्ली के तीनों नगर निगमों ने अच्छा काम किया और उनका घाटा केवल 11 हजार करोड़ रुपए का रहा। यदि 31 हजार करोड़ रुपए की बकाया राशि मिल जाती तो दिल्ली की जनता के लिए 20 हजार करोड़ रुपए सरप्लस मिलते और जनता को नयी सुविधाएं मिलतीं। गृह मंत्री ने कहा कि दिल्ली के नगर निगमों ने आय बढ़ाने के लिए कई प्रस्ताव दिल्ली सरकार को भेजे लेकिन दिल्ली सरकार ने या तो अस्वीकार कर दिया या फिर कोई जवाब ही नहीं दिया। आखिर नगर निगम कैसे चले। क्या चाहते हैं कि दिल्ली की जनता भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ हो जाए। उन्होंने कहा कि झूठ के पैर नहीं होते और ऐसे कारनामे ज्यादा दिनों तक छिप नहीं पाते हैं। दिल्ली सरकार कहती है कि 30 हजार करोड़ की कमी है तो फिर विज्ञापनों के लिए पैसा कहां से आता है। श्री शाह ने कहा कि असंवैधानिक तरीके से आम आदमी पार्टी के कैडर को लाभ पहुंचाया जा रहा है। ऐसी राजनीति भाजपा नहीं करती है। उन्होंने विपक्षी सदस्यों की ओर इशारा करते हुए कहा कि आप कहते हैं कि हम राजनीति कर रहे हैं और संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचा रहे हैं लेकिन संघीय ढांचा हम नहीं वो तोड़ रहे हैं। उन्होंने दिल्ली के तीनों नगर निगमों के एकीकरण के कारणों की जानकारी देते हुए कहा कि तीन मेयर, तीन आयुक्त, तीन मुख्यालय की जगह एक मेयर, एक आयुक्त एवं एक मुख्यालय होगा। एक प्रकार की कर व्यवस्था होगी और इससे कम से कम डेढ़ सौ करोड़ रुपए की बचत होगी। उन्होंने कहा कि नगर निगम में बदलाव का सही समय चुनाव के ठीक पहले ही होता है क्योंकि चुने हुए जन प्रतिनिधियों के कार्यकाल के साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है। श्री शाह ने कहा कि दिल्ली देश की राजधानी है और यहां के सिविक व्यवस्थाओं को पूरी दुनिया देखती है। जब दुनिया में भारत की छवि पर असर पड़े तो भारत सरकार मूक दर्शक बनी नहीं रह सकती है। उन्होंने कहा कि तीनों निगमों के एकीकरण के बाद पुनर्परिसीमन के बाद यहां 272 से घटा कर 250 सीटें की जाएंगी। उन्हाेंने भाजपा पर डरने का आरोप लगाने पर पलट वार करते हुए कहा कि हम डरने वाले लोग नहीं हैं। चुनाव जीतने के लिए लड़ते हैं और मानते हैं कि हार जीत होती है। लेकिन जिन्हें जनता पर अपने समर्थन का भरोसा है, उन्हें डर क्यों लग रहा है। यदि जनता उनका समर्थन करती है तो बाद में भी करेगी। गृह मंत्री ने कहा कि एकीकरण के बाद चुनाव होंगे और जो जीते वही नगर निगम का शासन चलाये। इसमें डरने की क्या बात है। उन्होंने कहा कि ना अहंकार की बात है और ना कमी की बात। लोकतंत्र में जनता का फैसला सभी को स्वीकार करना होता है। बाद में विपक्षी सदस्यों के संशोधन प्रस्तावों को खारिज करके ध्वनिमत से विधेयक काे पारित कर दिया गया। 

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