बिम्सटेक को मिला औपचारिक क्षेत्रीय संगठन का दर्जा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 31 मार्च 2022

बिम्सटेक को मिला औपचारिक क्षेत्रीय संगठन का दर्जा

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नयी दिल्ली 30 मार्च, भारत को दक्षिण पूर्व एशियाई क्षेत्र में एक कूटनीतिक उपलब्धि हासिल हुई जब उसकी पहल पर गठित बे ऑफ बंगाल इनीशिएटिव फॉर मल्टी सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कॉरपोरेशन (बिम्सटेक) के घोषणापत्र पर सदस्य देशों के हस्ताक्षर के साथ इसे औपचारिक रूप से एक अंतरराष्ट्रीय क्षेत्रीय संगठन का दर्जा मिल गया। श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे की अध्यक्षता में वर्चुअल माध्यम से आज आयोजित बिम्सटेक के शिखर सम्मेलन में संगठन के घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किये गये। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शिखर सम्मेलन में शिरकत की। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कोविड की महामारी के बीच इस क्षेत्र को स्वास्थ्य और आर्थिक सुरक्षा की चुनौतियों से बचाने के लिए क्षेत्रीय देशों के बीच एकजुटता और सहयोग को समय की मांग बताया और कहा, “आज समय है बंगाल की खाड़ी को कनेक्टिविटी, समृद्धि एवं सुरक्षा का सेतु बनाने का। मैं आप सब का आह्वान करता हूँ कि 1997 में जिन लक्ष्यों के लिए हमने साथ-साथ चलने का निर्णय लिया था, उनकी प्राप्ति के लिए हम एक नए जोश, नयी उर्जा के साथ फिर से अपने आप को समर्पित करें।” श्री मोदी ने कहा कि इस संगठन को अस्तित्व में आये आज 25 साल हो गये जो इसके महत्व को बताता है। जब संगठन के तहत विभिन्न मोर्चों पर प्रगति करने के साथ साथ बिम्सटेक चार्टर और सदस्य देशों के बीच बेहतर संपर्क के लिए समझौतों को स्वीकार किये जाने के साथ इस शिखर सम्मेलन से बिम्सटेक के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। उन्होंने कोविड महामारी के प्रभावों और यूक्रेन के हालात के मद्देनजर में क्षेत्रीय सुरक्षा और सहभागिता को बढ़ाये जाने की जरूरत पर बल देते हुए इस क्षेत्र के देशों की उम्मीदों को पूरा करने हेतु रोडमैप तैयार करने के लिए संगठन सचिवालय को 10 लाख डॉलर तथा आपदा प्रबंधन और आपदाओं का खतरा कम करने से जुड़े काम को पुर्नजीवित करने के लिए बिम्सटेक सेंटर फॉर वेदर एंड क्लाइमेट चेंज (बीसीडब्ल्यूसी) को 30 लाख डॉलर भी की राशि देने की घोषणा की और सदस्य देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए बिम्सटेक मुक्त व्यापार करार (एफटीए) वार्ता में भी प्रगति किये जाने की जरूरत पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने बिम्सटेक देशों के लोगों को भारत के नालंदा विश्वविद्यालय से छात्रवृत्ति को भी बढ़ाने की घोषणा की। प्रधानमंत्री ने कहा “ हमारे लोग और हमारी अर्थव्यवस्थाएं अब भी कोविड महामारी के प्रभावों को झेल रहीं हैं और यूरोप में चल रही उठापटक ने वैश्विक व्यवस्था की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिये हैं। ऐसे में बिम्सटेक घोषणापत्र की मदद से क्षेत्रीय सुरक्षा पर ध्यान देना बेहद ज़रूरी है, जो संगठन को एक संस्थागत ढांचा मुहैया कराता है। ” बिम्सटेक के श्रीलंका में हो रहे शिखर सम्मेलन की थीम “ बिमस्टेक - समृद्धि, टिकाऊ व्यवस्थाएं और जनस्वास्थ्य की ओर” है। सोमवार एवं मंगलवार को कोलंबों में बिम्सटेक की अधिकारी स्तरीय एवं मंत्री स्तरीय बैठक हुईं। आज शिखर सम्मेलन में नेताओं की मौजूदगी में तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किये गये जिनमें आपराधिक मामलों में परस्पर कानूनी सहायता संबंधी संधि, तकनीक हस्तांतरण सुविधा संबंधी फ्रेमवर्क, एवं राजनयिक संस्थानों के बीच आदान प्रदान संबंधी करार शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने इन समझौतों पर हस्ताक्षर का स्वागत करते हुए कहा कि इससे हमारी कानूनी व्यवस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय बन सकेगा। ऐसा ही एक करार हम अपने पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों के बीच भी कर सकते हैं। भारत की फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय अपने क्षेत्र में एक अनूठी और विश्वस्तरीय संस्था है। हम इसमें बिम्सटेक देशों के पुलिस और फाेरेंसिक अधिकारियों के लिए क्षमता संवर्धन की व्यवस्था भी कर सकते हैं। उन्होंने बिम्सटेक ने हर दो साल में शिखर सम्मेलन और सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों के बीच हर साल बैठक करने के फैसले का स्वागत किया। विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव बिम्सटेक रुद्रेन्द्र टंडन ने यहां संवाददाताओं को बताया कि बिम्सटेक को आगे बढ़ाने के लिए सात स्तंभ या विषय तय हुए हैं और सात सदस्य देशोें को एक एक विषय का दायित्व दिया गया है जिनमें शिक्षा, व्यापार, सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, समुद्री विज्ञान, कनेक्टिविटी, कृषि एवं वैल्यू चेन आदि शामिल हैं। भारत सुरक्षा संबंधी दायित्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि बिम्सटेक में परिवहन कनेक्टिविटी का मास्टर प्लान भी बनाया गया है। इन कदमों के माध्यम से बिम्सटेक के आर्थिक एकीकरण के लिए प्रयासों को बल दिया जाएगा। एक सवाल के जवाब में श्री टंडन ने बताया कि बिम्सटेक के काठमांडू में हुए पिछली बार हुए शिखर सम्मेलन में आतंकवाद, सीमापार अपराधों और गैर पारंपरिक खतरों के खिलाफ क्षेत्रीय कानूनी ढांचे को सुदृढ़ करने का निर्णय लिया गया था। सदस्य देशों ने अपने पुलिस बलों के बीच सहयोग बढ़ाने का भी फैसला किया था। श्री मोदी ने बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के आयोजन के लिए श्रीलंका के राष्ट्रपति को धन्यवाद दिया और बिम्सटेक की अध्यक्षता संभालने पर थाईलैंड के प्रधानमंत्री प्रयुत चान ओचा को शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

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