बिहार : शिक्षक सम्मान समारोह सह चैतन्य झांकियों का आयोजन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 11 अप्रैल 2022

बिहार : शिक्षक सम्मान समारोह सह चैतन्य झांकियों का आयोजन

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समेली, प्रखंड अंतर्गत यूथ पावर स्वयंसेवी संगठन लोककला मंच के प्रांगण में प्रजापिता ईश्वरीय विश्वविद्यालय के तत्वावधान में शिक्षक सम्मान समारोह सह चैतन्य झांकियों का आयोजन रखा गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बीके प्रभा दीदी ने किया । कार्यक्रम का संचालन यूथ पावर अध्यक्ष हरि प्रसाद मंडल ने किया।  कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित समेली प्रखंड के उप प्रमुख कंचन देवी, वयोवृद्ध सामाजिक कार्यकर्ता दर्वेश्वर प्रसाद मंडल, सुनील शर्मा, बीके अमन भाई, बीके प्रभा दीदी,फलका प्रखंड के पूर्व राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवक विक्रम कुमार मंडल आदि ने संयुक्त रूप से द्वीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में फलका वह समेली प्रखंड के अनेक सम्मानित शिक्षकों को तिलक व शाल प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में कांसेप्ट कोचिंग सेंटर पोठिया के संचालक महानंद कुमार, ग्रीन पार्क मिशन स्कूल के पिन्टु कुमार, पंकज कुमार मंडल, ओमप्रकाश प्रकाश साह,, सीमांचल अखबार के दिव्य आनंद, द ग्लोरियस इन्सु टीच के अमरदीप कुमार, संदीप आनंद सर, संतोष सर, दिवाकर कुमार राय, दैनिक भास्कर के संवाददाता सुमन शर्मा, पूर्व सरपंच अवधेश कुमार आर्य आदि को तिलक लगाकर व शाॅल प्रदान कर सम्मानित किया गया।इस अवसर पर उपस्थित बासुदेव मंडल, वार्ड सदस्य भुवनेश्वर प्रसाद राय, बीके अमन, पूनम रानी आदि वक्ताओं ने शिक्षकों के सम्मान विचार व्यक्त किया। इस मौके पर अलौकिक अध्यात्मिक रहस्यों को पर विचार व्यक्त करते हुए बीके प्रभा दीदी ने बताया कि प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय मलहरिया सेवा केंद्र के द्वारा रामनवमी के शुभ अवसर पर चैतन्य झांकियों व शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में राजयोगिनी ब्र.कु.प्रभा दीदी ने कहा कि शिक्षक और शिक्षा के बिना अच्छे समाज और अच्छे संस्कार की कल्पना करना कठिन है। जिस समाज में शिक्षा और शिक्षक का सम्मान नहीं है वहां का समाज मूल्यहीन हो जाता है। इसलिए जो संस्कार माता पिता नहीं दे पाते वह शिक्षक देता है। कई बार तो ऐसा देखा जाता है कि कई बच्चे ऐसे होते है कि शिक्षक के आज्ञाकारी होने के कारण देश के बड़े से बड़े पद पर आसीन हो जाते हैं। उनके अन्दर गुण और मूल्यों की इतनी पराकाष्ठा होती है कि वह एक श्रेष्ठ इंसान बन जाते हैं। आज के शिक्षकों की परिभाषा भी बदल सी गयी है। शिक्षक को ना तो शिक्षा का ही महत्व है और ना उनका आदर। इसलिए दिनों दिन मूल्य गिरते जा रहे हैं। समाज का रूप बदलता जा रहा है। भौतिक शिक्षा तो मिल रही परन्तु संस्कारों के अभाव से समाज आसुरीयता की ओर बढ़ता जा रहा है। ऐसे में शिक्षकों के शिक्षक और गुरुओं के गुरु परमात्मा स्वयं अब शिक्षक बन पढ़ा रहे है। इसलिए ब्रह्माकुमारी संस्थान में छोटी-छोटी बहनें परमात्मा का ज्ञान सुना कर नयी दुनिया वाले संस्कारों को भर रही हैं। यदि हम थोड़ा भी अपना देह अभिमान त्याग कर ग्रहण करने की कोशिश करें तो हमारा पूरा जीवन ही बदल जायेगा। यदि परमात्मा के बताये मार्ग पर चलेंगे तो जीवन में उत्कृष्टता तो आएगी ही साथ ही एक अच्छा समाज और परिवार का भी सृजन होगा। यह वर्तमान समय की मांग है।अहंकार के वश होकर शिक्षा का ग्रहण करना कठिन है।

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