बलात धर्मांतरण के रूप में चिह्नित किया जाता है, जो दुख का विषय है - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा I ह्रदय राखि कौसलपुर राजा II, हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी॥, मंगल भवन अमंगल हारी I द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी II, हरि अनंत हरि कथा अनंता I कहहि सुनहि बहुबिधि सब संता II, दीन दयाल बिरिदु संभारी । हरहु नाथ मम संकट भारी।I, माता पिता की सेवा करें....बुजुर्गों का ख्याल रखें...अपनी प्रतिभा और आचरण से देश का नाम रौशन करें...

शनिवार, 30 अप्रैल 2022

बलात धर्मांतरण के रूप में चिह्नित किया जाता है, जो दुख का विषय है

forced-change-relegion-sadfull
बेंगलुरू. कर्नाटक के ईसाई स्कूलों पर आरोप लगाया गया है कि बेंगलुरु के एक स्कूल ने माता-पिता से अंडरटेकिंग ली थी कि वे अपने बच्चों के क्लास में  बाइबल   ले जाने पर आपत्ति नहीं करेंगे.हिंदू जनजागृति समिति ने बेंगलुरु के क्लेरेंस हाई स्कूल के प्रशासन पर छात्रों के लिए बाइबल ले जाना अनिवार्य करने का यह आरोप लगाया था.समिति के राज्य प्रवक्ता गौड़ा ने आरोप लगाया कि स्कूल ने गैर-ईसाई छात्रों को अनिवार्य रूप से  बाइबल  ले जाने और पढ़ने के लिए कहा है जो संविधान के अनुच्छेद 25 और 30 का उल्लंघन है.यह संविधान का अपमान है. बता दें कि ग्रेड 11 के एडमिशन फॉर्म में माता-पिता से डिक्लेरेशन मांगा गया है कि "आप पुष्टि करते हैं कि आपका बच्चा अपने स्वयं के नैतिक और आध्यात्मिक विकास के लिए मॉर्निंग असेंबली स्क्रिप्चर क्लास और क्लबों सहित सभी कक्षाओं में भाग लेगा और इस दौरान  बाइबल   और अन्य भजन पुस्तक को ले जाने पर आपत्ति नहीं करेगा.इसी को आधार बनाकर जनजाग्रति नामक दक्षिणपंथी हिन्दू संगठन ने क्लारेन्स स्कूल पर धर्मांतरण का आरोप लगाया था.


इस बीच कर्नाटक राज्य सरकार ने स्कूल के खिलाफ शिकायत पर संज्ञान लिया और 26 अप्रैल को प्रबंधन को नोटिस देकर आरोपों पर जवाब मांगा.राज्य सरकार ने पूर्वी बेंगलुरु के रिचर्ड्स टाउन में क्लेरेंस हाई स्कूल को बाइबल के शिक्षण को अनिवार्य करने के अपने निर्णय की व्याख्या करने के लिए एक नोटिस जारी किया है.प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के बच्चों के अभिभावकों की शिकायतों और मीडिया रिपोर्ट्स को ध्यान में रखते हुए जवाब मांगा गया है .यद्यपि अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को प्रशासनिक छूट मिल सकती है, लेकिन उन्हें धार्मिक पुस्तकें पढ़ाने की अनुमति नहीं है. “स्कूलों में धार्मिक पुस्तकों को पढ़ाने या प्रचार करने के लिए पाठ्यक्रम में कोई विशेष प्रावधान नहीं होगा. इन सबका जिक्र था.अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करते समय इन सभी का उल्लेख किया गया था, ”नागेश ने कहा.जबकि यह स्कूल की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है.  कर्नाटक राज्य सरकार के द्वारा स्कूल के खिलाफ शिकायत पर संज्ञान लेकर 26 अप्रैल को प्रबंधन को नोटिस दिया गया.सरकार के द्वारा प्रेषित आरोपों के जवाब में 26 अप्रैल को ही महाधर्माध्यक्ष पीटर मचादो ने एक वक्तव्य जारी कर स्पष्ट किया कि “स्कूल 100 साल से अधिक पुराना है और इस स्कूल के खिलाफ कभी भी धर्मांतरण की कोई शिकायत नहीं आई है. स्कूल इस तथ्य को उचित ठहराता है कि बाइबल के उदाहरणों के आधार पर नैतिक शिक्षा को बलात धार्मिक शिक्षा नहीं माना जा सकता है. अन्य धार्मिक संप्रदायों द्वारा संचालित संस्थाएं भी अपने धर्म ग्रंथों के आधार पर धार्मिक शिक्षा देते हैं. केवल ख्रीस्तीय संस्थानों को ही निशाना बनाना बेहद अनुचित है. उन्होंने कहा कि लोगों की भलाई के लिये जो कुछ भी किया जाता है उसे बलात धर्मांतरण के रूप में चिह्नित किया जाता है, जो कि बड़े दुख का विषय है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी प्रथा पहले थी और पिछले साल से किसी भी बच्चे को स्कूल में बाइबल लाने या जबरदस्ती पढ़ने के लिए कहने की आवश्यकता नहीं है. उन्होंने कहा,  एक ईसाई अल्पसंख्यक स्कूल होने के नाते, स्कूल के घंटों के बाहर ख्रीस्तीय छात्रों के लिए बाइबल धर्म ग्रंथ या धर्म शिक्षा कक्षाएं संचालित करना प्रबंधन के अधिकारों के अन्तर्गत आता है.


महाधर्माध्यक्ष मचादो ने सरकार के दोहरे मापदंड पर सवाल उठाते हुए कहा कि हिन्दू शिक्षण संस्थानों में भगवत गीता तथा अन्य हिन्दू धर्मग्रंथों को पाठ्यक्रम में रखा जाता है जिस पर सरकार को किसी प्रकार की आपत्ति नहीं है तो उसे अल्पसंख्यक स्कूलों में दी जाने वाली बाइबल पर आधारित शिक्षा पर भी आपत्ति नहीं होनी चाहिये. महाधर्माध्यक्ष ने कहा, “हमने सुना है कि सरकार की अगले साल से, भगवद गीता और अन्य धार्मिक ग्रंथों से मूल्यों पर पाठ शुरू करने की योजना है.यदि बच्चों से भगवद गीता या अन्य धार्मिक पुस्तकों को खरीदने का अनुरोध किया जाता है, तो क्या इसे उन्हें प्रभावित करने या इन विशेष धर्मों में परिवर्तित होने के लिए प्रेरित करने के रूप में माना जा सकता है? हरगिज़ नहीं! उन्होंने कहा, नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए अल्पसंख्यक स्कूलों में धर्मग्रंथों का उपयोग छात्रों को उनके धर्म के प्रति जबरदस्ती आकर्षित करने के रूप में नहीं माना जा सकता है. माता-पिता की स्कूल चुनने की स्वतंत्रता उतनी ही महत्वपूर्ण है जितना कि समाज में नैतिक शुद्धता और अच्छे व्यवहार की कुछ अवधारणाओं को व्यक्त करने के लिए प्रबंधन का विशेषाधिकार. इसे बलात धर्मांतरण के रूप में व्याख्यायित नहीं किया जा सकता है. ख्रीस्तीय स्कूल में धर्मान्तरण आरोप का धर्माध्यक्ष महाधर्माध्यक्ष पीटर मचादो ने खंडन किया है.कर्नाटक में बैंगलोर के कैथोलिक महाधर्माध्यक्ष पीटर मचादो ने क्लारेन्स कैथोलिक हाई स्कूल पर लगाये गये बलात धर्मान्तरण के आरोपों से इनकार किया है. आगे कहा कि ये आरोप झूठे और भ्रामक हैं. बता दें कि हाल ही में, कर्नाटक सरकार ने स्कूलों में भगवद गीता को पेश करने की योजना की घोषणा की थी. मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा था कि भगवद गीता को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय चर्चा के बाद लिया जाएगा.इससे पहले गुजरात सरकार ने 17 मार्च को कक्षा 6-12 के लिए स्कूल पाठ्यक्रम में श्रीमद् भगवद गीता को शामिल करने का निर्णय लिया था.

कोई टिप्पणी नहीं: