अंग्रेजों के काम के थे सावरकर : अशोक कुमार पांडेय - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 16 मई 2022

अंग्रेजों के काम के थे सावरकर : अशोक कुमार पांडेय

  • सावरकर काफी होनहार और संगठन बनाने में माहिर थे - अशोक कुमार पांडेय
  • सावरकर बन्दुक के सहारे आजादी चाहते थे मगर उन्हें खुद  बन्दुक चलानी नही आती थी- अशोक कुमार पांडेय

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नई दिल्ली। चर्चित लेखक और इतिहासकार अशोक कुमार पांडेय ने कहा है कि विनायक दामोदर सावरकर में दक्षिणपंथी अपना नायक ढूंढते हैं। लेकिन सावरकर अंग्रेजों के सामने बहुत जल्दी टूट गये थे और अंग्रेज समझ गए थे कि वे उनके काम आ सकते हैं। उन्होंने ये बातें अपनी किताब ' सावरकर : काला पानी और उसके बाद' पर  परिचर्चा के दौरान कहीं। राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित इस किताब पर परिचर्चा उसके और कुंजुम बुक शॉप के सयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गयी थी।जिसमें  अशोक कुमार पांडेय से सुपरिचित कवि-लेखक गिरिराज किराडू ने बातें कीं। परिचर्चा के दौरान अशोक कुमार पांडेय ने कहा, सावरकर भारतीय इतिहास और राजनीति के सबसे चर्चित और विवादित व्यक्ति हैं। उनमें बहुत विरोधाभास हैं और उनके बारे में बहुत से भ्रम हैं। एक तरफ कई लोग उन्हें हीरो मानते हैं तो दुसरे तरफ कई लोग उन्हें विलन का दर्जा देते हैं। उनकी वास्तविकता से लोगों को परिचित होना चाहिए, यही सोचकर मैंने 'सावरकर : काला पानी और उसके बाद' लिखी जिसमें सावरकर को लेकर फैले और फैलाए गए भ्रमों का प्रामाणिक तथ्यों की कसौटी पर जाँच की है। उन्होंने कहा,  दक्षिणपंथी लोग जिस एक व्यक्ति के सामने आकर अटक जाते हैं वे हैं सावरकर। इन्हीं के इर्द-गिर्द दक्षिणपंथी अपनी राजनीति खलेते हैं और इन्हीं में वे अपना हीरो ढूढ़ते हैं।सावरकर हिन्दुत्ववादी आइडियोलॉजी के इकलौते सिद्धांतकार थे।

अशोक कुमार पांडेय ने आगे कहा कि इसमें शक नहीं कि सावरकर होनहार थे। वे संगठन बनाने में माहिर थे, उस समय 1857 के समर्थन में लन्दन में कार्यक्रम करना बहुत बड़ी बात थी जो सावरकर ने किया।   सावरकर के अंग्रेजों से माफी मांगने को लेकर अकसर उठने वाली बहस पर अशोक कुमार पांडेय ने कहा, मैं समझता हूँ कि सावरकर का माफी माँगना कोई इतनी बड़ी बात नही थी। अंडमान जेल से रिहा होने का यह एकलौता तरीका था। लेकिन तथ्यों से यह भी स्पष्ट है कि सावरकर अंग्रेजों के सामने बहुत जल्दी टूट गये थे।अंग्रेजों को समझ में आ गया कि सावरकर इस  हद तक टूट चुके हैं कि वे उनके काम आ सकते हैं। उन्होंने आगे कहा,  सावरकर बन्दूक के सहारे आजादी चाहते थे मगर रिपोर्ट के अनुसार उन्हें खुद  बन्दूक चलानी नही आती थी।परिचर्चा के बीच गिरिराज किराडू ने कहा कि अशोक कुमार पांडेय कीपुस्तक सावरकर की वैचारिक और व्यावहारिक यात्रा पर केंद्रित है। यह सावरकर की जीवनी नहीं है। लेखक ने पूरे तथ्यों के साथ इस किताब को लिखा है जो सावरकर के जेल जाने से पहले और जेल से निकलने के बाद उनके व्यक्तित्व और विचारों में आई तब्दीली की पड़ताल करती है। गौरतलब है कि अशोक कुमार पांडेय आधुनिक भारतीय इतिहास के बहसतलब मुद्दों पर लिखने के लिए खासे चर्चित हैं।कश्मीर और कश्मीरी पंडित और उसने गांधी को क्यों मारा उनकी अन्य चर्चित किताबें हैं. कवि और कहानीकार के बतौर भी अलहदा पहचान रखने वाले अशोक कुमार पांडेय की इन किताबों के अनुवाद अनेक भाषाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।

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