वर्चुअल वर्ल्ड ने की 2 फिल्मों की घोषणा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

सोमवार, 1 अगस्त 2022

वर्चुअल वर्ल्ड ने की 2 फिल्मों की घोषणा

  • फ़िल्म "जुदा होके भी" की सक्सेस मीट में महेश भट्ट, विक्रम भट्ट और सतीश पंचारिया की उपस्थिति

new-cinema-announced
पूरी तरह से वर्चुअल प्रोडक्शन में बनी दुनिया की पहली फ़िल्म "जुदा होके भी" की सफलता का जश्न मुम्बई में मनाया गया जहां महेश भट्ट, विक्रम भट्ट और के सेरा सेरा के चेयरमैन सतीश पंचारिया मौजूद थे। इस अवसर पर वर्चुअल वर्ल्ड द्वारा बनाई जा रही दो और फिल्मों का भी एलान किया गया। उनमें से एक फ़िल्म "खिलौने" होगी जो हिंदी के साथ अंग्रेजी में भी बनाई जा रही है जिसे विक्रम भट्ट निर्देशित करने जा रहे हैं। वहीं 1920 की फ्रेंचाइजी "1920 हॉरर ऑफ द हार्ट" की घोषणा भी की गई जिसे विक्रम भट्ट की पुत्री कृष्णा भट्ट डायरेक्ट करेंगी। 1920 की अगली कड़ी में जहां अविका गौर मुख्य भूमिका में होंगी वहीं फ़िल्म "खिलौने" में अनुप्रिया गोयंका सेंट्रल किरदार प्ले करेंगी। इस अवसर पर विक्रम भट्ट ने देश के पहले और सबसे बड़े वरचुअल प्रोडक्शन स्टूडियो के बारे में भी बात की जिसे उन्होंने सतीश पंचारिया के साथ मिलकर खोला है। महेश भट्ट ने कहा कि फ़िल्म "खिलौने" ह्यूमन ट्रैफिकिंग की कहानी है। "जब इंसान की औकात एक खिलौने की तरह हो जाती है" इसी सिचुएशन की स्टोरी है इसलिए इसका टाइटल खिलौने है। एक लड़की की दिल को छू लेने वाली कहानी है। जैसा कि सतीश जी ने कहा कि हम सिर्फ 9000 सिनेमाघरों को टारगेट नहीं कर रहे हैं बल्कि दुनिया भर के डेढ़ लाख सिनेमाघरों तक फ़िल्म को पहुंचाने का टारगेट रखते हैं। हमें थोड़ी हिम्मत और जुर्रत करके बड़े सपने देखने चाहिए। सपने भी अगर छोटे देखें तो फिर क्या बात हुई। लेकिन सिर्फ सपने देखने से काम नहीं चलेगा आपको विज़नरी भी होना होगा, विक्रम भट्ट और सतीश पंचारिया ने एक ख्वाब देखा और उसे पूरा किया। और वो भी ऐसे समय मे किया जब कोविड का बुरा दौर चल रहा था।  महेश भट्ट ने आगे कहा कि जैसा कि विक्रम ने बताया कि इसने कभी ऐसा सोचा ही नहीं था कि कभी ऐसा समय भी आएगा जब वह एक कमरे में कम्प्यूटर से घिरा होगा, और सिर्फ एक स्टूडियो में पूरी फिल्म बना देगा। "जुदा होके भी" में हर तरह के सीन हैं, रेलवे स्टेशन है, ट्रेन है, बर्फ के पहाड़ हैं, महल हैं सब कुछ है। लेकिन यह सब वरचुअल शूट किया गया है और यह सब लेटेस्ट तकनीक का कमाल है जिसे विक्रम भट्ट ने डिस्कवर किया है। विक्रम भट्ट 14 - 18 घन्टे तक काम करते थे। जुदा होके भी फ़िल्म एक मिसाल बन गई है जिसे हिंदुस्तान की अवाम ने सराहा है। किसी को भी फ़िल्म, टेलीविजन, ओटीटी के लिए कोई कंटेन्ट बनाना है तो इस स्टूडियो में हर प्रकार की सुविधा उपलब्ध है।  विक्रम भट्ट ने बताया कि मेरी बेटी कृष्णा ने जब फिल्मों में अपनी रुचि दिखाई तो सबसे पहले वह फ़िल्म 1920 के सेट पर आई थी जिसे मैं डायरेक्ट कर रहा था। उस वक्त वह हॉरर सीन में बहुत डरती थी और आज वह 1920 हॉरर ऑफ द हार्ट डायरेक्ट कर रही है। इस फ़िल्म को भी हम वरचुअल वर्ल्ड में शूट कर रहे हैं। मैं फ़िल्म "खिलौने" खुद डायरेक्ट कर रहा हूँ। यह बहुत बड़ी एक्शन फिल्म होगी और यह दुनिया की सबसे बड़ी एक्शन फिल्मों का मुकाबला करेगी। इसलिए हम इसे अंग्रेजी में भी बना रहे हैं।  एक सवाल के जवाब में विक्रम भट्ट ने बताया कि अगर हम जुदा होके भी की रिलीज से पहले यह चिल्ला चिल्ला कर कहते कि यह वर्चुअल वर्ल्ड में बनाई गई है सब देखिए, तो फिर दर्शकों को इसमे मजा नहीं आता। अगर कोई जादूगर अपना खेल दिखाने से पहले यह बताने लगे कि मैं आपको ऐसी एक ट्रिक दिखाने जा रहा हूँ, यह इस तरह से होती है तो फिर ऑडिएंस के लिए उसका क्या मतलब रह जाएगा। इसलिए हमने इसे चुपचाप रिलीज कर दिया। यह हमारा टेस्ट था और मुझे बेहद खुशी और गर्व है कि हम इस परीक्षा में पास हो गए हैं, दर्शकों ने फ़िल्म को सराहा है।


विक्रम भट्ट का कहना है कि

फ़िल्म "जुदा होके भी" हमारे लिए इस तकनीक की परीक्षा थी और एलईडी के साथ वर्चुअल प्रोडक्शन की तकनीक का इस्तेमाल करके हम पूरी फिल्म को 60 X 60 के फ्लोर पर बनाने में सफल रहे। हमारे लिए सबसे बड़ी जीत यह है कि जब से फिल्म रिलीज हुई है और दुनिया भर में लाखों लोगों ने देखी है, खुशी हो रही है कि दर्शकों ने हमारी तकनीक से बने दृश्यों को स्वीकार कर लिया है और दर्शकों ने कहा है कि उन्हें रियल और वर्चुअल के बीच कोई अंतर नहीं दिखा। बल्कि वर्चुअल सीन रियल से बेहतर निकले हैं। जुदा होके भी हमारी आर एंड डी फिल्म थी; अब हमारे पास इस कांसेप्ट का सबूत है। आपको बता दें कि के सेरा सेरा और विक्रम भट्ट की वर्चुअल प्रोडक्शन तकनीक फिल्म निर्माण के ढंग को बदलने के लिए तैयार है। के सेरा सेरा और विक्रम भट्ट ने मुंबई में स्थित दहिसर हाईवे पर भारत का पहला वर्चुअल प्रोडक्शन स्टूडियो खोला है जो 50,000 स्क्वायर फुट के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसमें एक समय में 4 फिल्मों की शूटिंग के लिए 4 फ्लोर हैं।

कोई टिप्पणी नहीं: