स्वनाथ फाउंडेशन ने 70 अनाथ बच्चों को दिखाई प्रेरणादायक फ़िल्म - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा , झंडा ऊँचा रहे हमारा। देश की आज़ादी के 75 वर्ष पूरे होने पर सभी देशवासियों को अनेकानेक शुभकामनाएं व बधाई। 'लाइव आर्यावर्त' परिवार आज़ादी के उन तमाम वीर शहीदों और सेनानियों को कृतज्ञता पूर्ण श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए नमन करता है। आइए , मिल कर एक समृद्ध भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं। भारत माता की जय। जय हिन्द।

सोमवार, 5 सितंबर 2022

स्वनाथ फाउंडेशन ने 70 अनाथ बच्चों को दिखाई प्रेरणादायक फ़िल्म

  • सांस्कृतिक मंत्री मा. सुधीर मुनगंटीवार ने बढ़ाया हौसला

orphan-child
मुंबई : स्वनाथ फाउंडेशन ने मुम्बई के आइनॉक्स थिएटर में दिग्दर्शक डॉ. सलील कुलकर्णी की मराठी फिल्म ‘एकदा काय झालं…’ की स्पेशल स्क्रीनिंग का आयोजन किया, जहां 70 से अधिक अनाथ बच्चों ने पहली बार इस तरह सिनेमाघर में एक प्यारी सी फ़िल्म का आनंद उठाया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में महाराष्ट्र में सांस्कृतिक मंत्री मा. सुधीर मुनगंटीवार ने भी अनाथ बच्चों के साथ यह फ़िल्म देखी और उन सभी का हौसला बढ़ाया। स्वनाथ फाउंडेशन की श्रेया भारतीय , सारिका महोत्रा और गगन महोत्रा ने यहां मंत्री जी का स्वागत किया और मा. सुधीर मुनगंटीवार ने इस फाउंडेशन के कार्यों की सराहना की। सांस्कृतिक मंत्री मा. सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि कहावत थी कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, आज 21वीं सदी में मनुष्य एक सेल्फिश प्राणी बन गया है। पहले संयुक्त परिवार रहता था, लोग हम साथ साथ हैं कहते थे आज "हम आपके हैं कौन" कहने लगे हैं। हमारे देश मे कभी भी कोई डिप्रेशन की गोली नहीं खरीदता था उसकी वजह यह थी कि मां की गोद मे हमें दुनिया भर की खुशी और सुकून मिलता था। हमारी संस्कृति में कहानी सुनाने कहने की परंपरा रही है। हमारी नानी दादी मौसी कहानी सुनाती थीं। बचपन में हम जो सांस्कृतिक मूल्य सीखते समझते हैं वही जीवन भर साथ रहते हैं। दिग्दर्शक डॉ सलिल कुलकर्णी ने जो सिनेमा बनाया है वह इसी मूल्यों के आधार पर है। श्रेया भारतीय स्वनाथ फाउंडेशन के अंतर्गत एक मिशन के रूप में काम कर रही हैं। उनके काम को सिद्धिविनायक भगवान भर भर के आशीर्वाद, शक्ति, ऊर्जा दे, इसलिए मैं इस कार्यक्रम में उपस्थित हुआ हूँ। जीवन में कुछ ऐसे काम होते हैं, जिनका सुख, फल इस जीवन में मिलता है और कुछ काम ऐसे होते हैं जिसका फल इस जीवन में तो मिलता ही है अगले जन्म में भी मिलता है। श्रेया भारतीय ने जो काम शुरू किया है ईश्वरीय कार्य है। जो मां बाप का प्रेम देते हैं, भगवान उन्हें अपना प्रेम और आशीर्वाद निश्चित रूप से देता है। उन्होंने अनाथ बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि तुम सब आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं। श्रेया भारतीय आप सबके साथ हैं, जहां मेरी जरूरत पड़ेगी मैं पूरा सपोर्ट करूंगा। श्रेया भारतीय ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण पहले फोस्टर चाइल्ड हैं, उनकी जयंती से हम सप्ताह का प्रारंभ करते हैं। अनाथ नहीं हम स्वनाथ कहना चाहिए क्योंकि अनाथ एक नकारात्मक, दुर्बल, असक्षम शब्द प्रतीत होता है। हमें यह लाचारी, दुर्बलता, नेगेटिविटी, हमदर्दी नहीं चाहिए। हमारे बच्चे अनाथ नहीं सभी स्वनाथ हैं, वह स्वयं के नाथ हैं। जैसे अपंग का दिव्यांग किया गया उसी तरह अनाथ का स्वनाथ हो, हम यह चाहते हैं। "हर बच्चे को परिवार" यह हमारा स्लोगन है। अनाथ बच्चों का पालन पोषण करने वाली सेवा को अंग्रेजी में फॉस्टर केयर सर्विसेज कहा जाता है। हम यह बताना चाहते हैं कि भारतीय समाज और संस्कृति अनाथों के लिए अलग नहीं थी, भारतवर्ष में पहले अनाथ शब्द ही नहीं था। मानव निर्मित आपदाओं में बड़ी संख्या में बच्चे अनाथ हुए। इसलिए इनके लिए संस्थाओं का गठन हुआ। हम सुसंस्कृत परिवार की खोज में स्वनाथ फॉउंडेशन की ओर से देश भर में निकले हैं। स्वनाथ फाउंडेशन के माध्यम से हम बच्चों के हित में काम कर रहे हैं, उनके लिए कानून की बात, जागरूकता की बात कर रहे हैं। बच्चों की संस्थाओं के संचालकों को स्वनाथ की पहल में शामिल होना चाहिए। हम यही चाहते हैं सभी बालक या बालिका गृह में रहने वाले बच्चों को एक बेहतर परिवार मिल जाए। दिग्दर्शक डॉ सलिल कुलकर्णी ने कहा कि यह फ़िल्म संस्कारों के बारे में है। कहानी के जरिये जो मैसेज जो सबक मनुष्य के जेहन में जाता है वह जीवन भर याद रहता है। मराठी में जब कोई कहानी सुनाना शुरू करता है तो कहता है ‘एकदा काय झालं…’ जिसे हिंदी में कहते हैं "एक समय की बात है।" श्रेया भारतीय जी का जो काम है उसका भी एक संदर्भ फ़िल्म में है। स्वनाथ फॉउंडेशन से जुड़ी सारिका महोत्रा ने बताया कि आज लगभग 70 अनाथ बच्चे यह फ़िल्म देखने आए। हमने इसका आयोजन इसलिए किया ताकि इस बहाने लोगों को फॉस्टर केयर के बारे में जागरूक किया जा सके कि एडॉप्शन ही एकमात्र विकल्प नहीं है बल्कि फॉस्टर केयर भी एक बेहतर ऑप्शन है। फॉउंडेशन के गगन महोत्रा ने बताया कि इस कार्य्रकम के आयोजन का उद्देश्य यह था कि बाकी दूसरे अनाथ बच्चों को प्रेरणा मिले। आज 18 साल से बड़े 70 से अधिक बच्चे सिनेमा देखने आए। गोद लेने की प्रक्रिया में चार पांच साल लग जाते हैं, फॉस्टर केयर के जरिये टेम्परेरी पैरेंटिंग की जा सकती है। अगर आप 5 साल तक बच्चे को ठीक से परिवार में रखते हैं तो फिर उसे एडॉप्शन में कन्वर्ट कर सकते हैं, हम समाज में यह जागरूकता फैलाना चाहते हैं। बता दें कि स्वनाथ उन बच्चों के लिए काम करने वाली एक संस्था है जिन्हें देखभाल और सुरक्षा की आवश्यकता है। स्वनाथ का उद्देश्य उन बच्चों को सशक्त बनाना है जिन्हें देखभाल और सुरक्षा की जरूरत है। इसका नजरिया बच्चों के अधिकारों का संरक्षण करना है। सरकारी नीतियों को सपोर्ट करने और इस पर अमल करने की दिशा में भी यह संस्था कार्य कर रही है।

कोई टिप्पणी नहीं: