बिहार : प्रीपड स्मार्ट मीटर के कारण तीन गुणी ज्यादा बिजली देनी पड़ रही है - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 11 सितंबर 2022

बिहार : प्रीपड स्मार्ट मीटर के कारण तीन गुणी ज्यादा बिजली देनी पड़ रही है

  • सिटींजन्स फोरम ने आयोजित किया प्रीपेड स्मार्ट मीटर  के खिलाफ नागरिक कन्वेंशन

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पटना, 11 सितंबर. नागरिक सरोकारों व जनतात्रिक अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध संस्था 'सिटींजन्स फोरम'  की ओर से प्रीपीड  स्मार्ट मीटर तथा बिद्युत स्मार्ट मीटर  को लेकर नागरिक  कन्वेंशन आयोजित किया गया.  गाँधी संग्रहालय पटना  में आयोजित इस नागरिक कन्वेंशन में पटना शहर के  आम नागरिकों के अलावा विभिन्न  जन संगठनों के प्रतिनिधि  मौजूद थे. कन्वेंशन का संचालन पांच सदस्यों वाली अध्यक्ष मंडल ने किया.  अध्यक्ष मंडल में थे अनिल कुमार राय, प्रीति सिन्हा, मनोज कुमार, संजय श्याम और मणिलाल.  स्वागत वक्तव्य सिटीजन्स  फोरम के संयोजक अनीश अंकुर ने किया.  बिद्युत स्मार्ट मीटर को लेकर 'सिटीजन्स  फोरम' की ओर से एक पेपर प्रस्तुत किया गया जिसमें बिद्युत स्मार्ट मीटर लगने के बाद किस प्रकार आम लोग  द्वारा झेली जा रही परेशानियों का जिक्र किया गया. पेपर के अनुसार दूसरे राज्यों की तुलना में बिजली बिल में तीन गुणी  से अधिक का भुगतान करना पड़ता है. उडीसा, केरल, गोवा आदि राज्यों में बिद्युत दर 2.11 रु  से लेकर 2.87 रु प्रति यूनिट है लेकिन बिहार में शहरी क्षेत्र में 6.10 रु, 6.40 रु तथा 8.40 रु लिया जाता है. एटक के राज्य महासचिव गज़न्फर नवाब के अनुसार ' प्रीपीड स्मार्ट मीटर के बहाने गरीब लोगों से धन वसूल कर निजी कम्पनियों को को स्थानानंत्रित  किया जा रहा है." प्रदीप मेहता ने नागरिक  कन्वेंशन  को संबोधित करते हुए कहा "  प्रीपीड  स्मार्ट मीटर उपभोक्ता संरक्षण कानून में नियम है की बिजली बिल महीने के बाद 15 दिनों के बाद तक जमा किया जा सकता है. लेकिन इस नियम को लागू नहीं किया जाता है. किसान आंदोलन के तरह संगठित होकर इसका विरोध करना होगा.  मोबाइल कम्पनी की तरह बिजली कम्पनी को बनाया जा रहा है. इस बिल का विरोध होना चाहिये. " बिहार इलेक्ट्रोक सप्लाई वर्कर्स यूनियन के उपमहासचिव डी पी यादव ने कहा " बिजली उद्योग से जुड़े मज़दूर भी इस लड़ाई में साथ हैँ तथा 23दिसंबर को संसद के सामने धरना देने जा थे हैँ. पहले बिजली में चालीस हजार मज़दूर थे लेकिन आउटसोर्सिंग के बाद मात्र 14हजार मज़दूर रह गए हैँ. किसानों  को 12-13  हजार  रुपया लगेगा. पूर्व नगर पार्षद बलराम चौधरी ने कहा "  यदि कोई  स्वच्छा  से प्रीपेड़ मीटर लगाएं तो ठीक लेकिन  जबरदस्ती नहीं किया जाना चाहिए. ज़ब बिहार सरकार ने प्रीपड स्मार्ट मीटर की शुरुआत की थी तब पटना  सिटी से आंदोलन की शुरुआत हुई. प्रीपेड मीटर बड़े पूंजीपतियों के लिए लाया गया. हमारी गाड़ी कमाई का पैसा सरकार ले ले रही है. पहले 120 वाट और 200 वाट का चलता था अब तो मात्र 8-10 वाट  का बल्ब जलता है  तब भी बिजली विभाग मनमानी कर 8.05 रु के दर से बिजली बिल लिया जा रहा है." 


सीपीई के पूर्व जिला मंत्री रामलला  सिँह ने कहाँ " 2003 में वाजपेई सरकार द्वारा जो कानून लाया गया था उसी में  बिजली के निजीकरण  का बीज मौजूद था.  कोयला से बिजली का निर्माण होता है. लेकिन कोयला का निजीकरण कर बिजली को महंगा किया जा रहा है. हमारी पार्टी  ने पहली बार कोयले के राष्ट्रीयकरण की बात की थी. उनकी शर्त है की प्रीपेड़ स्मार्ट मीटर लगाएंगे तभी बिजली खरीदा जाएगा. " समाजिक कार्यकर्ता संजीव श्रीवास्तव ने कहा " स्मार्ट प्रीपड मीटर बिहार की परिघटना  है. ये दरअसल यह  भृष्टटाचार  का मामला है. उडीसा, महाराष्ट्र  में आजतक स्मार्ट मीटर नहीं लगा है.  ज़ब विकसित राज्यों में स्मार्ट मीटर नहीं है तो बिहार में क्यों लगेगा? बीस हजार मीटर रिडर्स जो रोड पर उतरने को तैयार हों.  मीटर रीडिंग टेस्ट सर्टिफिकेट मांगने की जरूरत है." सामाजिक कार्यक्रता रामभजन  यादव  ने अपनी टिप्पणी  में कहा "  प्रीपड मीटर  के कारण तीस से चालीस प्रतिशत तक ज्यादा बिल आता है. बिहार जैसे गरीब प्रांत में  जहां 52 प्रतिशत गरीबी और कुपोषण से जूझ रही है  स्मार्ट मीटर में लगाना ही नहीं चाहिए.  बिहार में 80 प्रतिशत लोग ऐसे हैँ जो एंड्रॉयाड फोन नहीं रखते. ऐसे लोग कैसे स्मार्ट मीटर रिचार्ज कर सकेंगे? स्मार्ट मीटर के खिलाफ दानापुर, हिलसा, " सामाजिक कार्यकर्ता सिस्टर दोरोथी ने  कहा " हमलोग कोयले के बजाए सौर ऊर्जा ओर ध्यान देना चाहिए. " सर्वहारा जनमोर्चा के राधेश्याम  ने कहा " बिजली अधिनियम के माध्यम से निजी हाथों में सौंपने के पीछे का कुचक्र चल रहा है. बैंक, बीमा, कोयला, सब क्षेत्र काम निजीकरण किया जा रहा है. इस निजीकरण पर कुठराघात करने की जरूरत है. दलित लोगों के लिये प्रीपड मीटर बेहद घातक है " प्रीपेड़ मीटर के खिलाफ  हस्ताक्षर अभियान चलाने वाले अखिलेश कुमार ने नागरिक कन्वेंशन में अपनी राय प्रकट करते हुए कहा "  हमने दो हजार लोगों काम हस्ताक्षर भेजा था. यदि हर गली मुहल्ले में  लोगों जो जागरूक कर दिया जाए  तो हम लोगों काम काम हो जाएगा. यदि लाइन काटने आये तो उसका  वीडियो बना लें इससे हमलोगों काम काम हो सकता है. एक प्रीपड  मीटर लगाने पर मिस्त्री को पांच सौ रूपये काम लाभ मिलता है यदि हम एम. आर. पी काम कागज़ मांगे तो मीटर लगाने वाला भागेगा. जो लोग विरोध करता है वहां  प्रीपड मीटर  नहीं लगता है. बिजली अभियंता संघ के नेता कारू प्रसाद "  सूचना के अधिकार के तहत मांगे गए आंकड़े के अनुसार बिजली की दर 2.44 रु पड़ता है. ट्रांसमिशन  का खर्च वगैरह काम खर्च जोड़कर 5 रु पड़ता है. विदेशी मुद्रा भण्डार खींचने के लिए  यह प्रीपेड  मीटर  लागू किया जा रहा है. " सामाजिक -राजनीतिक कार्यक्रता अरविन्द सिन्हा ने कहा " अभी हाईकोर्ट के कारण मामला थोड़ा रुका हुआ है हाईकोर्ट के बाद जबरन स्मार्ट प्रीपेड़ मीटर थोपा जाएगा. निजीकरण का दौर पुरे राज्य विकास के लिए बेहद खतरनाक है. किसान ऐसे ही कर्ज में डुबा हुआ है उसमे ये प्रीपड मीटर और ऊपर से बोझ रहेगा.  लड़ाई को हाईकोर्ट में और आगे बढ़कर लड़ा जाये"


उदयन राय  ने अनुसार " सरकारों की आदत होती है की जनता से छुपा क्र काम किया जाए " ओमप्रकाश वर्मा  ने कन्वेंशन  को संबोधित करते हुए कहा "स्टेट पावर काम दो हिस्सा है एक्सीक्यूटिव और जुड़िसीयरी. और न्यायलय कोई भी काम कार्यपालिका से बिना पूछे जजमेंट नहीं दिया करती है. जिस दिन हमलोग पटना में एक लाख  लोग उतार दें तो प्रीपड स्मार्ट मीटर को वापस लेना होगा. हमारे द्वारा जमा किये गए राशि काम पचास प्रतिशत काम गबन हो जाता है सबसे बड़ा हमला बिजली बोर्ड पर ही होता है. बिजली काम काम करने के कारण प्रतिदिन एक आदमी की मृत्यु होती है. " वरिष्ठ सामाजिक कार्यक्रता मोहन प्रसाद ने कहा " मैंने ज़ब सूचना के अधिकार के तहत सूचना मांगा तो बताया की  सरकारी संस्थान में बिजली बिल वर्षो - वर्षो तक नहीं कटेगा लेकिन आम लोगों काम कट जाएगा. यह होता है प्रीवेल्जड मोड. विभाग खुद गलत कामों में संलग्न है.  जन आंदोलन की बदौलत ही इसे  पीछे धकेला जा सकता है " 'सार्थक संवाद'  के  सर्वेश कुमार के अनुसार "  इस दो मसले पर महागठबंधन की सरकार को फैसला लेने के लिए  तैयार हैँ? पिछले दो तीन महीनों में दिन भर में छह -आठ घंटे तक बिजली गुम रहती है. गिने चुने राजनीतिक दल ही इसमें सड़क पर उतर कर काम करें. " पुष्पेंद्र शुक्ला ने बताया " प्रीपड मीटर के कारण साइबर  अपराध  में बढ़ोतरी हुई है. इस आंदोलन को वार्ड के स्तर पर ले जाना पड़ेगा . " देवरतन प्रसाद ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा " ज़ब तक आम लोग आंदोलन में नहीं आएगी, नागरिकों की भागीदारी नहीं होगी तब तक आगे नहीं बढ सकेंगे. सिटींजन्स फोरम को यह चुनौती सवेकार करनी चाहिए. " अध्यक्ष मंडल की ओर अनिल कुमार राय ने बतलाया "  सड़कों के संघर्ष का कोई विकल्प नहीं है. सड़कों पर विरोध नहीं होता तो सत्ता बेलगाम हो जाती है. हमारी सरकार पूंजीवाद के मैनेजर के बतौर काम करती है " सभा को रासबिहारी चौधरी, चन्द्रनाथ मिश्रा, पुकार,  आदि ने भी कन्वेंशन को संबोधित किया. नागरिक कन्वेंशन  में मौजूद प्रमुख लोगों में थे विश्वजीत कुमार,  ए. एन कालेज  के प्रोफेसर मणिभूषण कुमार, जीतेन्द्र कुमार, एटक के राज्य अध्यक्ष अजय कुमार, इंद्रजीत, जयप्रकाश ललन, हरदेव ठाकुर, जयप्रकाश, पुष्पेंद्र शुक्ला, राज आनंद, गौतम गुलाल, मंगल पासवान, महेश रजक, रौशन कुमार सिन्हा, प्रमोद नंदन, डॉ अंकित, सुनील सिंह, सौजन्य उपाध्याय, कुलभूषण गोपाल, नंदकिशोर सिँह, शशिभूषण, गोपाल शर्मा आदि.

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