बिहार : चंद्रगुप्त प्रबंध संस्थान, पटना में संगोष्ठी का आयोजन किया गया - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 25 जनवरी 2023

बिहार : चंद्रगुप्त प्रबंध संस्थान, पटना में संगोष्ठी का आयोजन किया गया

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पटना, चंद्रगुप्त प्रबंध संस्थान, पटना में संस्थान नवोन्मेष परिषद गतिविधि के तहत “श्रीमद्भगवत गीता” से “नेतृत्व एवं प्रबंधन की शिक्षाएं” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमे मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. आशुतोष उपाध्याय, निदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना ने श्रीमद्भगवद्गीता में वर्णित “नेतृत्व एवं प्रबंधन की शिक्षाएं” विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया | प्रोफेसर (डॉ.) राणा सिंह, निदेशक, चंद्रगुप्त प्रबंध संस्थान, पटना और श्री कुमोद कुमार, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के स्वागत भाषण से कार्यक्रम की शुरुआत हुई | डॉ. उपाध्याय ने बताया कि नेतृत्व लोगों को प्रभावित करने का एक गुण है, लेकिन प्रबंधन सर्वोत्तम संभव तरीके से चीजों को प्रबंधित करने का एक अनुशासन है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रबंधन का प्रमुख गुण नेतृत्व होता है | नेतृत्वकर्ता के कुछ अनुयायी और कुछ सिद्धांत होने चाहिए। नेतृत्वकर्ता की परिकल्पना सीमा से परे होनी चाहिए। प्रबंधन में नियोजन, संगठन, स्टाफिंग, संसाधनों का नियंत्रण आदि  शामिल हैं। नेतृत्वकर्ता में लोगों को प्रोत्साहित करने और उनसे परिणाम प्राप्त करने का गुण होना चाहिए । नेतृत्वकर्ता को किसी भी प्रतिकूल परिस्थिति का सामना करने में सक्षम होना चाहिए, दु:ख से कमजोर नहीं होना चाहिए। उसमें करुणा और निःस्वार्थ सेवा का भाव होना चाहिए । नेतृत्वकर्ता का सबसे महत्वपूर्ण चरित्र है कि उसमें भय और क्रोध नहीं होना चाहिए | भगवान कृष्ण तीन विशिष्ट विषयों को परिभाषित करते हैं - सीखना, ठीक से बोलना और समभाव। ईमानदारी के साथ और दूसरों के प्रति सम्मान के साथ संवाद करें और अपने अनुयायियों को प्रेरित करें और उन्हें लक्ष्य प्राप्त करने के लिए मार्गदर्शन दें। हमें अच्छे समय में अति उत्साहित नहीं होना चाहिए और बुरे समय में अत्यधिक उदास नहीं होना चाहिए। हर समय एक स्थिर मानसिकता रखने से हमें अपने जीवन में अधिक शांति और खुशी प्राप्त करने में मदद मिलती है। बाद में उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी तरह के संस्थान में 60% औसत छात्र होते हैं और नेतृत्वकर्ता को उनकी निगरानी करनी होती है और हमेशा बेहतर करने के लिए छात्रों को प्रेरित करना होता है, और 20% शीर्ष छात्रों को उन्हें और बेहतर करने की सुविधा प्रदान करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस दुनिया में कोई भी परफेक्ट नहीं है, दूसरों की मदद लें और दूसरों की कमजोरी और ताकत को समझें। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आप जो भी करें उसमें अपना दिल और आत्मा लगाएं, सफलता के भूखे न रहें। आशावादी बने रहें लेकिन अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखें। यदि आप असफल होते हैं, तो आप निराश न हों। कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में डॉ. उपाध्याय को सम्मानित किया गया एवं साथ ही, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना एवं चंद्रगुप्त प्रबंध संस्थान, पटना के बीच समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding) पर  हस्ताक्षर किया गया | धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ |

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