बिहार में लगी काई को हटाने के लिए गांव तक पहुंचना पड़ेगा : प्रशांत किशोर - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 30 जनवरी 2023

बिहार में लगी काई को हटाने के लिए गांव तक पहुंचना पड़ेगा : प्रशांत किशोर

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कुचायकोट, गोपालगंज, जन सुराज पदयात्रा के 120वें दिन की शुरुआत गोपालगंज के कुचायकोट प्रखंड अंतर्गत सना उल्ला गोकुल पंचायत के गोकुल हाई स्कूल मैदान में पदयात्रा शिविर में सर्वधर्म प्रार्थना से हुई। इसके बाद प्रशांत किशोर सैकड़ों पदयात्रियों के साथ जगन्नाथपुर गांव से पदयात्रा के लिए निकले। आज जन सुराज पदयात्रा भोपतापुर, कुचायकोट, उचकागांव, खजूरी, बैंटेल, सिरसिया होते हुए सासामुसा पंचायत के इशवापुर गांव स्थित ओएसिस इंटरनेशनल एकेडमी में जन सुराज पदयात्रा शिविर में रात्रि विश्राम के लिए पहुंची। प्रशांत किशोर के पदयात्रा का गोपालगंज में आज 15वां दिन है। वे जिले में 5 से 6 दिन और रुकेंगे और इस दौरान वे अलग-अलग गांवों और प्रखंडों में पदयात्रा के माध्यम से जनता के बीच जायेंगे। उनकी समस्याओं को समझ कर उनका संकलन कर उसके समाधान के लिए ब्लू प्रिंट तैयार करेंगे। दिनभर की पदयात्रा के दौरान प्रशांत किशोर 5 आमसभाओं को संबोधित किया और 7 पंचायत के 15 गांवों से गुजरते हुए 19 किमी की पदयात्रा तय किया।


बिहार के लड़कों को भेड़-बकरी की तरह पीठ पर झोला लटका कर मजदूरी के लिए बाहर जाना पड़ता है 

जन सुराज पदयात्रा के दौरान भोपतापुर पंचायत में आमसभा को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में 40 प्रतिशत लोग जो खेती-किसानी कर रहे हैं, वो सिर्फ अपने परिवार का पेट भर सकते हैं। वो इतने गरीब हैं कि बस किसी तरीके से अपना पेट पाल रहे हैं। आज हमारे बिहार में सिमेंट, टीवी, छड़ की फैक्ट्री नहीं लग रही है। हां, आज हम एक काम में सबसे आगे हैं। आज हम पूरे देश को मजदूर दे रहे हैं। आज गांव का जवान लड़का भेड़-बकरी की तरह पीठ पर झोला लटकाए देश के अन्य राज्यों में नौकरी खोजने जा रहा है। वो किन मुसीबत में और कितने छोटे कमरों में गुजारा कर रहा है यह दर्द सिर्फ उनको पता है।


हमको गांधी मैदान में भीड़ जुटाने आता है, पर बिहार में लगी काई को हटाने के लिए गांव तक पहुंचना पड़ेगा

जन सुराज पदयात्रा के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि आप बिहारियों को अपने बच्चों की चिंता नहीं है। आप हमारी चिंता क्या कीजिएगा? आज आपके अंदर जात-धर्म का इतना नशा घुसा दिया गया है कि आपको इसके अन्दर-बाहर कुछ नजर नहीं आता। आज आपको अपने बच्चों की तकलीफ तक नहीं दिख रही है। यही बताने गांव-गांव पैदल चल रहे हैं। मुझे कोई सैलाब नहीं खड़ा करना है। मुझे तो आपकी समस्याओं और आपके दर्द को समझना है कि आप कैसे इतनी मुसीबतों के बाद भी गुजारा कर रहे हैं। आज मैं 5 से 10 लोगों के बीच मीटिंग कर रहा हूं, ताकि हर एक समस्याओं को समझ सकूं। वरना मुझे गांधी मैदान में भीड़ जुटाना आता है। आज जो भीड़ जुटाता है उसे हम सिखाते है कि भीड़ कैसे आएगा। जन सुराज भीड़ जुटाने का कार्यक्रम नहीं यह कार्यक्रम है लोगों के मन से उस काई को हटाने का जिसे नेताओं और दलों ने आपके दिमाग में जमा दिया है।

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