बिहार : कांपती हाथों में जलती मोमबत्ती - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 16 जनवरी 2023

बिहार : कांपती हाथों में जलती मोमबत्ती

  • छत्तीसगढ़ राज्य में चुनाव 2023 में है.राज्य में 90 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव होगा.अभी से ही धर्म के नाम पर गोलबंदी शुरू है.
  • धर्म दिलों को जोड़ता है, तोड़ता नहीं. जो धर्म का दुरुपयोग कर तोड़ने का प्रयास करता है, वह धार्मिक नहीं है.इस समय
  • देश में धर्म के नाम पर नफरती दीवार खड़ी करने की कोशिश नववर्ष के दिन 01 और 02 जनवरी को नारायणपुर  में की गयी.

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पटना. भारत के छत्तीसगढ़ राज्य का एक ज़िला नारायणपुर है. नारायणपुर आदिवासियों की एक बड़ी संख्या अभी भी गहरे जंगलों में रह रही है और अपने स्वयं के अनूठे संस्कृति को सुरक्षित रखने के लिए बाहरी लोगों के साथ मिलकर न मिलें. नारायणपुर, जनजातियों की भूमि और नारायणपुर की कुल आबादी का लगभग 70% आदिवासियों में शामिल है, जो छत्तीसगढ़ की कुल आदिवासी आबादी का 26.76% है. नारायणपुर क्षेत्र के प्रमुख जनजाति हैं गोंड, अजूज मारिया, भटरा भत्ता को उप-कास्ट सान भटरा, पिट भात्रा, अनीत भात्रा अम्निट हाईस्ट हास्ट स्टेटस, हल्बा, धूर्वा, मुरिया और बाइसन हॉर्न मारिया में विभाजित हैं. नारायणपुर के गोंड भारत में सबसे प्रसिद्ध जनजातियों में से एक है, जो विवाहों की उनकी अद्वितीय घोटुल व्यवस्था के लिए जाना जाता है.आबादी के मामले में गोंड भी मध्य भारत का सबसे बड़ा आदिवासी समूह है. सर्वविदित है कि दिनांक 01 और 02 जनवरी 2023 को छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिला में वहाँ के ईसाई समुदाय पर हुए उन्मादी भीड़ की हिंसक हमले के विरुद्ध पटना के ईसाई समुदाय के साथ कई समाजसेवी और बुद्धिजीवियों ने कुर्जी चर्च  के प्रांगण में नारायणपुर के हिंसा प्रभावित लोगों के साथ अपनी एकजुटता दिखाते हुए प्रार्थना सभा का आयोजन किया. ठण्ड के बावज़ूद इसमें सैकड़ों की संख्या में अमन-.चैन के पक्षधर लोगों ने भाग लिया.सब अपने हाथ में जलती हुयी मोमबत्ती लिए सभी प्रभावित लोगों की सुरक्षा और दंगाग्रस्त क्षेत्रों में शांति बहाली के लिए दुआ कर रहे थे. प्रार्थना सभा में उपस्थित जनों का स्वागत करते हुए, कुर्जी पल्ली के पल्ली पुरोहित फादर पायस प्रशांत, ये.स. ने कहा - ‘‘यहाँ गिरजाघर के परिसर में, इस ठण्ड के मौसम में हम सब नारायणपुर के लोगाें के लिए प्रार्थना करने के लिए एकत्रित हुए हैं.हम इस प्रकार के हमलों से प्रभावित हर व्यक्ति के साथ एकजुटता में खड़े हैं. हमारी उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि हम जिंदा लाेग हैं जो मौत की शक्तियों से कह रहे हैं कि मानवता आज भी जीवित है’’. इस विरोध सभा की अर्गुआइ  करते  हुए पटना महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष सेबास्टियन कल्लूपुरा ने धर्म के नाम पर आमलोगों पर किये जा रहे हिंसक और भावनात्मक हमलों की निंदा करते हुए कहा कि इस प्रकार के हमले मूलतः मानवता और जन विरोधी हैं. हम आहत और प्रभावित लोगाें की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं.उन्होंने कहा कि देश भर में हो रहे इस प्रकार के  हमलों, चाहे वे जिनपर भी किये जा रहे हों, हम निंदा करते हैं. जिस प्रकार नारायणपुर में गिरजाघर और आदिवासी समाज के लिए संचालित विद्यालय पर हमले किये गये उसे देखकर स्पष्ट हो जाता है कि इस प्रकार के हमले सुनियोजित रूप योजनाबद्ध तरीके से किये जाते हैं.हम इन हमलों में प्रभावित हर व्यक्ति के साथ एकजुटता में खड़े हैं.उनके लिए और उनको उत्पीड़ित करने वालों के लिए भी हम प्रार्थना करते हैं. प्रभु प्रभावित लोगों को इस कठिन दौर में बल दें, जीवन के पक्ष में खड़े लोगों की मध्यस्थता से उन्हें सांत्वना दें तथा आम जनों पर जुल्म करने वालों को समझ दें कि वे अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों के साथ दुर्भावना नहीं बल्कि सद्भावना से व्यवहार करें. इस प्रार्थना सभा को संबोधित करते हुए बिहार विधानसभा के पूर्व सभाध्यक्ष उदय नारायण चौधरी, समाजसेवी निवेदिता, रेवरेन्ड मोसेस आदि ने भी अपने विचार रखे और इस प्रकार के सुनियोजित, सांगठनिक और योजनाबद्ध तरीके से दलिताें, आदिवासियों, महिलाओं और बच्चों पर किये जा हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की. उन्होंने कहा कि इस प्रकार की जन विरोधी गतिविधियाँ देश की की परंपरा पर कुठाराघात करते हैं और इसका केवल एक ही मकसद समाज और देश को विखण्डित करना है.हमारे पास आवाज़ है और इसका भरपूर उपयोग करते हुए हमने हमेशा से इन बर्बर कृत्यों पर हमला किया है और करते रहेंगे. वहीं समाजसेवी रूपेश ने आह्वान किया कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) की 75 वीं पुण्यतिथि के अवसर पर 30 जनवरी  को देश में धर्म की राजनीति करने वालों को दरकिनार कर सद्भावना कायम करने के लिए कार्यकर्म तय करें. आज भी राष्ट्रपिता की शहादत का यह दिन गांधी जी को दुनिया में सर्वाधिक प्रासंगिक बना हुआ है.बापू के देह से तो संसार में नहीं रहे लेकिन उनके विचारों ने पूरे विश्व को एक बार फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या हिंसा का रास्ता दुनिया की सारी समस्यासओं का समाधान है.देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की  सुश्री संध्या ओस्ता ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ सभा की कार्रवाई  समाप्त की गयी. मालूम हो कि 08 जनवरी को छतीसगढ के आदिवासी ईसाइयों के साथ दुर्व्यवहार तथा वहाँ के चर्च में तोड़-फोड़ की अमानवीय घटना से आहत हो दिनांक 08 जनवरी 2023 को नयी दिल्ली के सेक्रेड हार्ट कैथेड्रल  में कैंडल लाईट प्रेयर का आयोजन किया गया था.जिसमें भारी संख्या में समुदाय के लोगों के साथ लगभग सभी धर्मों के धर्मगुरु तथा लोग शामिल हो नफरत की भावना त्याग आपसी सद्भाव की कामना करते हुए आदिवासी ईसाईयों की सुरक्षा तथा उनकी धार्मिक स्वतन्त्रता कज कामना की गई थी. उसी तरह बेत्तिया ईसाई समुदाय की तरफ से छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में गिरजाघर को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त करने और वहां की ईसाई समुदायों को धर्म परिवर्तन के नाम पर झूठा आरोप लगाकर भारतवर्ष की संपूर्ण ईसाई समुदाय पर घोर अत्याचार के विरोध में नारायणपुर की कलीसिया के साथ  सद्भावना एवं सांत्वना व्यक्त  करने के लिए शाम को कैंडल लाइट के साथ शांति जुलूस निकाला गया. इसमें हमारे पल्ली पुरोहित हेनरी फर्नांडो अन्य पुरोहित , सिस्टरगण,  प्रकाश ऑगस्टीन , अनिल डिक्रूज  , रिचर्ड फ्रांसिस, सुनील डिक्रूज, रंजीत केरोबिम, संजय फ्रांसिस, एवं अन्य गणमान्य लोगों ने भाग लिया.इस सन्दर्भ में अल्पसंख्यक ईसाई कल्याण संघ के महा सचिव एस.के. लॉरेन्स और फादर लुइस की भूमिका अहम रही.

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