बक्सर के चैसा में आंदोलनरत किसानों पर मध्य रात्रि में बर्बर दमन निंदनीय : माले - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 11 जनवरी 2023

बक्सर के चैसा में आंदोलनरत किसानों पर मध्य रात्रि में बर्बर दमन निंदनीय : माले

  • माले की जांच टीम करेगी पूरे मामले की जांच.

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पटना 11 जनवरी, भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल और अखिल भारतीय किसान महासभा के महासचिव काॅ. राजाराम सिंह ने बक्सर के चैसा में 10 जनवरी की मध्य रात्रि को किसानों के घरों में घुसकर उनपर किए गए बर्बर पुलिस दमन की कड़ी निंदा की है. कहा कि प्रशासन को मामले को समझदारी से हल करना चाहिए था, लेकिन उसके अड़ियल रवैये की वजह से स्थिति गंभीर हुई. माले के डुमरांव विधायक अजीत कुशवाहा के नेतृत्व में एक जांच टीम घटना की पूरी जानकारी ले रही है. नेताद्वय ने कहा कि चैसा में निर्मित हो रहे थर्मल पावर प्लांट के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहित हो रही है. किसानों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण कानून 2013 का उल्लंघन करते हुए बिना उचित मुआवजे के जमीन के अधिग्रहण का काम शुरू हो चुका है. उचित मुआवजे के साथ-साथ अन्य कुछ और मांगों पर विगत तीन महीनों से वे शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं, फिर भी उनकी मांगों पर कोई सुनवाई नहीं हुई. 10 जनवरी की रात पुलिस ने गांवों में छापा मारा और बर्बर किस्म के दमन ढाए. इसके बाद किसानों का आंदोलन आज हिंसक हो उठा. पूरे घटनाक्रम के लिए प्रशासन का रवैया जिम्मेवार है.


15 फरवरी की रैली को लेकर माले का जिलों में कार्यकर्ता कन्वेंशन

भाकपा-माले के 11 वें महाधिवेशन के अवसर पर पटना के गांधी मैदान में आयोजित लोकतंत्र बचाओ-देश बचाओ रैली की सफलता के लिए जिलों में कार्यकर्ता कन्वेंशन किए जा रहे हैं. अब तक भोजपुर, अरवल, रोहतास, बक्सर, समस्तीपुर, जहानाबाद, नवादा, औरंगबाद, दरभंगा, सिवान, पश्चिम चंपारण, मुजफ्फरपुर आदि जिलों में कार्यकर्ता कन्वेंशन संपन्न हो चुके हैं. इन कन्वेंशनों में मुख्य रूप से पार्टी के वरिष्ठ नेता काॅमरेड स्वदेश भट्टाचार्य, राज्य सचिव कुणाल, पोलित ब्यूरो सदस्य अमर व धीरेन्द्र झा आदि नेतागण भाग ले रहे हैं. कन्वेंशन के जरिए नीचे के स्तर तक रैली के लिए जनगोलबंदी शुरू हो चुकी है. माले राज्य सचिव कुणाल ने बताया कि हमारी यह रैली सभी पुरानी रैलियों का रिकाॅर्ड तोड़ देगी. देश से 2024 में भाजपा की विदाई तय करने की दिशा में हमारी यह रैली एक मील का पत्थर साबित होगी. कन्वेंशनों के अलावा पूरे राज्य में रैली व महाधिवेशनों के नारों के साथ दीवाल लेखन शुरू हो चुका है. गांव-गांव बैठकें भी आयोजित हो रही हैं.

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