पटना. भारतीय जनता पार्टी की गंदी राजनीति ने संवैधानिक पदों की गरिमा को तो गिराया ही है साथ में बिहार की उच्च शिक्षा को बुरी तरह से प्रभावित किया है. राजभवन और राज्यपाल से ये अपेक्षा की जाती है कि दलीय भावना से ऊपर उठकर ये जनहित में फैसले लेंगे, लेकिन लगातार ऐसा देखा जा रहा है कि बिहार के विश्वविद्यालयों में भाजपा नेताओं की मर्जी चल रही है और ये सब कुछ राजभवन खामोशी से देख रहा है. बिहार के प्रसिद्ध आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में लगभग चार वर्षों से स्थायी कुलपति की नियुक्ति राजभवन द्वारा नहीं की जा रही है. इतने बड़े विश्वविद्यालय को एक ऐसे प्रभारी कुलपति के हवाले कर दिया गया है जो भ्रष्टाचार और अनियमितता के आरोपी हैं. पूरा राज्य ये जानता है कि भ्रष्टाचार के एक आरोपी को भाजपा के इशारे पर आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय का प्रभारी कुलपति बनाया गया. विश्वविद्यालय के हजारों छात्रों के भविष्य के साथ इससे बड़ा मजाक क्या होगा कि वर्ष 2020 से लेकर वर्ष 2022 तक विश्वविद्यालय के कुलपति के लिए कुल चार विज्ञापन प्रकाशित किये जा चुके हैं बावजूद इसके राजभवन द्वारा मामले को लटकाया जा रहा है. कांग्रेस पार्टी ये जानता चाहती है कि क्या बिना किसी के निजी हित के ऐसा संभव हो सकता है कि चार-चार विज्ञापनों के बावजूद कुलपति की नियुक्ति न हो. कांग्रेस पार्टी ये भी जानना चाहती है कि क्या राजभवन और राज्यपाल एक पार्टी विशेष के नेताओं को खुश रखने का केंद्र बन गये हैं. एक पूरे विश्वविद्यालय की साख खतरे में है. हजारों छात्रों का भविष्य अंधकारमय है.भ्रष्टाचार और अनियमितता की शिकायत लगातार आ रही हैं और राजभवन क्या बिना दबाव के चुप है? मौजूदा राज्यपाल से लेकर पूर्व के राज्यपालों की इस मामले में भूमिका क्या संदिग्ध नहीं लगती? ऐसे में कांग्रेस पार्टी ये मांग करती है कि कुलपति नियुक्ति मामले में हुई देरी की निष्पक्ष जांच राजभवन ही करवाये और प्रदेश की जनता के सामने तथ्य सामने रखे ताकि विश्वविद्यालय और राजभवन की साख बची रहे.
गुरुवार, 25 मई 2023
बिहार : भारतीय जनता पार्टी की गंदी राजनीति
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