बिहार : सरकारी स्कूलों की छुट्टियों को पक्षपात ढंंग से संशोधित करने पर हो रहा है जोरदार विरोध - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 30 अगस्त 2023

बिहार : सरकारी स्कूलों की छुट्टियों को पक्षपात ढंंग से संशोधित करने पर हो रहा है जोरदार विरोध

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पटना. प्रत्येक साल सरकार के द्वारा नए साल के पूर्व सरकारी छुट्टियाें का ऐलान कर दिया जाता है.सरकारी कर्मचारियों को लगभग 50 दिनों से अधिक सरकारी छुट्टियां मिल रही हैं.इस बीच नीतीश कुमार सरकार ने एक अहम फैसले के तहत इस साल सितंबर से दिसंबर तक की सरकारी स्कूलों की छुट्टियों को संशोधित किया है.इसका जोरदार ढंग से विरोध किया जा रहा है. बताया जाता है की छुट्टियों की सूची में गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, गांधी जयंती, क्रिसमस, बुद्ध पूर्णिमा, दशहरा, दिवाली, गुड फ्राइडे, गुरु नानक जयंती, ईद उल फितर, ईद उल जुहा, महावीर जयंती, मुहर्रम और पैगंबर मुहम्मद का जन्मदिन शामिल है.साप्ताहिक अवकाश (Weekly Off), आकस्मिक अवकाश (CL), अर्जित अवकाश (EL), चिकित्सा अवकाश (Medical leave), मातृत्व अवकाश (Maternity Leave), पितृत्व अवकाश (Paternity leave) वगैरह. हर छुट्टी के लिए अलग-अलग नियम होते हैं और हर छुट्टी को लेने की न्यूनतम और अधिकतम संख्या भी निर्धारित होती है. इस बीच बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने एक अहम फैसले के तहत इस साल सितंबर से दिसंबर तक की सरकारी स्कूलों की छुट्टियों को संशोधित किया है.शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के आने के बाद सरकारी विद्यालयों के बच्चों पर सीधा असर डालने वाला यह पहला फैसला है. इसका पहला असर यही है कि रक्षा बंधन पर भी माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के बच्चों को स्कूल जाना पड़ेगा.  इसके साथ ही दशहरा, दीपावली और लोक आस्था के महापर्व छठ की छुट्टियां भी काटी गई हैं. अभी से दिसंबर तक की 23 में से 12 छुट्टियों को खत्म किया गया है. विभाग ने विद्यालयों में 220 कार्यदिवसों के पूरा नहीं होने के कारण बच्चों पर पड़ रहे प्रभाव को इस फैसले का कारण बताया है. प्रारंभिक से उच्च माध्यमिक विद्यालयों तक में 31 अगस्त को राखी के दिन अवकाश नहीं रहेगा. दुर्गापूजा में छह दिनों की छुट्टी घोषित थी, इसे अब दो दिन कर दिया गया है. रविवार को जोड़कर यह तीन दिन होगा.बिहार के लोकपर्व की तैयारियों के मद्देनजर दीपावली से छठ तक लगातार छुट्टी रहती है. इस बार 13 नवंबर से 21 नवंबर तक कुल नौ दिनों की छुट्टी दिख रही थी, लेकिन अब इनकी संख्या चार हो गई है.दीपावली के दिन 12 नवंबर को छुट्टी रहेगी. फिर 15 नवंबर को चित्रगुप्त पूजा व गोवर्द्धन पूजा के दिन. इसके बाद 19 और 20 नवंबर को छठ का अवकाश रहेगा. यह देखा जा रहा है कि राज्य सरकार के ताजा आदेश के तहत चेहल्लुम पर 6 सितंबर, मोहम्मद साहब से जन्मदिन और अनंत चतुर्दशी पर 28 सितंबर, महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर और क्रिसमस डे पर 25 दिसंबर को मिलने वाली छुट्टी अप्रभावित रही है.

       

विभाग का कहना है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत प्राथमिक विद्यालयों में कम-से-कम 200 दिन, माध्यमिक विद्यालयों में 220 दिन का कार्यदिवस जरूरी है. चुनाव, परीक्षा, त्योहार, भीषण गर्मी, भीषण ठंड, बाढ़ आदि के कारण विद्यालयों की पढ़ाई प्रभावित होती है.इसके साथ ही त्योहारों के मौके पर विद्यालयों के बंद होने की प्रक्रिया में भी एकरूपता नहीं है.इसलिए वर्ष 2023 के शेष अवकाशों में यह बदलाव किया गया है. इस संदर्भ में पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि सरकारी स्कूलों में रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, ज्यूतिया जैसे प्रमुख हिंदू पर्व-त्योहारों पर छुट्टी रद करना और नवरात्रि, दीपावली से छठ तक की छुट्टी में कटौती करना राज्य सरकार की हिंदू-विरोधी मानसिकता का परिणाम है. श्री मोदी ने कहा कि शिक्षा विभाग के अवर मुख्य सचिव ने एक और मनमाने फैसले से बिहार की छवि और संस्कृति पर आघात किया है. उन्होंने कहा कि जब चेहल्लुम और मोहम्मद साहब के जन्मदिन की छुट्टी बरकरार रखी गई और यह रहनी भी चाहिए, तब भगवान कृष्ण की जयंती (जन्माष्टमी), गुरु नानक जयंती (कार्तिक पूर्णिमा) और बिहार केसरी श्रीबाबू की जयंती पर छुट्टी समाप्त क्यों गई?  श्री मोदी ने कहा कि सरकार को स्कूली बच्चों के मन पर विपरीत प्रभाव डालने वाले और सांस्कृतिक सद्भाव बिगाड़ने वाले फैसले को तत्काल वापस लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि बिहार की पहचान जिस लोकपर्व छठ से होती है, उसकी छुट्टी भी काट दी गई.दीपावली से छठ पूजा के बीच 9 दिन की छुट्टी को घटाकर 4 दिन कर दिया गया. यह बहुत ही आपत्तिजनक है.यह स्वीकार्य नहीं है. श्री मोदी ने कहा कि जिस शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE ACT) के तहत 220दिन की पढ़ाई सुनिश्चित करने का तर्क देकर केवल हिंदू-सिख त्योहारों पर चोट की गई , उसी कानून की धारा-27 ई शिक्षकों को शिक्षणेतर कार्यों में लगाने से रोकती है, ताकि पढ़ाई बाधित नहीं हो.  उन्होंने कहा कि सरकार ने इस कानून का उल्लंघन कर शिक्षकों को जातीय सर्वे, मिड डे मील, मतदाता सूची पुनरीक्षण आदि में लगाकर पढाई के कई महीने बर्बाद किये.इसका जिम्मेदार कौन है? श्री मोदी ने कहा कि टीचर से नॉन-टीचिंग काम कराने से पढ़ाई बाधित हो रही है न कि पर्व-त्योहार की छुट्टियों के कारण और अगर ऐसे अवसरों पर स्कूल खुलेंगे भी तो कौन बच्चा स्कूल जाएगा?  उन्होंने कहा कि जब तक शिक्षा विभाग से वर्तमान अवर मुख्य सचिव हटाये नहीं जायेगे, तब तक इसी प्रकार बिहार की किरकिरी होती रहेगी.

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