विश्व पुस्तक मेले में नन्द चतुर्वेदी का स्मरण, साम्य के नन्द चतुर्वेदी विशेषांक का लोकार्पण - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 16 फ़रवरी 2024

विश्व पुस्तक मेले में नन्द चतुर्वेदी का स्मरण, साम्य के नन्द चतुर्वेदी विशेषांक का लोकार्पण

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नई दिल्ली। ' नन्द चतुर्वेदी बड़े अंत:करण वाले मनुष्य और कवि थे। वे उन कवियों में से थे जो सबको साथ लेकर चले। अच्छा है कि अब हिंदी कविता आलोचना की दृष्टि बदली है और हमारी भाषा के बड़े कवि के रूप में उनकी प्रतिष्ठा हो रही है। सुपरिचित आलोचक ओम निश्चल ने कवि नन्द चतुर्वेदी की जन्म शताब्दी के अवसर पर विख्यात लघु पत्रिका 'साम्य' का लोकार्पण करते हुए कहा कि नन्द बाबू केवल कवि ही नहीं कविता के सक्रिय कार्यकर्ता भी थे। विश्व पुस्तक मेले में गार्गी प्रकाशन के स्टाल पर आयोजित लोकार्पण में निश्चल ने कहा कि अपने सादगी भरे शिल्प में भी नन्द बाबू ने हमारी विडम्बनाओं को देखा -परखा। उद्भावना के सम्पादक अजय कुमार ने कहा कि विस्मृति के इस दौर में साम्य का यह अंक सचमुच उत्साहवर्धक घटना है। उन्होंने हाल में आए उद्भावना के अंक में प्रकाशित नन्द चतुर्वेदी की कविताओं का जिक्र भी किया। जाने माने आलोचक प्रो हितेंद्र पटेल ने नन्द चतुर्वेदी की कविताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यह बाज़ार का दौर है और इस दौर में हमें अपनी स्मृतियों को बचाए रखने की चुनौती है। साम्य के इस विशेषांक का प्रकाशन बाज़ारवादी समय में कविता और संस्कृति का प्रतिकार है। उदयपुर से आए  आलोचक माधव हाड़ा ने कहा कि मैं नन्द बाबू का स्नेहभाजन रहा हूँ और उन्हें याद करना मेरे लिए प्रीतिकर अनुभव है। हाड़ा ने कहा कि नॉस्टेल्जिया का जैसा रचनात्मक उपयोग नन्द बाबू ने अपनी कविताओं में किया है वैसा हिंदी के किसी दूसरे समकालीन कवि के यहाँ नहीं मिलता। उनकी कविता के कई आयाम है और वे हर बार अपना मुहावरा तोड़कर नया स्वर बनाते हैं। नन्द बाबू की कविता 'शरीर' को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि देह के लिए जैसा राग और स्वीकृति नन्द बाबू के मन में है वह भी कम कवियों में देखने को मिलता है।  गार्गी प्रकाशन के अतुल कुमार ने बताया कि ख़राब स्वास्थ्य के बावजूद साम्य के कंजकों का प्रकाशन सम्पादक विजय गुप्त की निष्ठां और समर्पण को दर्शाता है। संयोजन कर रहे युवा आलोचक पल्लव ने नन्द चतुर्वेदी के गद्य लेखन को भी महत्त्वपूर्ण बताते हुए कहा कि पिछली सदी के अनेक भुला दिए दिए लोग नन्द बाबू की गद्य कृतियों में सुरक्षित हैं। 

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