पटना : जान को जोखिम में डालकर कोरोना काल में कार्य किये - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 27 फ़रवरी 2024

पटना : जान को जोखिम में डालकर कोरोना काल में कार्य किये

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पटना. इस समय देश और प्रदेश में महामारी कोरोना का प्रकोप नहीं है.मगर इसका प्रभाव लैब टेक्नीशियन के बीच बरकरार है.जो जान को जोखिम में डालकर कोरोना काल में कार्य किये. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लैब टेक्नीशियन और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को कोरोना योद्धा कहा कहा था.लैब टेक्नीशियन से 31 मार्च 2024 तक काम निकाल कर दूध में से मक्खी की तरह बाहर कर दिया जाएगा.


मतलब निकल गया है तो पहचानते नहीं

यूँ जा रहे हैं जैसे हमें जानते नहीं

अपनी गरज थी जब तो लिपटना कबूल था

बाहों के दायरे में सिमटना कबूल था

अब हम मना रहे हैं मगर मानते नहीं

हमने तुम्हें पसंद किया क्या बुरा किया

रुतबा ही कुछ बुलंद किया क्या बुरा किया

हर इक गली की खाक तो हम छानते नहीं

मुंह फेर कर न जाओ हमारे करीब से

मिलता है कोई चाहने वाला नसीब से

इस तरह आशिकों पे कमाँ तानते नहीं

  

दूध में पड़े मक्खी तरह स्वास्थ्य विभाग से निकाले गये राम कुमार का कहना है कि हरियाणा सरकार ने सभी कोरोना योद्धा को स्वास्थ्य विभाग में समायोजित कर लिया है.इसी आधार पर बिहार में भी कोरोना वायरस टेस्ट करने वाले लैब टेक्नीशियन को एनएचएम में समायोजित कर लिया जाए. सुमन कुमार का कहना है कि कोरोना वायरस टेस्ट करने वाले लैब टेक्नीशियन का बस इतना ही गलती है कि उन्होंने अपने जान को जोखिम में डालकर कोरोना सैंपल का जांच किया. जिसका परिणाम आज यह है कि भविष्य हम लोगों  का असुरक्षित हो गया है.भीषण कोरोना महामारी के समय जिस कोरोना योद्धा लैब टेक्नीशियन के बदौलत कोरोना जांच संभव हो पाया आज सरकार उसकी अहमियत को नहीं समझ पा रही है, दुर्भाग्य हम लोगों  का डबल इंजन सरकार के रहने पर हो रहा है.यहां बता दें कि जब बीजेपी विपक्ष में थी तो उनके नेता पक्षधर थे.उसी पक्षधर वाले बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वास्थ्य मंत्री हैं.अब गेंद आपके पाले में है.इस बार हुजूर करिश्मा दिखा दीजिए. इस बीच अजय कुमार, माननीय स० वि०स० के द्वारा बिहार विधान सभा के चालू सत्र में दिनांक- 23.02.2024 को तारांकित प्रश्न संख्या-407 (द-107) के तहत सवाल पूछा कि क्या मंत्री, स्वास्थ्य विभाग, यह बताने की कृपा करेंगे कि:- क्या यह बात सही है कि कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार, पटना के पत्रांक-5199, दिनांक-02.01. 2024 के तहत प्रयोगशाला प्रावैधिकी में से कार्यरत लैब टेक्नीशियन की सेवा दिनांक-31.12.2023 से बंद कर दी गई, जिसके कारण उक्त टेक्नीशियन बेरोजगार ( हो गये हैं एवं इनके समक्ष भुखमरी की स्थिति बन गई है, यदि हाँ तो सरकार कब तक स्वास्थ्य विभाग के प्रयोगशाला प्रावैधिकी के रिक्त पदों पर इन्हें संविदा पर समायोजन करने का विचार रखती है, नहीं तो क्यों?

      

माननीय विधायक के सवाल के जवाब में श्री सम्राट चैधरी माननीय उप मुख्य (स्वास्थ्य) मंत्री बिहार ने कहा कि आंशिक रूप से स्वीकारात्मक है.वस्तुस्थिति यह है कि भारत सरकार के पत्रांक-डी.ओ. नं.जेड-28016/1/2022-एनएचएम-।।।/पार्ट-। प्राप्त अनुमोदन के आलोक में राज्य में कोरोना वायरस (कोविड-19) के रोकथाम, नियंत्रण एवं संक्रमण की जांच के लिए लैब तकनीशियनों आरटी पीसीआर सहित) की सेवा को दिनांक-31 मार्च, 2024 तक विस्तारित की गयी है. कोरोना वायरस (कोविड-19) के वर्तमान स्थिति को देखते हुए जरूरत के अनुसार वास्तविक मानव बल का आकलन कर अपने स्तर से लैब तकनीशियन की सेवा लेने के लिए संबंधित जिला /मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल को निर्देशित किया गया है. राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार में किसी भी पद के विरूद्ध समायोजित करने का कोई प्रावधान नहीं है.

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