- हिन्दी में अपने तरह की पहली पुस्तक : रामबहादुर राय
पुरोकथन
यह हिन्दी में अपने तरह की पहली पुस्तक है। इस पुस्तक का महत्व लंबे समय तक बना रहेगा। स्वस्थ जीवन हर मनुष्य की आकांक्षा है। स्वास्थ्य की समस्या को शरीर बताने लगता है। स्वस्थ व्यक्ति शरीर को आदेश देता है। अस्वस्थ व्यक्ति शरीर से आदेश प्राप्त करता है। यह हम जानते हैं। इसे रोज अनुभव भी करते हैं। ऐसी पुस्तक की आवश्यकता इस समय इसलिए बढ़ गई है कि कोरोना की महामारी ने स्वास्थ्य संबंधी अनेक बीमारियां पैदा कर दी हैं। महामारी तो नहीं है, लेकिन उसके कीचड़ और उससे उत्पन्न रोग के प्रकोप बने हुए हैं। इसके लक्षण रोज स्वास्थ्य संबंधी दुखद सूचनाओं से प्रकट हो रहे हैं। ऐसे समय में यह पुस्तक स्वस्थ जीवन के सूत्र से लोगों की मदद कर सकेगी। भारत सरकार अपने स्तर पर स्वास्थ्य के लिए रोज नए दरवाजे और नई खिड़कियां खोलने का उद्यम कर रही है। बहुत पहले चिकित्सा जगत में विभिन्न पैथियों की परस्पर दूरी बनी हुई थी, वह इस समय दूर हो रही है। इससे स्वास्थ्य की देखभाल में बड़ा सुधार हुआ है। उसी दिशा में यह पुस्तक भी है। इसकी पहल आशुतोष कुमार सिंह ने की है। वे लंबे समय से स्वस्थ जीवन के लिए जागरूकता के विविध आयोजनों के पर्याय बन गए हैं। उनकी एक पहचान कायम हुई है। ऐसे स्वास्थ्य पत्रकार आशुतोष कुमार सिंह के संपादन में निकली यह पुस्तक ‘डॉ. जे.एल. मीना : पी.एच.सी. से एन.एम.सी. तक’ भारत के स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में ‘गुणवत्ता’ के महत्व को रेखांकित करती है।
इस पुस्तक में तीन बातें हैं। एक, यह पुस्तक एक चिकित्सक की जीवन-संघर्ष गाथा को रेखांकित करती है। दूसरा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई पहल से यह पुस्तक परिचित कराती है। स्वस्थ जीवन के लिए चिकित्सा के क्षेत्र में विभिन्न पद्धतियों में परस्पर पूरकता और सहयोग की भावना आवश्यक है। तभी अपने देश में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य की देखभाल संभव है। इस पुस्तक में इस तरह के प्रयासों और कार्यों को एक सूत्र में पिरोया गया है। तीसरा, आमतौर पर स्वास्थ्य संबंधी पुस्तकें अंग्रेजी में होती हैं। वे चिकित्सकों के लिए उपयोगी होती हैं। सामान्य जन उससे भाषा की कठिनाई के कारण दूर ही बना रहता है। इस कमी को यह पुस्तक पूरी करती है, क्योंकि यह हिन्दी में प्रकाशित हो रही है। इस अर्थ में यह अपने तरह की पहली पुस्तक है। इसके केंद्र में एक चिकित्सक है। इस पुस्तक के संपादक आशुतोष कुमार सिंह के स्वास्थ्य विषयक कार्यों को मैं विगत् एक दशक से ज्यादा समय से देख रहा हूं। वे अक्सर कुछ हटकर करते हैं। उनके तमाम कार्यों का ध्येय एक ही होता है- भारत एवं दुनिया के लोगों को स्वास्थ्य के प्रति सचेत, जागरुक एवं समझदार बनाया जाए। इसके लिए उन्होंने दो बार भारत की यात्रा भी की है। विगत् 10 वर्षों से स्वस्थ भारत डाट इन वेबपोर्टल का भी संपादन कर रहे हैं। आम लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने की अगली कड़ी में मैं इस पुस्तक को देखता हूं। इस पुस्तक को पढ़ते हुए पाठक को भारत के स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र को समझने में सहूलियत मिलेगी। यह पुस्तक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर रहे प्रत्येक कामकाजी लोग, छात्र, शोधार्थी, नीति-नियंता के साथ-साथ आम लोगों के लिए भी प्रेरणादायी है। इस पुस्तक में स्वास्थ्य विषयक चर्चा तो है ही, साथ ही सामाजिक विषयों को भी स्वास्थ्य की दृष्टि से समझने की कोशिश की गई है। इस पुस्तक के प्रेरणा-पुरूष डॉ. जे.एल. मीना का गुणवर्तापूर्ण स्वास्थ्य-सेवा की दुनिया में सराहनीय कार्य रहा है। यह पुस्तक उनके जीवन-संघर्ष को रेखांकित करने में सफल रही है।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें