- गेहूं का स्टॉक सीमित करना किसानों के हित में गलत, सरकार तुरंत वापस ले फैसला
सरकार की नीति किसानों के विरुद्ध
श्री सोलंकी ने कहा कि जब गेहूं की फसल पककर तैयार हो चुकी है, तब सरकार की आंखें खुली हैं और व्यापारियों के लिए स्टॉक सीमा लागू कर दी गई है। यह नीति किसानों के लिए हानिकारक है, क्योंकि इससे वे अपनी फसल उचित दाम पर बेचने में असमर्थ हो रहे हैं। एक ओर तो भाजपा सरकार खुद को किसान हितैषी बताती है, वहीं दूसरी ओर किसानों को आर्थिक रूप से कमजोर करने और लूटने का कोई भी मौका नहीं छोड़ती। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले किसानों को खाद संकट, पानी संकट, बिजली संकट में धकेल दिया और अब जब फसल तैयार हुई तो उचित मूल्य का संकट खड़ा कर दिया। यह दिखाता है कि भाजपा सरकार पूरी तरह से किसान विरोधी है और योजनाबद्ध तरीके से किसानों का शोषण कर रही है।
भाजपा सरकार को किसानों की खुशहाली रास नहीं आती
श्री सोलंकी ने कहा कि इस वर्ष मौसम अनुकूल रहा, जिससे फसल अच्छी हुई, लेकिन भाजपा सरकार को किसानों की खुशहाली फूटी आंख नहीं सुहाती। इसलिए अब गेहूं की खरीदी पर स्टॉक लिमिट का नियम लागू कर दिया गया है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जब भाजपा सरकार किसानों के कल्याण के नाम पर करोड़ों रुपए के विज्ञापन अखबारों और टीवी पर प्रसारित कर रही है, तो अब किसानों से 3000 प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदने की अपनी घोषणा पर अमल क्यों नहीं कर रही?
सरकार तुरंत वापस ले स्टॉक लिमिट का फैसला
प्रदेश महासचिव गजेन्द्र सिंह सोलंकी ने मुख्यमंत्री एवं केंद्र सरकार से आग्रह किया कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस अन्यायपूर्ण फैसले को तुरंत वापस लिया जाए। यदि सरकार किसानों के साथ इसी तरह अन्याय करती रही, तो कांग्रेस पार्टी चुप नहीं बैठेगी और किसानों को उनका हक दिलाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी।

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