- शिव-शक्ति की आराधना भी फलदायी : मनोज दीक्षित मामा
उन्होंने बताया कि सनातन धर्म में नवरात्र का पर्व श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। वर्ष में चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ मास में चार नवरात्र का पर्व आता है। चैत्र और अश्विन नवरात्र प्रगट है, जबकि दो गुप्त नवरात्र होते हैं। इस नवरात्र पर भी श्रद्धालु पूजा और आराधना करते हैं। गुप्त नवरात्रि विशेषकर तांत्रिक क्रियाएं, शक्ति साधना, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रखती है। इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना करते हैं। इस दौरान लोग लंबी साधना कर दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करने का प्रयास करते हैं। इन दिनों में दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ विशेष लाभदायी होता है। गुप्त नवरात्रि में नौ दिनों तक उपवास रखने का विधान बताया गया है। इस नवरात्रि में माता की आराधना रात के समय की जाती है। इन नौ दिनों के लिए कलश की स्थापना की जा सकती है। अगर कलश की स्थापना की है तो दोनों समय मंत्र जाप, दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए। गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं का पूजन और साधना की जाती है। गुप्त नवरात्रि में रात्रिकालीन साधना होती है। देवी शास्त्रों की मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्या के पूजन से मनोकामना पूर्ण होती है। गुप्त नवरात्रि में, प्रत्यक्ष नवरात्रि जैसा ही साधना, पूजा पाठ करने का नियम है। पहले दिन कलश स्थापना व आखिरी दिन विसर्जन के बाद पारण होता है।

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