सीहोर : आज से किया जाएगा वृद्धा आश्रम में गुप्त नवरात्रि में शिव-शक्ति की दिव्य अनुष्ठान - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 25 जून 2025

सीहोर : आज से किया जाएगा वृद्धा आश्रम में गुप्त नवरात्रि में शिव-शक्ति की दिव्य अनुष्ठान

  • शिव-शक्ति की आराधना भी फलदायी : मनोज दीक्षित मामा

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सीहोर। गुप्त नवरात्रि में शिव-शक्ति की दिव्य अनुष्ठान का बहुत महत्व है। यह समय देवी दुर्गा के 10 महाविद्याओं की पूजा और साधना के लिए विशेष माना जाता है, साथ ही शिव-शक्ति की आराधना भी फलदायी होती है। उक्त विचार शहर के सैकड़ाखेड़ी स्थित वृद्धाश्रम में शिव-शक्ति दिव्य अनुष्ठान को लेकर अमावस्या पर कार्यक्रम की रुपरेखा तैयार करते हुए श्रद्धा भक्ति सेवा समिति के पदाधिकारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि बुधवार को अमावस पर यहां पर शिव-शक्ति अनुष्ठान को लेकर तैयारियां पूर्ण की गई है। अब गुरुवार से केन्द्र के संचालक राहुल सिंह के मार्गदर्शन में लगातार 15 दिनों तक यज्ञ, अनुष्ठान और प्रवचन का आयोजन किया जाएगा। आषाढ़ मास का गुप्त नवरात्र गुरुवार से शुरू हो रहा है। श्रद्धालु घरों में घट स्थापना के साथ नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा और आराधना करेंगे। अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित कर दुर्गासप्तशती का पाठ करेंगे। नौ दिनों तक कन्याओं की भी पूजा होगी।


उन्होंने बताया कि सनातन धर्म में नवरात्र का पर्व श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। वर्ष में चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ मास में चार नवरात्र का पर्व आता है। चैत्र और अश्विन नवरात्र प्रगट है, जबकि दो गुप्त नवरात्र होते हैं। इस नवरात्र पर भी श्रद्धालु पूजा और आराधना करते हैं। गुप्त नवरात्रि विशेषकर तांत्रिक क्रियाएं, शक्ति साधना, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रखती है। इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना करते हैं। इस दौरान लोग लंबी साधना कर दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करने का प्रयास करते हैं। इन दिनों में दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ विशेष लाभदायी होता है।  गुप्त नवरात्रि में नौ दिनों तक उपवास रखने का विधान बताया गया है। इस नवरात्रि में माता की आराधना रात के समय की जाती है। इन नौ दिनों के लिए कलश की स्थापना की जा सकती है। अगर कलश की स्थापना की है तो दोनों समय मंत्र जाप, दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए। गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं का पूजन और साधना की जाती है। गुप्त नवरात्रि में रात्रिकालीन साधना होती है। देवी शास्त्रों की मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्या के पूजन से मनोकामना पूर्ण होती है। गुप्त नवरात्रि में, प्रत्यक्ष नवरात्रि जैसा ही साधना, पूजा पाठ करने का नियम है। पहले दिन कलश स्थापना व आखिरी दिन विसर्जन के बाद पारण होता है। 

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