सम्मेलन में महिलाओं द्वारा सरकार से निम्नलिखित मांगें रखीं जायेगी
1. महिलाओं के 2 लाख रु. तक के कर्ज़ को अविलंब माफ किया जाए।
2. माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की मनमानी पर रोक लगे और उनके लिए एक नियामक संस्था बनाई जाए।
3. हर पंचायत में सरकारी बैंक खोले जाएं और महिलाओं को 2% सालाना ब्याज पर ऋण मिले।
4. जीविका समूह की महिलाओं को रोजगार दिया जाए और उनके उत्पाद की सरकारी खरीद सुनिश्चित की जाए।
5. समूह की महिलाओं से जीविका कैडरों के वेतन वसूलने की प्रथा बंद हो।
6. सहारा व अन्य वित्तीय संस्थाओं में जमा महिलाओं की राशि तुरंत वापस की जाए।
मीना तिवारी ने कहा कि महिलाएं अब चुप नहीं बैठेंगी। वे इस कर्ज और शोषण के खिलाफ संगठित संघर्ष करेंगी और सरकार को मजबूर करेंगी कि वह इस लूट की व्यवस्था को खत्म करे। उन्होंने कहा कि कर्ज के चक्रव्यूह से मुक्त कराने के लिए प्रदेशव्यापी आंदोलन की योजना बनेगी।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें