पटना : केवल जन्म प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र को ही नागरिकता का आधार मानना अनुचित - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

गुरुवार, 17 जुलाई 2025

पटना : केवल जन्म प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र को ही नागरिकता का आधार मानना अनुचित

  • बुजुर्गों, ग्रामीणों व सामान्य नागरिकों की नागरिकता से जुड़ी चिंता 
  • बुजुर्गों और गरीबों को नागरिकता से वंचित करने की दिशा में खतरनाक कदम

Voter-servay-bihar
पटना, (आलोक कुमार). केंद्र सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि अब केवल "जन्म प्रमाण पत्र" (Birth Certificate) और "निवास प्रमाण पत्र" (Domicile Certificate) को ही भारतीय नागरिकता का वैध प्रमाण माना जाएगा.यह निर्णय देश के करोड़ों नागरिकों, विशेषकर बुजुर्गों, ग्रामीणों, और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है. देश के अनेक हिस्सों में 1940 से 1970 के दशक तक जन्म और निवास का कोई सरकारी पंजीकरण नहीं होता था.ऐसे में आज के लाखों वरिष्ठ नागरिकों के पास इन दोनों दस्तावेजों का अभाव है. सवाल यह उठता है कि वे अपनी नागरिकता कैसे सिद्ध करेंगे? जबकि वोटर कार्ड,आधार कार्ड,राशन कार्ड,पैन कार्ड,पासपोर्ट जैसे दस्तावेज़ पहचान के प्रमुख साधन माने जाते हैं, फिर भी इन्हें नागरिकता सिद्ध करने के लिए अयोग्य बताना, तर्कसंगत नहीं है.


इन सभी दस्तावेजों का उपयोग केवल पहचान और सुविधा के लिए होता है, न कि नागरिकता सिद्ध करने के लिए। जैसे:

* वोटर कार्ड: चुनाव आयोग द्वारा जारी, नागरिकता नहीं सिद्ध करता.

* पैन कार्ड: केवल आयकर से संबंधित.

*आधार कार्ड: पहचान का साधन है, लेकिन नागरिकता का नहीं

* राशन कार्ड: राज्य सरकार द्वारा वितरण व्यवस्था के लिए.

*पासपोर्ट: नागरिकता आधारित है, पर आजकल कई मामलों में जांच के दायरे में.


सरकार को वैकल्पिक दस्तावेजों को भी नागरिकता का प्रमाण मानना चाहिए, जैसे—

* स्कूल प्रमाण पत्र (School Leaving Certificate)

* पंचायत प्रमाण पत्र

* वोटर लिस्ट में लंबे समय से नाम होना

* पारिवारिक रिकॉर्ड्स

* बुजुर्गों और ग्रामीणों को छूट या विशेष श्रेणी दी जाए.


यह निर्णय भविष्य में यदि NRC या नागरिकता सत्यापन जैसी प्रक्रियाएं दोबारा होती हैं, तो इन वर्गों को अवैध ठहराने का कारण बन सकता है. यह मानवाधिकारों का सीधा उल्लंघन है.


हमारी माँग है:


1. केंद्र सरकार इन दोनों दस्तावेजों के साथ अन्य वैकल्पिक दस्तावेजों को भी नागरिकता का आधार माने.

2. 60 वर्ष से ऊपर के नागरिकों के लिए विशेष छूट का प्रावधान किया जाए.

3. ग्राम पंचायत प्रमाण पत्र, स्कूल प्रमाण पत्र, भूमि रिकॉर्ड और चुनावी नामावली में नाम को भी वैध प्रमाण माना जाए.

कोई टिप्पणी नहीं: