- बुजुर्गों, ग्रामीणों व सामान्य नागरिकों की नागरिकता से जुड़ी चिंता
- बुजुर्गों और गरीबों को नागरिकता से वंचित करने की दिशा में खतरनाक कदम
इन सभी दस्तावेजों का उपयोग केवल पहचान और सुविधा के लिए होता है, न कि नागरिकता सिद्ध करने के लिए। जैसे:
* वोटर कार्ड: चुनाव आयोग द्वारा जारी, नागरिकता नहीं सिद्ध करता.
* पैन कार्ड: केवल आयकर से संबंधित.
*आधार कार्ड: पहचान का साधन है, लेकिन नागरिकता का नहीं
* राशन कार्ड: राज्य सरकार द्वारा वितरण व्यवस्था के लिए.
*पासपोर्ट: नागरिकता आधारित है, पर आजकल कई मामलों में जांच के दायरे में.
सरकार को वैकल्पिक दस्तावेजों को भी नागरिकता का प्रमाण मानना चाहिए, जैसे—
* स्कूल प्रमाण पत्र (School Leaving Certificate)
* पंचायत प्रमाण पत्र
* वोटर लिस्ट में लंबे समय से नाम होना
* पारिवारिक रिकॉर्ड्स
* बुजुर्गों और ग्रामीणों को छूट या विशेष श्रेणी दी जाए.
यह निर्णय भविष्य में यदि NRC या नागरिकता सत्यापन जैसी प्रक्रियाएं दोबारा होती हैं, तो इन वर्गों को अवैध ठहराने का कारण बन सकता है. यह मानवाधिकारों का सीधा उल्लंघन है.
हमारी माँग है:
1. केंद्र सरकार इन दोनों दस्तावेजों के साथ अन्य वैकल्पिक दस्तावेजों को भी नागरिकता का आधार माने.
2. 60 वर्ष से ऊपर के नागरिकों के लिए विशेष छूट का प्रावधान किया जाए.
3. ग्राम पंचायत प्रमाण पत्र, स्कूल प्रमाण पत्र, भूमि रिकॉर्ड और चुनावी नामावली में नाम को भी वैध प्रमाण माना जाए.

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