सीहोर : बारिश की बौछारों के पश्चात भी हजारों की संख्या में कुबेरेश्वरधाम पर पहुंच रहे कांवड यात्री - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 24 जुलाई 2025

सीहोर : बारिश की बौछारों के पश्चात भी हजारों की संख्या में कुबेरेश्वरधाम पर पहुंच रहे कांवड यात्री

  • फैशन और व्यसन से दूर रहने की सलाह देते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि ये दोनों चीजें व्यक्ति को बर्बाद कर सकती : अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक प्रदीप मिश्रा

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सीहोर। कुबेरेश्वरधाम पर हर रोज हजारों की संख्या में श्रद्धालु और कांवड यात्री पहुंच रहे है। बारिश की बौछारों के पश्चात भी कांवड यात्रियों के हौसले बुलंद है। आस्था का सैलाब इतना है कि बुजुर्गों के लड़खड़ाते कदम भी उनको पैदल चलने से रोक नहीं पा रहे हैं। शहर के सीवन नदी से बच्चे, महिला-पुरुष और बुजुर्ग आस्था और उत्साह के साथ धाम पर पहुंच रहे है। उनके स्वागत और  चाय-पानी और नाश्ते के लिए शहरवासियों ने स्वागत शिविर लगाए है। वहीं कुबेरेश्वरधाम पर पांच दिवसीय आन लाइन शिव महापुराण का आयोजन किया जा रहा। गुरुवार को शिवमहापुराण के चौथे दिन अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहाकि फैशन और व्यसन से दूर रहने की सलाह देते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि ये दोनों चीजें व्यक्ति को बर्बाद कर सकती हैं। पंडित श्री मिश्रा ने कहाकि फैशन, व्यसन, संग और सत्संग का जीवन में काफी महत्व है। उन्होंने कथा के दौरान कहाकि फैशन और व्यसन दोनों ही जीवन में नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं, फैशन में अत्यधिक लिप्त होना व्यक्ति को दिखावे और भौतिकवादी चीजों की ओर ले जाता है, जबकि व्यसन जैसे कि धूम्रपान, शराब, या अन्य नशीली चीजें व्यक्ति के स्वास्थ्य और जीवन को बर्बाद कर सकती हैं. वे लोगों को इन दोनों से बचने और सादगीपूर्ण जीवन जीने की सलाह देते हैं। कई संस्था कहती है कि नशे से दूर का संकल्प दिलाए, उन्होंने कहाकि नशे करने वाले को खुद ही नशे से दूर रहना चाहिए, संकल्प अपना कार्य करता है, नशे करने वालों को अपने परिवार, अपने बीबी-बच्चों के लिए स्वयं में बदलाव लाना चाहिए। उन्होंने फैशन और व्यसन के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा है कि फैशन एक दिखावा है जो व्यक्ति को दूसरों से अलग दिखने की चाहत में आकर्षित करता है, जबकि व्यसन एक लत है जो व्यक्ति के जीवन को नियंत्रित करती है। वे लोगों को इन दोनों से दूर रहने और एक संतुलित जीवन जीने की सलाह देते हैं। इसके अलाव संग और सत्संग का महत्व बताते हुए कहाकि हमारे जीवन की दिशा को परिवर्तन करने के लिए अच्छे लोगों का संग करना चाहिए और अपने समय का सदउपयोग करने के लिए सत्संग करना चाहिए।


डॉक्टरों को भगवान शिव का एक रूप मानते

उन्होंने कहाकि डॉक्टरों को भगवान शिव का एक रूप मानते हैं। वे कहते हैं कि जिस तरह भगवान शिव संसार के जीवों का कल्याण करते हैं, उसी तरह डॉक्टर भी अपने मरीजों की देखभाल करते हैं, उन्हें स्वस्थ करते हैं, और जीवनदान देते हैं। कुबेरेश्वधाम पर उत्तरप्रदेश से आई श्याम बाई कहना है कि शुगर 500 सौ पहुंच गई थी। किडनी, लीवर सब खराब हो गए थे। आखिरी में डॉक्टरों ने डायलिसिस को बोल दिया। इसी बीच किसी ने कथा सुन रखी थी, उन्होंने जल चढ़ाकर वो जल लड़के के मुंह से लगाया। रुद्राक्ष उसके पास रखा। तीन दिन में वेंटिलेटर हट गया। प्रदीप मिश्रा ने कहा कि डॉक्टर भी शिव का अंश हैं। शिव पर पूर्ण भरोसा रखिए। इसलिए उन्होंने डॉक्टरों की जांच के साथ भगवान शंकर पर विश्वास किया है और वह पूर्ण रूप से स्वस्थ्य हूं।


कथा सुनने के बाद दूर हो गए

इधर कई लोग आन लाइन कथा में आते है हमारे संकट प्रदीप मिश्रा की कथा सुनने के बाद दूर हो गए। वे यहां पर चिट्ठी लिखकर भी लाते हैं। वह कहते हैं कि जो काम दवाई नहीं कर पाई वो पंडित जी की कथा सुनकर भगवान भोले को एक लोटा जल अर्पित करने से पूरी हो गई। पंडित प्रदीप मिश्रा ने अपनी कथा में ऐसे कई श्रद्धालुओं की चि_ियां का जिक्र भी करते आ रहे है। गुरुवार को एक बहन का पत्र पढ़कर सुनाते हुए पंडित श्री मिश्रा ने बताया कि खरगोन की किरण मंडलोई के बेटे ने पढ़ाई के साथ भगवान शिव की भक्ति की और सीए में सफलता मिली।

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