- अहंकार रहित जीवन जीने की कला सिखाती है भागवत कथा : अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा

सीहोर। सत्य का अनुसरण करना, सत्संग में जाना और भगवान की भक्ति करना हर किसी के वश की बात नहीं है। श्रीमद्भागवत कथा सुनने का व्यक्ति जब संकल्प करता है, उसी समय परमात्मा उसके हृदय में आकर निवास कर लेते हैं। भगवान की कथा ऐसी है कि इसका ज्यों-ज्यों पान करते हैं, त्यों-त्यों इच्छा बढ़ती जाती है। कथा रस कभी घटता नहीं निरंतर बढ़ता रहता है। उक्त विचार जिला मुख्यालय के समीपस्थ ग्राम भटौनी कुबेरेश्वरधाम पर जारी सात दिवसीय भागवत कथा के छठवें दिवस पहुंचे अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहे। इस मौके पर पंडित श्री मिश्रा ने व्यास पीठ का पूजन अर्चन किया। इस मौके पर समस्त ग्रामवासियों ने पंडित श्री मिश्रा का स्वागत किया। इस संबंध में जानकारी देते हुए ग्राम भटौनी के सरपंच प्रतिनिधि धर्म सिंह मेवाड़ा ने बताया कि ग्राम में सभी क्षेत्रवासियों के सहयोग से संगीतमय श्रीमद भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। इस मौके पर शनिवार को पंडित श्री मिश्रा कथा में पहुंचे और उन्होंने क्षेत्रवासियों को पुनित कार्य के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि रविवार को कथा के समापन के पश्चात भंडारे का आयोजन किया जाएगा। कथा का श्रवण कथा वाचक पंडित श्याम व्यास के द्वारा की जा रही है। कथा के दौरान पंडित श्री व्यास ने छठवें दिवस भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया। इस मौके पर उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और माता रुकमणी आदि का वर्णन किया। उन्होंने कहाकि कथा का श्रवण करने से नित्य नए आनंद की अभिवृद्धि होती रहती है। श्रीमद्भागवत आध्यात्म दीपक है, जिस प्रकार एक जलते हुए दीपक से हजारों दीपक प्रज्वलित हो उठते हैं, उसी प्रकार भागवत के ज्ञान से हजारों, लाखों मनुष्यों के भीतर का अंधकार नष्ट होकर ज्ञान का दीपक जगमगा उठता है। भगवान का आश्रय ही सच्चा आश्रय है।
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