मुस्कान (कक्षा 9वीं) ने पहली बार कार्यक्रम का संचालन किया और बहुत अच्छा किया। अनम (कक्षा 9वीं) ने आज़ादी पर गीत गाया। जोया (कक्षा 8वीं) ने पंडित नेहरू पर भाषण दिया। शान (कक्षा 8वीं) ने सरदार पटेल पर बोलते हुए सभी को प्रभावित किया। हिफ़ज़ा (कक्षा 9वीं) ने डॉ. जाकिर हुसैन को याद किया। नाज़िया (कक्षा 10वीं) ने मौलाना अबुल कलाम आज़ाद पर भाषण दिया। अफ़शीन, उम्मे हबीबा, ऋचा और अरसिल ने भारत की उपलब्धियों पर अंग्रेज़ी में पैनल चर्चा की। ये बच्चे हाल ही में स्पोकन इंग्लिश कोर्स में जुड़े हैं, लेकिन आत्मविश्वास के साथ मंच पर उतरे और बेहतरीन प्रदर्शन किया। इंशा कुलसूम और ज़ोहा फ़ातिमा ने भी एक सुंदर देशभक्ति गीत गाया। कार्यक्रम में कई अन्य बच्चों ने भी अपनी बात रखी और देश के शहीदों को याद किया। इस मौके पर हमारी सदा ट्रस्ट की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 भी जारी की गई। एक खास पल तब आया जब ममता (जो पहले पढ़ाई छोड़ चुकी थीं) और अमरजीत सिंह (कक्षा 5वीं) को मंच पर बुलाया गया। उनके साथ मंच पर मुख्य अतिथि डॉ. मुन्ने भारती और ट्रस्ट की ट्रस्टीज़ सईद अहमद व सफ़िया यासमीन भी थे। इससे यह संदेश गया कि ट्रस्ट लगातार स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने की कोशिश कर रहा है।
मुख्य अतिथि डॉ. मुन्ने भारती ने बच्चों को शिक्षा पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा "पढ़ाई ही वह रास्ता है जिससे आप अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं। अगर आप आईएएस बनना चाहते हैं तो पढ़ाई में पूरी मेहनत करें। हमारी सदा ट्रस्ट और इसके संस्थापक मोहम्मद. इरशाद आलम आप सबके भविष्य के लिए ईमानदारी से काम कर रहे हैं। इस मौके का पूरा फायदा उठाइए।” उन्होंने एक प्रेरक कहानी भी सुनाई – एक गरीब बच्चे की, जिसे पढ़ाई में मदद मिली और बाद में वह आईएएस अधिकारी बना। उन्होंने बच्चों और माता-पिता से कहा कि वे कभी भी पढ़ाई न छोड़ें और शहीदों की याद में हमेशा दूसरों की मदद करने का संकल्प लें। कार्यक्रम के अंत में मोहम्मद इरशाद आलम ने डॉ. मुन्ने भारती को समय निकालकर बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए धन्यवाद दिया। कार्यक्रम में लगभग 96 लोग शामिल हुए। ट्रस्ट की ट्रस्टीज़ सईद अहमद, सफ़िया यासमीन और तरन्नुम खुर्शीद ने भी बच्चों को बधाई दी और प्रोत्साहित किया। अंत में बच्चों को बिस्किट और टॉफ़ी बाँटी गईं, जिससे उनके चेहरों पर मुस्कान आ गई और दिन यादगार बन गया।

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