उसी तरह राष्ट्रहित की सोच के दिव्य बीज घर से ही बच्चों के मन मे बोए जाएं तो यह भाव उनके व्यक्तित्व में पूरी तरह समाहित हो जाएंगे। इसके लिए जरूरी है कि दादी नानी मातृभूमि के लिए अपना जीवन न्यौछावर करने वाली महान विभूतियों की कहानियां सुनाएँ, उनके रोचक व ऐतिहासिक प्रसंगों को समझाएँ कि किस प्रकार कितनी भी कठिन परिस्थितियों के समक्ष भी उन्होंने अपने धर्म व मातृभूमि के लिए समझौता नहीं किया अपितु धर्म के लिए अपना शीश कटवाने के लिए भी तैयार हो गए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि परिवारों में देश के नाम सिर्फ शिकायतों और आलोचनाओं की बात न हो। सकारात्मक विचारों के साथ बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनने और अपने कर्तव्यों के प्रति प्रतिबद्धता की भी सीख घर से ही दी जाए। रोजमर्रा के जीवन में शामिल यह छोटे-छोटे बदलाव बच्चों की सोच की दिशा मोड़ने में काफी अहम साबित हो सकते हैं। अपने परिवार की नई पीढ़ी को राष्ट्रधर्म के मूल्यों का बोध कराना हर परिवार की जिम्मेदारी है क्योंकि यही जीवन मूल्य उनमें भारतीय होने के गौरव और स्वाभिमान के पैदा करेंगे।
श्रमण डॉ पुष्पेंद्

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