जलकुंभी से कंपोस्ट बनाने की पहल
बैठक में कृषि विज्ञान केंद्र, सुखेत के वैज्ञानिक डॉ. सौरभ चौधरी ने जानकारी दी कि फुलपरास प्रखंड के जालीपुर गाँव में किसानों द्वारा जलकुंभी से कंपोस्ट तैयार किया जा रहा है। इस पर जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि जलकुंभी से बने कंपोस्ट का असेसमेंट किया जाए। इसके बनाने की विधि का प्रचार-प्रसार कर किसानों को प्रेरित किया जाए। उत्पाद का ब्रांडिंग व मार्केटिंग कर बाजार से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को तालाब से जलकुंभी से राहत मिलेगी तथा वे अपने तालाब में मछली व मखाना उत्पादन सुचारू रूप से कर पाएंगे, जिससे उनकी आमदनी में वृद्धि होगी।
अवशेष प्रबंधन पर जोर
जिलाधिकारी ने कहा कि “किसी समाज के उत्थान का मुख्य आधार उसका अवशेष प्रबंधन होता है।” उन्होंने निर्देश दिया कि अवशेष प्रबंधन से संबंधित एक क्लस्टर आधारित सेमिनार आयोजित किया जाए।
कार्यों की स्वीकृति व भविष्य की योजना
बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 में आत्मा योजना के तहत किए गए कार्यों की स्वीकृति प्रदान की गई तथा शेष लक्ष्य की प्राप्ति हेतु कार्य योजना का अनुमोदन किया गया। परियोजना निदेशक, आत्मा को निर्देश दिया गया कि विभागीय लक्ष्य के अनुरूप शत-प्रतिशत उपलब्धि सुनिश्चित करें। साथ ही जिलाधिकारी ने कहा कि जिले के पांच गांवों का चयन कर वहां प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाए और किसानों को सीधे बाजार से लिंक किया जाए। उन्होंने मिथिला बीज फेड यूनियन से समन्वय स्थापित कर सब्जी उत्पादक किसानों के उत्थान हेतु कार्य करने का भी निर्देश दिया। बैठक में जिला कृषि पदाधिकारी ललन चौधरी, परियोजना निदेशक आत्मा सहित परिषद के सभी सदस्य उपस्थित रहे।

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