- रक्तदान से लेकर बाल शिक्षा तक : मानवता का संदेश लेकर लौटे काशी के नायक
- रक्तदान केवल जीवनदान नहीं, बल्कि मानवता का सबसे बड़ा धर्म है
वहीं, बनारस की युवा समाजसेवी नेहा दुबे को वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस इंग्लैंड और यंग कम्युनिटी चैंपियन अवॉर्ड से नवाज़ा गया। नेहा ने रक्तदान अभियानों के साथ-साथ बारह जरूरतमंद बच्चियों की शिक्षा का संपूर्ण दायित्व स्वयं उठाया हैकृउन बच्चियों का, जिन्हें परिवार की मजबूरियों ने स्कूल से दूर कर दिया था। दोनों संस्थाएं मानती हैं कि “रक्तदान केवल जीवनदान नहीं, बल्कि मानवता का सबसे बड़ा धर्म है।” यही विश्वास उन्हें दिन-रात समाज के बीच सक्रिय रखता है। समारोह से लौटते हुए रोहित और नेहा ने कहा कि यह उपलब्धि व्यक्तिगत नहीं, बल्कि उन सभी सहयोगियों की निष्ठा का परिणाम है, जो उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर सेवा-पथ पर चलते हैं। काशी की गलियों से लेकर दिल्ली के भारत मंडपम तक गूंजा यह संदेश बताता है कि गंगा-जमुनी संस्कृति की यह धरती समाजसेवा को अवसर नहीं, बल्कि जीवन का उत्सव मानती है।

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