- भागवत कथा सुनने के लिए सड$क, गली और आस-पास के स्थानों पर बैठे श्रद्धालु, अग्रवाल महिला मंडल द्वारा पंडित प्रदीप मिश्रा की भागवत कथा
- भोले की भक्ति में होती है शक्ति, पंडित प्रदीप मिश्रा बोले- भगवान शिव की आराधना करने वाला कभी दुखी नहीं रहता

सीहोर। भादों में विगत 25 सालों से शहर के बड़ा बाजार स्थित अग्रवाल धर्मशाला में महिला मंडल के द्वारा भागवत कथा का आयोजन किया जाता है, यह 26 वां साल है, इस कथा को लेकर शहर के सभी महिला मंडलों को इंतजार रहता है। सालों से यहां पर रहने वाले श्रोता सिद्ध हो गए है। इसी व्यास पीठ से हर साल बिना विराम किए कथा का सिलसिला जारी है। यहां पर होने वाली कथा का क्षेत्रवासियों को लंबा इंतजार रहता है। भक्ति और अपनेपन का यह आस्था का कुंभ हमेशा कायम रहे। उक्त विचार शहर के बड़ा बाजार में सोमवार से जारी सात दिवसीय भागवत कथा के पहले दिन अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहे। भागवत कथा का आरंभ सादगी के साथ शोभा यात्रा के साथ किया गया था। कथा शहर के श्री सत्यनारायण मंदिर से आरंभ हुई जो खजांची लाइन स्थित श्रीजी मंदिर पर पहुंची और उसके बाद यात्रा कथा स्थल पर पहुंची। कथा के पहले ही दिन सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने जहां पर भी स्थान मिला पूरे भाव से कथा का श्रवण किया। यहां पर आए बाहर से श्रद्धालुओं कहना है कि वह आदरणीय गुरुदेव के दर्शन और कथा का श्रवण करने के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर से आए है, श्रद्धालुओं के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव थे। शाम को सैकड़ों लोगों को बड़ा बाजार में ही प्रसादी का वितरण किया गया। विठलेश सेवा समिति के द्वारा यहां पर कथा का श्रवण करने आए भक्तों के लिए भोजन-प्रसादी का वितरण की व्यवस्था की गई है। कथा के पहले दिन सादगी के साथ सुबह नौ बजे शोभा यात्रा निकाली गई थी, इस मौके पर मुख्य यजमान शैलेष अग्रवाल और श्रीमती मंजू अग्रवाल आदि शामिल थे। वहीं भागवत भूषण पंडित प्रदीप मिश्रा का अग्रवाल महिला मंडल की अध्यक्ष रुकमणी रोहिला, उपाध्यक्ष प्रेमलला रुठिया, कोषाध्यक्ष संध्या मोदी, सचिव मोहिनी अग्रवाल और सह सचिव ज्योति मोदी आदि ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। कथा के पहले दिन पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहाकि भागवत कथा सभी भक्तों के लिए अनादि काल से आस्था और श्रद्धा का केंद्र रही है, जिसके माध्यम से भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति और प्रेम बढ़ता है। शुकदेव महाराज ने राजा परीक्षित को सात दिनों तक इसका अध्ययन कराया, इसके पश्चात भी राजा परीक्षित इस कथा को पूरे भाव से मनन करते रहे, कथा इतनी पावन है कि यहां पर आने वाले श्रद्धालु इसको सुनने की ललक रखते है। सोमवार को पंडित श्री मिश्रा ने कहाकि जो भी सच्चे मन से भगवान का सुमिरन करता है भगवान अंतकरण में प्रकट होते है। भगवान को छल कपट प्रिय नहीं है। उन्हें निष्कपट सरल सहज लोग प्रिय है। इसलिए भगवान के प्रति सहज रहो। उसमें अपनी बुद्धि नहीं लगानी चाहिए। भगवान के प्रति भक्ति श्रद्धा होनी चाहिए।
शिव-शक्ति एक है
कथा के पहले दिन उन्होंने कहाकि शिव-शक्ति एक है, इसको अलग नहीं किया जा सकता है। शिव भक्तों को बताया कि शिव महापुराण कथा कहती है कि भगवान भोलेनाथ बहुत भोले हैं, उनको पाने के लिए किसी तंत्र, मंत्र, बहुत साधना और बहुत घंटों की अराधना और पूजा से नहीं, बल्कि केवल एक लौटा जल लेकर भगवान शंकर को समर्पित कर दें और सारी समस्या का हल हो जायेगा।
पंडाल बढाया जाएगा
कथा के पहले दिन ही कथा स्थल पर लगाए पंडाल छोटे पड़ गए है। इसको देखते हुए अग्रवाल महिला मंडल अध्यक्ष रुकमणी रोहिला ने कथा स्थल के पास 30 फीट से अधिक पंडाल ओर लगाए जाने की व्यवस्था की गई है। मंगलवार को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का पूरा सहयोग व्यवस्था में मिल रहा है।
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