डॉ. झा ने छात्रों से कहा कि –
नैतिक मूल्यों को सदैव जीवन में सर्वोपरि रखें।
समाज और जरूरतमंदों की मदद करना प्रत्येक विद्यार्थी का कर्तव्य है।
हर कार्य को पूरे मन और समर्पण से करें, तभी सफलता मिलेगी।
आत्मअनुशासन, समय का सही उपयोग और सकारात्मक सोच जीवन को सफल बनाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि युवा पीढ़ी राष्ट्र निर्माण की धुरी है। इसलिए विद्यार्थियों को चाहिए कि वे नवाचार, टीमवर्क और नेतृत्व क्षमता को विकसित करें। चुनौतियों से घबराने की बजाय उन्हें अवसर मानकर आगे बढ़ें। इस अवसर पर कॉलेज के प्राचार्य प्रो.(डॉ.) संदीप तिवारी ने डॉ. झा का स्वागत करते हुए कहा कि इंजीनियरिंग छात्र यदि अपने तकनीकी ज्ञान को सामाजिक सरोकार से जोड़ेंगे, तो यह समाज और राष्ट्र दोनों के लिए वरदान होगा। उन्होंने कहा कि आज के समय में केवल तकनीकी दक्षता ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नैतिकता, अनुशासन और सेवा-भावना भी उतनी ही आवश्यक है। डॉ. तिवारी ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने कॉलेज को केवल शिक्षा का केंद्र न मानें, बल्कि इसे नवाचार और सामाजिक विकास का मंच बनाएं। उन्होंने विश्वास जताया कि इंजीनियरिंग छात्र अपनी मेहनत और रचनात्मकता से बिहार ही नहीं, पूरे देश का गौरव बढ़ाएँगे। कार्यक्रम का संचालन सहायक प्राध्यापक श्री विनायक झा और डॉ. बुशरा तज़ीम ने संयुक्त रूप से किया। अंत में सहायक प्राध्यापक श्री मयंक कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। छात्रों ने कहा कि इस प्रकार का संवाद न केवल उन्हें शैक्षणिक प्रेरणा देता है, बल्कि जीवन के सही मार्ग पर चलने का भी मार्गदर्शन करता है।

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