दरभंगा : महाराज लक्ष्मीश्वर सिंह जी की 167वीं मनाई गई - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 25 सितंबर 2025

दरभंगा : महाराज लक्ष्मीश्वर सिंह जी की 167वीं मनाई गई

Dce-darbhanga
दरभंगा (रजनीश के झा)। आज दरभंगा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के लिए ऐतिहासिक क्षण रहा जब दरभंगा राज परिवार के कुमार कपिलेश्वर सिंह ने परिसर का आगमन किया। यह विशेष अवसर महान दानवीर, मिथिला गौरव महाराज लक्ष्मीश्वर सिंह जी की 167वीं जयंती के उपलक्ष्य में और भी स्मरणीय बन गया। अपने दौरे के दौरान कुमार ने संस्थान की विभिन्न शैक्षणिक एवं तकनीकी सुविधाओं का अवलोकन किया और शिक्षण व्यवस्था से लेकर प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय, खेलकूद एवं नवाचार केंद्र तक का निरीक्षण किया। कॉलेज परिवार ने कुमार का हार्दिक स्वागत किया और उन्हें संस्थान की उपलब्धियों एवं भविष्य की योजनाओं से अवगत कराया। इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. संदीप तिवारी ने कहा कि “दरभंगा राज परिवार का शिक्षा के क्षेत्र में योगदान अनुपम रहा है। कुमार कपिलेश्वर जी का आशीर्वाद और सान्निध्य हमारे लिए प्रेरणादायी है। DCE दरभंगा उनके आदर्शों और योगदानों को संरक्षित करने एवं नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयास करेगा।”


कुमार कपिलेश्वर सिंह ने कॉलेज की विभिन्न गतिविधियों को देखकर संतोष व्यक्त किया और छात्रों को निष्ठा, अनुशासन तथा नवाचार की ओर प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि दरभंगा की ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। आने वाले दिनों में DCE दरभंगा दरभंगा महाराज परिवार के योगदान पर आधारित विभिन्न रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित करेगा। इसमें डॉक्यूमेंट्री निर्माण, क्विज़ प्रतियोगिताएँ, पोस्टर एवं निबंध लेखन जैसी गतिविधियाँ शामिल होंगी। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य छात्रों को दरभंगा की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्ता से जोड़ना है, साथ ही उन्हें यह समझाना है कि शिक्षा और समाज सेवा में दरभंगा राज परिवार की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण रही है। कार्यक्रम में फैकल्टी सदस्य एवं छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और उन्होंने युवराज के विचारों से प्रेरणा प्राप्त की। मीडिया समन्वयक सहायक प्राध्यापक श्री विनायक झा, Mr. Mayank Kumar Singh ने बताया कि “दरभंगा महाराज के योगदानों को जीवंत बनाए रखने के लिए DCE परिवार अपनी ओर से हर संभव प्रयास करेगा, ताकि छात्र न केवल तकनीकी ज्ञान बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़ सकें।”

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