मिथिला स्टूडेंट यूनियन और गांव के युवाओं ने इस मुद्दे पर आगे आकर आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है। संगठन का कहना है कि सड़क निर्माण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि प्रशासन जल्द कार्रवाई नहीं करता है, तो गांव के लोग आंदोलन और धरना-प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे। यह संघर्ष केवल सड़क के लिए नहीं, बल्कि चम्पा गांव के सम्मान और अधिकार के लिए है। गांव के बुजुर्गों ने भी अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा कि आज़ादी के 75 साल से अधिक बीत जाने के बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना शर्मनाक है। सरकार की योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा है। प्रेस के माध्यम से चम्पा गांव के लोग जिला प्रशासन और बिहार सरकार से मांग करते हैं कि सड़क निर्माण कार्य को तत्काल शुरू किया जाए। यदि आने वाले दिनों में इस पर सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो चम्पा गांव की जनता और सामाजिक संगठन बड़े पैमाने पर जनआंदोलन करेंगे। इस बैठक में चम्पा निवासी– प्रभात प्रभाकर, कृष्णा यादव, बाबा सुमित मिश्रा, रामसागर यादव, नरेश कुमार, रंजय कुमार,गोलू कुमार, सूरज कुमार, राकेश शाह, रंजन कुमार, नीरज कुमार, रूपन कुमार, संजीत कुमार पवितार जी, विल्टू यादव, गजेंद्र साहेब, चालीतर यादव, सरवन झा, रंजन कुमार, पंकज कुमार, अमतेश भगत, लोरिक यादव, संतोष कुमार,राम उदगार यादव, धर्मेन्द्र कुमार यादव, एमएसयू के जिला कॉलेज प्रभारी आनंद पासवान, विकास कुमार झा सहित दर्जनों लोग मौजूद थे।
मधुबनी (रजनीश के झा)। मिथिला स्टूडेंट यूनियन के द्वारा आज चम्पा गाँव में ग्रामीणों के साथ बैठक किया। चम्पा गांव की जनता लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग कर रही है। गांव की मुख्य सड़क वर्षों से जर्जर और टूटी हुई स्थिति में है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। बरसात के दिनों में यह मार्ग कीचड़ और गड्ढों में तब्दील हो जाता है, जिसके कारण ग्रामीणों, छात्रों, मरीजों और किसानों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बच्चों को विद्यालय जाने में परेशानी होती है, मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है और किसानों को अपनी उपज बाजार तक ले जाने में दिक्कत झेलनी पड़ती है। जिला अध्यक्ष मिथिला स्टूडेंट यूनियन अंकित आज़ाद ने बताया कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर कई बार प्रशासन को आवेदन दिया गया, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है। सरकार और संबंधित विभागों की चुप्पी ने ग्रामीणों में आक्रोश भर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं है, बल्कि यह विकास की पहली सीढ़ी है। बिना सड़क के गांव की तरक्की की कल्पना नहीं की जा सकती।

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