विशेष : जलेबी से पूछो, नाम में क्या रखा है !! - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

मंगलवार, 2 सितंबर 2025

विशेष : जलेबी से पूछो, नाम में क्या रखा है !!

jalebi
बेंगलुरु, 2 सितम्बर (विजय सिंह)। हम भारतीय खाने के बहुत शौकीन होते हैं और विशेषकर सुबह नाश्ते में तो विविधता अपेक्षित है और अगर सप्ताह में दो दिन रसभरी मीठी जलेबी ना मिले तो समझिए हफ्ता अधूरा रह गया I देश की राजधानी दिल्ली में तो विशाल जलेबी के जलवे हैं तो मथुरा में आलू जलेबी और मध्य प्रदेश की खोवा, मावा जलेबी के लोग दीवाने हैं I गुजरात के जलेबी-फाफड़ा के तो कहने ही क्या I बैंगलोर सहित दक्षिण भारतीय राज्यों में अंग्रेजी भाषा का चलन अधिक है तो जलेबी के अंग्रेजी नाम जानने की उत्सुकता हुई।


अक्सर हम कहते सुनते रहते हैं कि नाम में क्या रखा है ! उदारवादी विचारधारा के समर्थक इसको सही भी मानते हैं I आज से 461 वर्ष पूर्व 1564 में इंग्लैंड में जन्में मशहूर अंग्रेजी उपन्यासकार विलियम शेक्सपीयर ने 27 साल की आयु में सन् 1591 में जब अपने चर्चित उपन्यास रोमियो -जूलियट की रचना शुरु की, तो उन्होंने भी इस बात का समर्थन किया कि "नाम में क्या रखा है?" शेक्सपीयर ने उपन्यास के पात्र रोमियो-जूलियट के संवाद का उदाहरण देते हुए कहा था कि "नाम किसी वस्तु या व्यक्ति के सार या गुणवत्ता को नहीं बदल सकता, जैसे गुलाब को किसी और नाम से बुलाने पर भी उसकी खुश्बू उतनी ही मोहक और मीठी रहती है, जितना गुलाब कहने पर । " कुछ वर्ष पहले फिल्मकार सुधीर मिश्रा ने बीबीसी को दिए गए एक साक्षात्कार में कहा था कि "इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि नाम में कुछ तो रखा है । " श्री मिश्रा का माना था कि आज अगर शेक्सपीयर होते तो उनका मत भी पहले की अपेक्षा भिन्न होता । अपनी बात को बढ़ाते हुए सुधीर मिश्रा कहते हैं कि पहले की फिल्मों के नाम "मदर इंडिया",  "मेरा गांव मेरा देश" जैसे होते थे परंतु अब "बुड्ढा तेरा बाप", "द डर्टी पिक्चर" जैसे नाम चलन में हैं, तो बहुत कुछ नाम से ही बदलाव की आहट दे जाता है I जाने माने हास्य कवि काका हाथरसी ने भी अपनी रचना, "नाम-रूप भेद पर कभी किया है गौर", में  नाम की प्रासंगिकता का जिक्र किया है । अरे ! मैं भी कहाँ निकल गया ! चर्चा तो जलेबी के नाम की होनी थी।


तो गूगल महोदय की कृपा से जलेबी के अंग्रेजी नाम आखिर मिल ही गए । जिन "जलेबी" का नाम लेते ही रसभरी मीठी स्वाद का अनुभव होने लगता है । "गूगल" महोदय की कृपा से मिले  "जलेबी" के अंग्रेजी नाम - स्वीट प्रेटजल(Sweet Pretzel), क्वायल्ड फनेल केक(Coiled Funnel Cake)और इंडियन सिरप कोटेड डेजर्ट(Indian Syrup-Coated Dessert) से ना तो स्वाद के आनंद की अनुभूति हो रही, ना ही जलेबी के साथ अपनत्व की । दसवीं शताब्दी में अरबी पाक कला पुस्तक "किताब अल तबीख" में जलेबी बनाने की विधि का उल्लेख है । मध्यकाल में तुर्की और फारसी व्यापारियों के आगमन के साथ जलेबी का भी भारत में आगमन हुआ ।


बाद में भारतीयों ने अपनी बेजोड़ पाक कला और देशी स्वाद का तड़का लगाकर जलेबी को अत्यंत स्वादिष्ट बना दिया, जिसके नाम से ही अब स्वाद आने लगता है । मध्य पूर्व और मध्य काल में जलेबी को जलेबिया या जुल्बिया कहा जाता रहा है I रस से सराबोर होने की वजह से जलवल्लिया नाम भी चलन में रहने की जानकारी मिलती है I लेकिन अंग्रेजी नाम से उस भावना का बोध नहीं हो रहा ।

सोचता हूँ कि क्यों न पूरे देश की  "जलेबी" दुकानों पर जाकर, "जलेबी" की जगह "coiled funnel cake" मांगा जाए और दुकानदार के चेहरे की भाव भंगिमा पर शोध किया जाए !!

पाठकों की सलाह व प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा ।


#whatisinaname  #jalebi 

कोई टिप्पणी नहीं: